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शमसाबाद-अमृतपुर के कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
ब्यूरो/अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Fri, 14 Aug 2015 12:05 AM IST
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गंगा का जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। बुधवार के 136.75 मीटर के जलस्तर के मुकाबले गुरुवार को जलस्तर 136.85 मीटर दर्ज किया गया। नरौरा से गुरुवार को गंगा में 98 हजार 252 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। वहीं रामगंगा का जलस्तर पांच सेंटीमीटर कम हुआ है।
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रामगंगा में 10 हजार 56 क्यूसेक पानी रिलीज हुआ। गुरुवार को शमसाबाद और तहसील अमृतपुर क्षेत्र के कई गांवों में पानी घुस गया। गांव में पानी घुसने के चलते ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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कई ग्रामीणों के तो कच्चे घरों में पानी घुस आया है। लोग सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं। पेयजल के लिए लोगों को दूर जाना पड़ रहा है।
गंगा का जलस्तर कम न होने से गुरुवार को ब्लाक क्षेत्र के गांव प्रसादी की मढ़ैया, ऊगरपुर, रूपपुर मंगलीपुर में पानी घुस गया है। गांव प्रसादी की मढ़ैया में सोनपाल, जद्दूराम, रामकिशोर, मिठ्ठू और ऊगरपुर में ब्रह्मदत्त, पिंटू और रामवीर के कच्चे मकानों में पानी घुस गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि भोजन बनाने और शौच करने में काफी परेशानी हो रही है। जानवर सड़क किनारे बंधे हैं। मवेशियों के चारे की दिक्कत आ रही है। उन्होंने जिला प्रशासन से रहने के लिए जगह और राहत सामग्री दिलवाने की मांग की है। राजेपुर इलाके में सड़क के ऊपर पानी बह रहा है।
अमृतपुर प्रतिनिधि के अनुसार गंगा ने गांव तौफीक की मढ़ैया, कलक्टरगंज, फकरपुर, फुलहा, जटपुरा, कैलियाई और रामप्रसाद नगला को भी चपेट में ले लिया है। इन सभी गांवों में पानी घुस आया है। श्रीपाल, राधेश्याम, संतोष कुमार, विजय बहादुर, रामचंद्र की झोपड़ियों में पानी भरा है।
ग्रामीण कच्चे चबूतरे बनाकर भोजन बनाने को मजबूर हैं। लीलापुर की पुलिया में दो फीट और किराचन की पुलिया में करीब ढाई फीट पानी बह रहा है। इससे आवागमन ठप है। शीशराम की मढ़ैया जाने वाला मार्ग भी कट गया है। इसके चलते ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से राहत पहुंचाने की मांग की है।
ब्लाक शमसाबाद क्षेत्र के गांव कटरी तौफीक और तहसील क्षेत्र के गांव कुडऱीसारंगपुर के ग्रामीण बाढ़ के बीच जीवन यापन कर रहे हैं। जिला प्रशासन से कोई राहत अभी तक बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिली है। महिलाएं बैलगाड़ियों पर चूल्हा रखकर भोजन बना रही हैं।
कटरी तौफीक में पूरे गांव में पानी भरा होने के चलते जिला प्रशासन की ओर से आवागमन के लिए दो नाव चलवाई गई हैं। कटरी तौफीक में लेखपाल ने लइया-चना बांटकर ग्रामीणों का दर्द बांटने का प्रयास किया। इस पर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे ग्रामीण काफी परेशान हैं।
बुधवार को गंगा का जलस्तर बढ़ने से ब्लाक क्षेत्र के गांव कटरी तौफीक में पानी घुस आया था। कई ग्रामीणों के कच्चे घरों में पानी घुस गया था। गंगा का जलस्तर कम न होने के चलते बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को आवागमन के लिए सड़क से गांव के अंदर तक नाव चलाई गई है।
लेखपाल रामलखन ने बताया कि दो नाव कटरी तौफीक में आवागमन के लिए चलाई जा रही हैं। पूर्व माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालय कटरी तौफीक गुरुवार को भी बंद रहा। पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक रियासत अली और प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापक इख्त्यिार अहमद सड़क किनारे धर्मपाल की झोपड़ी में बैठे रहे।
प्रधानाध्यापकों ने बताया कि स्कूलों में पानी भरा होने से स्कूल बंद हैं। वे लोग रोजाना गांव आ रहे हैं लेकिन स्कूल में पानी भरा होने के चलते सड़क किनारे बैठे रहते हैं। वहीं महिलाएं बैलगाड़ी में पर चूल्हा रखकर भोजन बना रही हैं। ग्रामीण नाव से शौच करने जा रहे हैं।
बाढ़ पीड़ित रामसेवक, मिठ्ठूलाल और संतोष कुमार आदि का कहना है कि चार किलोमीटर दूर खेतों से जानवरों के लिए घास ला रहे हैं। पेयजल नाव से लेने डेढ़ किलोमीटर दूर सड़क किनारे लगे हैंडपंप पर जाते हैं। लेखपाल रामलखन पांडेय ने नाव से बाढ़ पीड़ितों को लइया-चना वितरित किए। लेकिन ग्रामीणों में जिला प्रशासन के खिलाफ रोष है।
ग्रामीणों का कहना है कि कोई भी अधिकारी उनकी पीड़ा सुनने नहीं आया है। लइया-चना वितरित करने से कुछ नहीं होने वाला। जिला प्रशासन आकर देखे कि वह लोग किस स्थिति में रह रहे हैं। उन्होंने मांग की कि जिला प्रशासन उनके रहने की व्यवस्था करवाने के साथ ही भोजन आदि के भी इंतजाम करे।
अमृतपुर प्रतिनिधि के अनुसार कुडऱी सारंगपुर में बाढ़ का पानी कम नहीं हुआ है। पानी से होकर लोग शौच और पीने का पानी भरने सड़क किनारे हैंडपंपों पर जा रहे हैं। गुड्डू, रामसागर, रक्षपाल और धर्मजीत आदि का कहना है कि इसी तरह पानी बढ़ता रहा तो मजबूरी में गांव को खाली करना पड़ेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि सबसे ज्यादा संकट जानवरों के चारे का हो रहा है। चार किलोमीटर दूर जाकर चारा ला रहे हैं। शौच करने डेढ़-दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। मिट्टी का चबूतरा बनाकर महिलाएं भोजन बनाने को मजबूर हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी उनके हालचाल लेने तक नहीं आया।
प्राथमिक विद्यालय माखन नगला, रामप्रकाश नगला, मंझा की मढ़ैया, जोगराजपुर, कंचनपुर, प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय सबलपुर, प्राथमिक विद्यालय बरुआ, नगला दुर्गु, सुंदरपुर, राजाराम की मढ़ैया, लायकपुर, और प्राथमिक शीशराम की मढ़ैया विद्यालयों में पानी भरा है।
इसके चलते गुरुवार को यह सभी स्कूल बंद रहे। पूर्व माध्यमिक विद्यालय सबलपुर के प्रधानाध्यापक अशफाक अली ने बताया कि स्कूल में पानी भरा है। पानी अगर निकल गया तो स्कूल खोलेंगे। प्राथमिक विद्यालय लायकपुर के सहायक अध्यापक विकास कुमार ने बताया कि स्कूल परिसर में कमर तक पानी भरा है।