{"_id":"59e3af38cd324dfef7ab837b18188fad","slug":"fatehgarh-diary-released-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फतेहगढ़ डायरी का विमोचन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फतेहगढ़ डायरी का विमोचन
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Tue, 18 Aug 2015 11:30 PM IST
विज्ञापन
क्रांतिकारी आंदोलन के सजग विश्लेषक सुधीर विद्यार्थी की पुस्तक फतेहगढ़
विज्ञापन
डायरी का विमोचन स्थानीय होटल में हुआ। विमोचन में वरिष्ठ समालोचक व चिंतक
डा. मैनेजर पांडेय ने कहा कि फतेहगढ़ डायरी इतिहास और समय से संवाद करती
है। मंगलवार को दोपहर बाद फतेहगढ़ डायरी का विमोचन डा. मैनेजर पांडेय,
सुधीर विद्यार्थी, निलय उपाध्याय, कल्लोल चक्रवर्ती, बल्ली सिंह चीमा,
शशिभूषण द्विवेदी, अविनाश मिश्र, रजनीकांत शुक्ल और श्याम किशोर ने किया।
कार्यक्रम में
डा. पांडेय ने कहा कि पुस्तक को डायरी विधा की तरह कम ही लिखा गया है। डायरी से शहर और शहर के भूले-बिसरे चरित्रों को समझने की खास दृष्टि विकसित होती है। इसमें इतिहास से परिचय के साथ ही शहर के कई रंग सामने आते हैं। डायरी की भाषा सहज, सरल व गहरे तक चोट करती है। सुधीर विद्यार्थी ने कहा कि इतिहास शहरों का भी होता है। उन्होंने
कहा कि 1993 से 1996 के दौरान फतेहगढ़ में प्रवास रहा। उस दौरान फर्रुखाबाद और अविभाजित जिला कन्नौज को करीब से देखने-जानने का मौका मिला। इसी दौरान लिखे नोट्स को फतेहगढ़ डायरी में समायोजित किया है।
कवि, लेखक व पत्रकार कल्लोल चक्रवर्ती ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी पक्ष पर लिखने वाले सुधीर विद्यार्थी कई
सालों से शहरों के इतिहास और संस्कृति पर सधे ढंग से कलम चला रहे हैं। यह इतिहास ऊपर से नीचे नहीं, नीचे से ऊपर की ओर देखता है। यह इतिहास राजाओं और राजधानियों का नहीं, सामान्य लोगों और छोटे शहरों व कसबों का है। उनसे डायरी में कुछ भी छूटा नहीं है। कथाकार संपादक शशिभूषण द्विवेदी ने कहा कि सुधीर विद्यार्थी की क्रांतिकारी इतिहास लेखन
को लेकर विशिष्ट पहचान रही है। छोटे शहरों के भूले-बिसरे लोगों के इतिहास को लेकर उन्होंने बड़ा काम किया है। इस पुस्तक में जगह-जगह उनकी टीस मुखर हो उठती है। निलय उपाध्याय ने कहा कि डायरी में भूले-बिसरे चरित्र पूरी शिद्दत के साथ खड़े हो जाते हैं। रजनीकांत शुक्ल ने कहा कि फतेेहगढ़ डायरी डूब कर लिखी गई है। यह पुस्तक तत्कालीन इतिहास का जीवंत दस्तावेज बन गई है।
विमोचन कार्यक्रम को बल्ली सिंह चीमा, कमलेश भट्ट कमल, केशव तिवारी, अविनाश मिश्र, श्याम किशोर और शिवओम अंबर ने भी संबोधित किया। यहां डीएम सत्येंद्र कुमार सिंह, सीडीओ एसएन शुक्ल, अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, ब्रजकिशोर सिंह किशोर, सुधीर सिंह, शिखा सिंह, प्रदीप प्रधान, सुभाष वर्मा, इंदू अवस्थी, वीरेंद्र सिंह राठौर, प्रभात अवस्थी, डा.
राजकुमार सिंह, श्रीकृष्ण गुप्त, गरिमा पांडेय, डा. रामकृष्ण राजपूत, रामसिंह, दिवाकरनंद दुबे, सुरेंद्र सोमवंशी, नागेंद्र राठौर, जवाहर सिंह गंगवार, इकरार हुसैन, जितेंद्र शर्मा, आदित्य उपाध्याय और बीएल वर्मा आदि मौजूद रहे।
डा. पांडेय ने कहा कि पुस्तक को डायरी विधा की तरह कम ही लिखा गया है। डायरी से शहर और शहर के भूले-बिसरे चरित्रों को समझने की खास दृष्टि विकसित होती है। इसमें इतिहास से परिचय के साथ ही शहर के कई रंग सामने आते हैं। डायरी की भाषा सहज, सरल व गहरे तक चोट करती है। सुधीर विद्यार्थी ने कहा कि इतिहास शहरों का भी होता है। उन्होंने
कहा कि 1993 से 1996 के दौरान फतेहगढ़ में प्रवास रहा। उस दौरान फर्रुखाबाद और अविभाजित जिला कन्नौज को करीब से देखने-जानने का मौका मिला। इसी दौरान लिखे नोट्स को फतेहगढ़ डायरी में समायोजित किया है।
कवि, लेखक व पत्रकार कल्लोल चक्रवर्ती ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी पक्ष पर लिखने वाले सुधीर विद्यार्थी कई
सालों से शहरों के इतिहास और संस्कृति पर सधे ढंग से कलम चला रहे हैं। यह इतिहास ऊपर से नीचे नहीं, नीचे से ऊपर की ओर देखता है। यह इतिहास राजाओं और राजधानियों का नहीं, सामान्य लोगों और छोटे शहरों व कसबों का है। उनसे डायरी में कुछ भी छूटा नहीं है। कथाकार संपादक शशिभूषण द्विवेदी ने कहा कि सुधीर विद्यार्थी की क्रांतिकारी इतिहास लेखन
को लेकर विशिष्ट पहचान रही है। छोटे शहरों के भूले-बिसरे लोगों के इतिहास को लेकर उन्होंने बड़ा काम किया है। इस पुस्तक में जगह-जगह उनकी टीस मुखर हो उठती है। निलय उपाध्याय ने कहा कि डायरी में भूले-बिसरे चरित्र पूरी शिद्दत के साथ खड़े हो जाते हैं। रजनीकांत शुक्ल ने कहा कि फतेेहगढ़ डायरी डूब कर लिखी गई है। यह पुस्तक तत्कालीन इतिहास का जीवंत दस्तावेज बन गई है।
विमोचन कार्यक्रम को बल्ली सिंह चीमा, कमलेश भट्ट कमल, केशव तिवारी, अविनाश मिश्र, श्याम किशोर और शिवओम अंबर ने भी संबोधित किया। यहां डीएम सत्येंद्र कुमार सिंह, सीडीओ एसएन शुक्ल, अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, ब्रजकिशोर सिंह किशोर, सुधीर सिंह, शिखा सिंह, प्रदीप प्रधान, सुभाष वर्मा, इंदू अवस्थी, वीरेंद्र सिंह राठौर, प्रभात अवस्थी, डा.
राजकुमार सिंह, श्रीकृष्ण गुप्त, गरिमा पांडेय, डा. रामकृष्ण राजपूत, रामसिंह, दिवाकरनंद दुबे, सुरेंद्र सोमवंशी, नागेंद्र राठौर, जवाहर सिंह गंगवार, इकरार हुसैन, जितेंद्र शर्मा, आदित्य उपाध्याय और बीएल वर्मा आदि मौजूद रहे।