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फर्रुखाबाद: पंचायत चुनाव के परिणाम विधानसभा चुनाव की बानगी, सत्ता में रहकर भाजपा को मिली करारी हार
Sat, 08 May 2021 01:41 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 08 May 2021 01:41 PM IST
सार
सभी जनप्रतिनिधि भाजपा के होने के बावजूद कुछ तो अपनी साख तक नहीं बचा सके। वहीं सत्ता से बाहर सपा ने सर्वाधिक नौ और बसपा ने जिला पंचायत सदस्य की तीन सीटों पर कब्जा जमाया है।
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फर्रुखाबाद पंचायत चुनाव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फर्रुखाबाद में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के परिणाम विधानसभा चुनाव पर सीधा असर डालने वाले हैं। सत्ता में रहकर जिला पंचायत की 30 में से चार सीटें ही निकलना भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। सभी जनप्रतिनिधि भाजपा के होने के बावजूद कुछ तो अपनी साख तक नहीं बचा सके।
वहीं सत्ता से बाहर सपा ने सर्वाधिक नौ और बसपा ने जिला पंचायत सदस्य की तीन सीटों पर कब्जा जमाया है। पंचायत चुनाव को राजनीतिक पार्टियों ने विधानसभा चुनाव से जोड़कर तैयारी की थी। इससे जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर कब्जा जमाने के लिए बड़े दलों ने पूरी ताकत झोंकी थी।
इसका असर आने वाले 2022 के विधानसभा चुनाव पर पड़ने वाला है। जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में भाजपा पूरी तनमयता से लगी रही। टिकट आवंटन के बाद पार्टी में हुई बगावत भाजपा पर भारी पड़ गई। भाजपा से चुनाव लड़ने में जहां दिग्गजों को मौका नहीं मिला, वहीं चार दिन से भाजपाइयों से सांठगांठ करने वाले टिकट के हकदार बने।
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नतीजा यह रहा सबसे मजबूत संगठन वाली पार्टी के प्रत्याशियों से कार्यकर्ताओं ने ही मुंह मोड़ लिया और 30 में से 26 प्रत्याशी चुनाव हार गए। टिकट वितरण में धांधली के भी आरोप लग रहे हैं। इस करारी हार को भाजपा कार्यकर्ता ही जिम्मेदारों के कर्मों का फल बता रहे हैं।
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वहीं सत्ता से बाहर सपा ने सर्वाधिक नौ और बसपा ने जिला पंचायत सदस्य की तीन सीटों पर कब्जा जमाया है। पंचायत चुनाव को राजनीतिक पार्टियों ने विधानसभा चुनाव से जोड़कर तैयारी की थी। इससे जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर कब्जा जमाने के लिए बड़े दलों ने पूरी ताकत झोंकी थी।
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इसका असर आने वाले 2022 के विधानसभा चुनाव पर पड़ने वाला है। जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में भाजपा पूरी तनमयता से लगी रही। टिकट आवंटन के बाद पार्टी में हुई बगावत भाजपा पर भारी पड़ गई। भाजपा से चुनाव लड़ने में जहां दिग्गजों को मौका नहीं मिला, वहीं चार दिन से भाजपाइयों से सांठगांठ करने वाले टिकट के हकदार बने।
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नतीजा यह रहा सबसे मजबूत संगठन वाली पार्टी के प्रत्याशियों से कार्यकर्ताओं ने ही मुंह मोड़ लिया और 30 में से 26 प्रत्याशी चुनाव हार गए। टिकट वितरण में धांधली के भी आरोप लग रहे हैं। इस करारी हार को भाजपा कार्यकर्ता ही जिम्मेदारों के कर्मों का फल बता रहे हैं।
केंद्र व प्रदेश में सत्ता होने के साथ जिले में चारों विधायक व एक सांसद भाजपा के ही हैं। भोजपुर विधायक नागेंद्र सिंह राठौर के कमालगंज क्षेत्र से छह में एक प्रत्याशी ही जीत सका, जबकि मोहम्मदाबाद की पांच सीटों में भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया। दोनों ब्लाकों में सपा ने पांच सीटों पर कब्जा जमाया।
सदर विधायक मेजर सुनीलदत्त के बढ़पुर ब्लाक से तीन में एक प्रत्याशी ही भाजपा से जीता। विधायक कोरोना पॉजिटिव होने से चुनाव प्रचार में नहीं निकले। विधायक अमर सिंह खटीक के क्षेत्र कायमगंज में दो सीटें भाजपा की जीतीं। वहीं बसपा ने एक व सपा ने तीन सीटों पर कब्जा किया।
विधायक सुशील शाक्य के अमृतपुर क्षेत्र में ब्लाक राजेपुर की चार व नवाबगंज तीन सीटों में भाजपा का पत्ता साफ रहा। इस क्षेत्र से बसपा की दो व सपा ने एक सीट हासिल की। चुनाव के दौरान नामांकन से पहले भाजपा सांसद मुकेश राजपूत कोरोना संक्रमित हो गए थे।
अभी भी उनका हरियाणा के हास्पिटल में इलाज चल रहा है। पंचायत चुनाव में भाजपा की करारी हार व दोगुनी से अधिक सीटें जीतने वाले सपाइयों के हौसले बुलंद हैं। बसपा का भी हौसला बढ़ा है। भाजपा जिलाध्यक्ष रूपेश गुप्ता ने बताया कि पंचायत चुनाव का विधानसभा चुनाव पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है। भाजपा ने अनुशासन में रहकर चुनाव लड़ा। कोविड के चलते कार्यकर्ता भी प्रचार के लिए कम निकले। वहीं विपक्षी दल के प्रत्याशियों ने पैसे की दम पर चुनाव जीता है।
सदर विधायक मेजर सुनीलदत्त के बढ़पुर ब्लाक से तीन में एक प्रत्याशी ही भाजपा से जीता। विधायक कोरोना पॉजिटिव होने से चुनाव प्रचार में नहीं निकले। विधायक अमर सिंह खटीक के क्षेत्र कायमगंज में दो सीटें भाजपा की जीतीं। वहीं बसपा ने एक व सपा ने तीन सीटों पर कब्जा किया।
विधायक सुशील शाक्य के अमृतपुर क्षेत्र में ब्लाक राजेपुर की चार व नवाबगंज तीन सीटों में भाजपा का पत्ता साफ रहा। इस क्षेत्र से बसपा की दो व सपा ने एक सीट हासिल की। चुनाव के दौरान नामांकन से पहले भाजपा सांसद मुकेश राजपूत कोरोना संक्रमित हो गए थे।
अभी भी उनका हरियाणा के हास्पिटल में इलाज चल रहा है। पंचायत चुनाव में भाजपा की करारी हार व दोगुनी से अधिक सीटें जीतने वाले सपाइयों के हौसले बुलंद हैं। बसपा का भी हौसला बढ़ा है। भाजपा जिलाध्यक्ष रूपेश गुप्ता ने बताया कि पंचायत चुनाव का विधानसभा चुनाव पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है। भाजपा ने अनुशासन में रहकर चुनाव लड़ा। कोविड के चलते कार्यकर्ता भी प्रचार के लिए कम निकले। वहीं विपक्षी दल के प्रत्याशियों ने पैसे की दम पर चुनाव जीता है।