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बेटाें के मुकाबले 126 बेटियां कम
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Fri, 23 Jan 2015 11:58 PM IST
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बेटों व बेटियाें के अनुपात में कमी आ रही है लेकिन फासला अभी भी ज्यादा
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है। जिले में 2011 की जनसंख्या में 1006240 पुरुष व 878966 महिलाएं थीं।
इनके बीच का अनुपात 1000 पुरुष और 864 महिला का था। बच्चों की संख्या में
यह अंतर थोड़ा कम हुआ है। 0 से 6 साल के बच्चाें में 1000 बेटों पर
बेटियाें की संख्या 874 दर्ज की गई।
यानी बेटाें के मुकाबले 126 बेटियां कम हैं। लिंग परीक्षण गैरकानूनी होने के बाद भी अल्ट्रासाउंड सेंटर परीक्षण कर रहे हैं। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को निरीक्षण में इनके यहां कुछ भी नहीं मिलता। इनके यहां अभिलेखाें में मिलने वाली खामियां गड़बड़ियाें की ओर इशारा भी करती रही हैं। इन सबके बावजूद बेटियां हर क्षेत्र में खुद को साबित करने में जुटी हैं।
जनसंख्या अनुपात (वर्ष 2011)
पुरुष महिला
1006240 878964
लिंग अनुपात -1000 पर 864 बालिकाएं
बच्चों का अनुपात (0 से 6 वर्ष) 889
पुरुष साक्षरता 77.40 फीसदी
महिला साक्षरता 59.44
बालिका शिक्षा
परिषदीय प्राइमरी स्कूलों में अध्ययनरत 70043
परिषदीय पूर्व माध्यमिक स्कूलाें में अध्ययनरत 20067
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में 455
अशासकीय मान्यता प्राप्त में 4318
इंटर कालेजों में कक्षा छह से आठ तक 22510
इंटर कालेजों में कक्षा 9 से इंटर तक 41500
शिक्षा के प्रोत्साहन के लिए उपाय
ग्रामीण अंचल में गरीबी के कारण जिन बच्चियों की शिक्षा बीच में छूट जाती है उनको दोबारा शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए जिले में पांच कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें पढ़ने वाली छात्राओं को कपड़े, किताबें, खाना व अन्य सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। अब खाता खुलवाकर 100 रुपये प्रति माह भेजने की योजना भी शुरू हुई है।
दस फीसदी की छूट जाती पढ़ाई
शहरी व ग्रामीण अंचल की गरीब परिवार की करीब 10 फीसदी लड़कियों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत हर साल होने वाले हाउस होल्ड सर्वे में इसका खुलासा होता है। पढ़ाई मध्य में छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या अधिक और लड़कों की कम होती है।
जागरूक ता के भरोसे स्वास्थ्य महकमा
बेटे व बेटियाें के बीच अंतर को कम करने के लिए स्वास्थ्य महकमा जागरूकता के भरोसे है। एसीएमओ डा. राजवीर सिंह का कहना है कि 22 दिसंबर से जागरूकता अभियान चल रहे हैं। शनिवार को सुबह फतेहगढ़ स्टेडियम से सीएमओ कार्यालय तक जागरूकता रैली निकाली जाएगी।
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यानी बेटाें के मुकाबले 126 बेटियां कम हैं। लिंग परीक्षण गैरकानूनी होने के बाद भी अल्ट्रासाउंड सेंटर परीक्षण कर रहे हैं। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को निरीक्षण में इनके यहां कुछ भी नहीं मिलता। इनके यहां अभिलेखाें में मिलने वाली खामियां गड़बड़ियाें की ओर इशारा भी करती रही हैं। इन सबके बावजूद बेटियां हर क्षेत्र में खुद को साबित करने में जुटी हैं।
जनसंख्या अनुपात (वर्ष 2011)
पुरुष महिला
1006240 878964
लिंग अनुपात -1000 पर 864 बालिकाएं
बच्चों का अनुपात (0 से 6 वर्ष) 889
पुरुष साक्षरता 77.40 फीसदी
महिला साक्षरता 59.44
बालिका शिक्षा
परिषदीय प्राइमरी स्कूलों में अध्ययनरत 70043
परिषदीय पूर्व माध्यमिक स्कूलाें में अध्ययनरत 20067
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में 455
अशासकीय मान्यता प्राप्त में 4318
इंटर कालेजों में कक्षा छह से आठ तक 22510
इंटर कालेजों में कक्षा 9 से इंटर तक 41500
शिक्षा के प्रोत्साहन के लिए उपाय
ग्रामीण अंचल में गरीबी के कारण जिन बच्चियों की शिक्षा बीच में छूट जाती है उनको दोबारा शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए जिले में पांच कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें पढ़ने वाली छात्राओं को कपड़े, किताबें, खाना व अन्य सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। अब खाता खुलवाकर 100 रुपये प्रति माह भेजने की योजना भी शुरू हुई है।
दस फीसदी की छूट जाती पढ़ाई
शहरी व ग्रामीण अंचल की गरीब परिवार की करीब 10 फीसदी लड़कियों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत हर साल होने वाले हाउस होल्ड सर्वे में इसका खुलासा होता है। पढ़ाई मध्य में छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या अधिक और लड़कों की कम होती है।
जागरूक ता के भरोसे स्वास्थ्य महकमा
बेटे व बेटियाें के बीच अंतर को कम करने के लिए स्वास्थ्य महकमा जागरूकता के भरोसे है। एसीएमओ डा. राजवीर सिंह का कहना है कि 22 दिसंबर से जागरूकता अभियान चल रहे हैं। शनिवार को सुबह फतेहगढ़ स्टेडियम से सीएमओ कार्यालय तक जागरूकता रैली निकाली जाएगी।
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