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सरकारी अस्पताल 40 और डॉक्टर 29

Thu, 11 Oct 2018 10:57 PM IST
farrukhabad
farrukhabad Updated Thu, 11 Oct 2018 10:57 PM IST
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Government Hospital 40 and Doctor 29 in farrukhabad
लोहिया अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
जनपद में जितनी संख्या सरकारी अस्पतालों की है, उतने डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। यदि एक डॉक्टर छुट्टी पर चला जाए तो उसके स्थान पर काम करने के लिए दूसरा डॉक्टर नहीं है। इसके चलते मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों और झोलाछाप की ही शरण में जाना पड़ता है। जिले में कुल 40 सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन डॉक्टर 29 ही तैनात हैं। इसमें से लोहिया पुरुष अस्पताल में 13 और महिला अस्पताल में चार डॉक्टर हैं। उसमें भी एक-दो अवकाश पर ही रहते हैं। इससे ओपीडी में डॉक्टरों के पास मरीजों की भीड़ लगी रहती है। 
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जनपद में 10 सीएचसी, 28 पीएचसी, राममनोहर लोहिया अस्पताल व सिविल अस्पताल लिंजीगंज हैं। इसमें लोहिया पुरुष और महिला अस्पताल में 17 डॉक्टर हैं। बाकी बचे हुए सीएचसी, पीएचसी व सिविल अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज देने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि जनपद में 137 डाक्टरों के पद हैं। लोहिया अस्पताल में प्रतिदिन औसतन एक हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। किसी-किसी दिन तो ओपीडी में दो ही डॉक्टर बैठे नजर आते हैं। तब मरीज अपने को जल्द दिखाने के लिए धक्कामुक्की करते हैं। डॉक्टर भी भीड़ को देखते हुए मरीज की पूरी बात ही नहीं सुनते और पर्चे पर दवा लिखना शुरू कर देते हैं। इसके बाद भी ओपीडी का समय दो बजे खत्म होने पर भी डॉक्टर मरीज को देखते रहते हैं।
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आसपास के जिलों के आते हैं मरीज
कुछ साल पहले तक आसपास के जिलों में फर्रुखाबाद को मेडिकल के क्षेत्र में बेहतर माना जाता था। अब हालात बदल गए हैं। जनपद में 108 डाक्टरों की कमी है। लोहिया अस्पताल को 32 डाक्टरों की जरूरत है, तैनात सिर्फ 13 हैं। लोहिया महिला अस्पताल में भी सीएमएस डॉक्टर कैलाश समेत चार डॉक्टर हैं। इस तरह कुल 17 डॉक्टर लोहिया अस्पताल में तैनात हैं। शहर के लिंजीगंज में स्थित सिविल अस्पताल में एक चिकित्साधीक्षक समेत चार डॉक्टर हैं। इसके बाद महज आठ डॉक्टरों के भरोसे जिले के अन्य अस्पताल चल रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का अंदाजा लगाना आसान है।
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जिले में महज एक एनेस्थीसिया चिकित्सक
किसी भी मरीज का ऑपरेशन करने के लिए एनेस्थीसिया चिकित्सक सबसे अहम कड़ी होता है। उसी के जिम्मे मरीज को बेहोश या सुन्न करने से लेकर उसकी हार्टबीट आदि तक देखने की जिम्मेदारी होती है। जिले में महज एक एनेस्थीसिया चिकित्सक लोहिया पुरुष अस्पताल में तैनात हैं। इसके अलावा अन्य किसी अस्पताल में एनेस्थीसिया चिकित्सक ही नहीं है। जबकि महज लोहिया पुरुष अस्पताल में ही एनेस्थीसिया चिकित्सक के दो पद हैं।

एक ही सर्जन के भरोसे स्वास्थ्य विभाग
जिले में सर्जन के नाम पर महज एक ही डॉक्टर गौरव मिश्रा की तैनाती राम मनोहर लोहिया अस्पताल में है। अन्य किसी अस्पताल में सर्जन नहीं हैं। हालांकि लोहिया महिला अस्पताल में दो महिला सर्जन जरूर मौजूद हैं। वह महज जच्चा बच्चा के लिए ही हैं। इन हालात में सरकारी अस्पतालों में कैसे सर्जरी होगी। इसका भगवान ही मालिक है।

अन्य जगह भी लगती है ड्यूटी
डॉक्टरों की ड्यूटी इधर-उधर लगने से भी मरीजों को समस्या का सामना करना पड़ता है। प्रत्येक सोमवार को लोहिया अस्पताल के तीन डॉक्टरों की ड्यूटी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के लिए लगाई जाती है। इससे मरीजों को भटकना पड़ता है। इसके अलावा पोस्टमार्टम ड्यूटी के समय भी लोगों को समस्या होती है।


वर्जन
डॉक्टरों की कमी के संदर्भ में कई बार शासन को पत्र लिखा गया है। डॉक्टरों की लगातार शासन से मांग की जा रही है। जैसे डॉक्टरों की जनपद मेें तैनाती होगी। उन्हें अस्पतालों में भेजा जाएगा। - अरुण कुमार, सीएमओ फर्रुखाबाद
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