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Farrukhabad News: मंडी के व्यापारियों का शीतगृहों में भंडारित आलू का ब्योरा तलब
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फर्रुखाबाद। शहर की सातनपुर मंडी के व्यापारियों ने लाखों क्विंटल आलू खरीदकर शीतगृहों में भंडारित किया है। गेटपास न कटने से करोड़ों के राजस्व की क्षति होने की आशंका है। इससे सिटी मजिस्ट्रेट ने मंडी सचिव से व्यापारियों पर बकाया वसूली व शीतगृहों में भंडारित आलू का ब्योरा तलब कर लिया है।
एशिया में आलू की प्रमुख मंडियों में शामिल सातनपुर मंडी में दिसंबर से लेकर मई व जून तक करोड़ों का आलू व्यापार होता है। मार्च से शीतगृहों में आलू का भंडारण शुरू हो जाता है। इस दौरान आलू व्यापारी मंडी खरीद करने के बाद 6-आर रसीद कटवाकर बिना गेटपास कटवाए सीधे शीतगृह में भंडारण के नाम पर आलू भेजते रहते हैं। इसमें मंडी को शुल्क भी नहीं मिलता।
शीतगृह से आलू निकलने पर उनका गेटपास कटवाकर मंडी शुल्क वसूला जाता है। सातनपुर मंडी से बिना गेट पास कटवाए ही व्यापारियों ने लाखों क्विंटल आलू भंडारित किया है। जो अब शीतगृहों से निकालकर बेचा जा रहा है। कई व्यापारी तो मंडी के जिम्मेदारों से सांठगांठ कर बिना गेटपास के ही आलू बेच लेते हैं। इससे मंडी शुल्क में लाखों के राजस्व का चूना लगता है। व्यापारियों पर मंडी शुल्क का करोड़ों रुपये बकाया है, इसकी वसूली भी नहीं हो पा रही है। इसको देखते हुए मंडी सभापति सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार बंसल ने शिकंजा कस दिया है। उन्होंने मंडी सचिव को पत्र जारी कर सूचना तलब की।
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उन्होंने मंडी के लाइसेंस धारकों से कब से कितनी धनराशि बकाया है और कितनी वसूली हुई, 6-आर रसीद कटवाकर कितना आलू भंडारित है, उनका व्यापारियों सहित विवरण मांगा है। इसके साथ ही मंडी में कुल कितने लाइसेंसी व्यापारी व आढ़ती हैं, कितने का नवीनीकरण हुआ और बिना नवीनीकरण कारोबार करने वाले कितने व्यापारियों पर कार्रवाई की गई है, इसका तीन दिन में रिकार्ड तलब किया गया है।
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एशिया में आलू की प्रमुख मंडियों में शामिल सातनपुर मंडी में दिसंबर से लेकर मई व जून तक करोड़ों का आलू व्यापार होता है। मार्च से शीतगृहों में आलू का भंडारण शुरू हो जाता है। इस दौरान आलू व्यापारी मंडी खरीद करने के बाद 6-आर रसीद कटवाकर बिना गेटपास कटवाए सीधे शीतगृह में भंडारण के नाम पर आलू भेजते रहते हैं। इसमें मंडी को शुल्क भी नहीं मिलता।
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शीतगृह से आलू निकलने पर उनका गेटपास कटवाकर मंडी शुल्क वसूला जाता है। सातनपुर मंडी से बिना गेट पास कटवाए ही व्यापारियों ने लाखों क्विंटल आलू भंडारित किया है। जो अब शीतगृहों से निकालकर बेचा जा रहा है। कई व्यापारी तो मंडी के जिम्मेदारों से सांठगांठ कर बिना गेटपास के ही आलू बेच लेते हैं। इससे मंडी शुल्क में लाखों के राजस्व का चूना लगता है। व्यापारियों पर मंडी शुल्क का करोड़ों रुपये बकाया है, इसकी वसूली भी नहीं हो पा रही है। इसको देखते हुए मंडी सभापति सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार बंसल ने शिकंजा कस दिया है। उन्होंने मंडी सचिव को पत्र जारी कर सूचना तलब की।
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उन्होंने मंडी के लाइसेंस धारकों से कब से कितनी धनराशि बकाया है और कितनी वसूली हुई, 6-आर रसीद कटवाकर कितना आलू भंडारित है, उनका व्यापारियों सहित विवरण मांगा है। इसके साथ ही मंडी में कुल कितने लाइसेंसी व्यापारी व आढ़ती हैं, कितने का नवीनीकरण हुआ और बिना नवीनीकरण कारोबार करने वाले कितने व्यापारियों पर कार्रवाई की गई है, इसका तीन दिन में रिकार्ड तलब किया गया है।