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Farrukhabad News: सीएमओ कार्यालय में नर्सिंग होम संचालकों का तांता
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फर्रुखाबाद। निजी अस्पताल व नर्सिंग होम के लाइसेंस के नवीनीकरण का मंगलवार को अंतिम दिन होने से सीएमओ कार्यालय में सुबह से ही संचालकों का तांता लगा रहा। फाइल जमा करने और चेक कराने के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा।
जनपद में 177 नर्सिंगहोम सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत हैं। अधिकतर अस्पतालों में प्रसव व ऑपरेशन की सुविधा दी जा रही है। इनमें कई ऐसे भी नर्सिंग होम हैं, जो किराये की डिग्री पर पंजीकरण कराकर झोलाछाप के सहारे चला रहे हैं। कई बार ऑपरेशन के बाद संक्रमण फैलने से मरीजों की मौत के मामले भी सामने आए। जांच हुई तो अस्पताल में न तो कोई डाॅक्टर मिला और न ही प्रशिक्षित स्टाफ।
कुछ सर्जन तो कई अस्पतालों में ऑपरेशन कर मरीजों को झोलाछापों के भरोसे छोड़ देते हैं। सभी निजी अस्पतालों के लाइसेंस का 30 अप्रैल तक नवीनीकरण होना है। इसके लिए संचालकों ने ऑनलाइन आवेदन किए। अवैध चिकित्सा व्यवसाय पर शिकंजा कसने के लिए एक सर्जन की ऑनकाल सेवा चार से अधिक अस्पतालों में देने पर रोक लगा दी गई। इससे संचालकों को सर्जन ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। फिलहाल जोड़ जुगाड़ से काम चलाने की तैयारी हैं। नवीनीकरण का अंतिम दिन होने से सीएमओ कार्यालय में सुबह से ही संचालकों की भीड़ रही।
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देर रात तक उनके प्रपत्र चेक करने का काम चलता रहा। नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ.रंजन गौतम ने बताया कि प्रपत्रों की जांच के साथ हेल्थ पर्सन रिकॉर्ड (एचपीआर) के माध्यम से डॉक्टरों की भी कुंडली खंगाली जा रही है। एक सर्जन चार से अधिक नर्सिंग होम में सेवा नहीं दे सकेगा। पंजीकरण प्रपत्रों में जिन डॉक्टरों के कागज लगाए गए हैं, उनका एक मई से भौतिक सत्यापन होगा। अस्पताल में डॉक्टर, सर्जन व प्रशिक्षित स्टाफ न मिलने पर नवीनीकरण रोक दिया जाएगा।
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जनपद में 177 नर्सिंगहोम सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत हैं। अधिकतर अस्पतालों में प्रसव व ऑपरेशन की सुविधा दी जा रही है। इनमें कई ऐसे भी नर्सिंग होम हैं, जो किराये की डिग्री पर पंजीकरण कराकर झोलाछाप के सहारे चला रहे हैं। कई बार ऑपरेशन के बाद संक्रमण फैलने से मरीजों की मौत के मामले भी सामने आए। जांच हुई तो अस्पताल में न तो कोई डाॅक्टर मिला और न ही प्रशिक्षित स्टाफ।
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कुछ सर्जन तो कई अस्पतालों में ऑपरेशन कर मरीजों को झोलाछापों के भरोसे छोड़ देते हैं। सभी निजी अस्पतालों के लाइसेंस का 30 अप्रैल तक नवीनीकरण होना है। इसके लिए संचालकों ने ऑनलाइन आवेदन किए। अवैध चिकित्सा व्यवसाय पर शिकंजा कसने के लिए एक सर्जन की ऑनकाल सेवा चार से अधिक अस्पतालों में देने पर रोक लगा दी गई। इससे संचालकों को सर्जन ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। फिलहाल जोड़ जुगाड़ से काम चलाने की तैयारी हैं। नवीनीकरण का अंतिम दिन होने से सीएमओ कार्यालय में सुबह से ही संचालकों की भीड़ रही।
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देर रात तक उनके प्रपत्र चेक करने का काम चलता रहा। नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ.रंजन गौतम ने बताया कि प्रपत्रों की जांच के साथ हेल्थ पर्सन रिकॉर्ड (एचपीआर) के माध्यम से डॉक्टरों की भी कुंडली खंगाली जा रही है। एक सर्जन चार से अधिक नर्सिंग होम में सेवा नहीं दे सकेगा। पंजीकरण प्रपत्रों में जिन डॉक्टरों के कागज लगाए गए हैं, उनका एक मई से भौतिक सत्यापन होगा। अस्पताल में डॉक्टर, सर्जन व प्रशिक्षित स्टाफ न मिलने पर नवीनीकरण रोक दिया जाएगा।