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Farrukhabad News: नवोदय विद्यालय बालिका छात्रावास का गिर रहा प्लास्टर
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फर्रुखाबाद/मोहम्मदाबाद। दिल्ली की घटना के बाद स्कूलों में बने छात्रावासों को लेकर लोगों में आशंकाएं बढ़ गई हैं। नवोदय विद्यालय में बालिका छात्रावास के पीछे की दीवार का प्लास्टर गिरता दिखा। विद्यालय प्रशासन ने अन्य छात्रावासों और अंदर के हालात को दिखाने से इन्कार कर दिया।
दिल्ली में जर्जर छात्रावास गिरने की घटना के बाद जिले के कुछ स्कूलों में बने छात्रावासों में रह रहे बच्चों को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। जिले में एकमात्र मोहम्मदाबाद में जवाहर नवोदय विद्यालय का निर्माण करीब 35 साल पहले हुआ था। इसमें 582 छात्र-छात्राएं हैं। इनके आवासों की सुविधा भी स्कूल में ही है। सोमवार को स्कूल में छात्रावासों का सच जानने का प्रयास किया गया, तो बालिका छात्रावास के पीछे की दीवार का कई स्थानों पर प्लास्टर गिरता दिखा।
सीलन अधिक होने की वजह से कई स्थानों पर काई भी दिखी। स्कूल प्रशासन ने इसके अलावा अन्य छात्रावास और अंदर के हालात को दिखाने से इन्कार कर दिया। पीछे की दीवारों को देख साफ है कि बाथरूमों की हालत ठीक नहीं है। प्रधानाचार्य राकेश बाबू ने बताया कि मरम्मत का काम चल रहा है। जहां भी जरूरत होगी, उसे सही करवा दिया जाएगा।
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संकिसा रोड स्थित आश्रम पद्धति स्कूल में वार्डन प्रदीप सिंह ने बताया कि 554 छात्र रहते हैं। डेढ़-दो साल पहले तक छात्रावास ठीक नहीं था। मगर इसके बाद मरम्मत करवा दी गई है। अब किसी तरह की दिक्कत नहीं है। इसके अलावा कस्तूरबा गांधी स्कूलों और जीआईसी में छात्रावास कुछ साल पहले ही बने हैं। पीडब्ल्यूडी के जेई अशोक कुमार ने बताया कि भवन की उम्र 50 साल होती है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही किसी भी भवन की स्थिति का आकलन किया जा सकता है।
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दिल्ली में जर्जर छात्रावास गिरने की घटना के बाद जिले के कुछ स्कूलों में बने छात्रावासों में रह रहे बच्चों को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। जिले में एकमात्र मोहम्मदाबाद में जवाहर नवोदय विद्यालय का निर्माण करीब 35 साल पहले हुआ था। इसमें 582 छात्र-छात्राएं हैं। इनके आवासों की सुविधा भी स्कूल में ही है। सोमवार को स्कूल में छात्रावासों का सच जानने का प्रयास किया गया, तो बालिका छात्रावास के पीछे की दीवार का कई स्थानों पर प्लास्टर गिरता दिखा।
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सीलन अधिक होने की वजह से कई स्थानों पर काई भी दिखी। स्कूल प्रशासन ने इसके अलावा अन्य छात्रावास और अंदर के हालात को दिखाने से इन्कार कर दिया। पीछे की दीवारों को देख साफ है कि बाथरूमों की हालत ठीक नहीं है। प्रधानाचार्य राकेश बाबू ने बताया कि मरम्मत का काम चल रहा है। जहां भी जरूरत होगी, उसे सही करवा दिया जाएगा।
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संकिसा रोड स्थित आश्रम पद्धति स्कूल में वार्डन प्रदीप सिंह ने बताया कि 554 छात्र रहते हैं। डेढ़-दो साल पहले तक छात्रावास ठीक नहीं था। मगर इसके बाद मरम्मत करवा दी गई है। अब किसी तरह की दिक्कत नहीं है। इसके अलावा कस्तूरबा गांधी स्कूलों और जीआईसी में छात्रावास कुछ साल पहले ही बने हैं। पीडब्ल्यूडी के जेई अशोक कुमार ने बताया कि भवन की उम्र 50 साल होती है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही किसी भी भवन की स्थिति का आकलन किया जा सकता है।