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सत्यापन के नाम पर वसूली, अनुदान फिर भी नहीं
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फर्रुखाबाद। शादी अनुदान के लिए आवेदन करने के बाद सत्यापन के नाम पर वसूली की गई। इसके बाद भी अनुदान न मिला। बुधवार को मामले की शिकायत समाज कल्याण अधिकारी से की गई। उन्होंने अक्तूबर तक के आवेदकों को ही अनुदान मिलने का बात कही। साथ ही वसूली करने वालों का नाम-पता उपलब्ध कराने को कहा है।
शहर के मोहल्ला अंगूरीबाग निवासी युवती की दिसंबर 2020 में शादी हुई। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने से शादी अनुदान के लिए नवंबर में ऑनलाइन आवेदन किया। इसके बाद तहसील से सत्यापन के लिए कुछ कर्मचारी उसके घर गए और 900 रुपये लिए।
इसके बाद भी अनुदान नहीं मिला। इस पर युवती अपनी भाभी के साथ विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग पहुंची और मामले की जानकारी दी। इस पर समाज कल्याण अधिकारी राजीव लोचन मिश्रा ने कहा कि अक्तूबर तक आवेदन करने वालों को अनुदान दिया गया है। इसके बाद किसी का आवेदन स्वीकार नहीं किया गया।
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शादी अनुदान की धनराशि नहीं मिलेगी। युवती ने सत्यापन के लिए 900 रुपये व जाति प्रमाणपत्र के नाम पर 300 रुपये वसूले जाने की जानकारी दी। इस पर उन्होंने वसूली करने वालों के नाम-पते की जानकारी कर जिलाधिकारी से शिकायत करने के लिए कहा।
जिन लोगों ने वसूली की वह तहसील के कर्मचारी हो सकते हैं। इसलिए वह न तो अनुदान ही स्वीकृत करेंगे और न ही वसूली करने वालों की जांच कराएंगे। अगली बार जब कोई पैसा मांगे तो उसकी वीडियो बनाकर डीएम को सौंप दें।
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शहर के मोहल्ला अंगूरीबाग निवासी युवती की दिसंबर 2020 में शादी हुई। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने से शादी अनुदान के लिए नवंबर में ऑनलाइन आवेदन किया। इसके बाद तहसील से सत्यापन के लिए कुछ कर्मचारी उसके घर गए और 900 रुपये लिए।
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इसके बाद भी अनुदान नहीं मिला। इस पर युवती अपनी भाभी के साथ विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग पहुंची और मामले की जानकारी दी। इस पर समाज कल्याण अधिकारी राजीव लोचन मिश्रा ने कहा कि अक्तूबर तक आवेदन करने वालों को अनुदान दिया गया है। इसके बाद किसी का आवेदन स्वीकार नहीं किया गया।
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शादी अनुदान की धनराशि नहीं मिलेगी। युवती ने सत्यापन के लिए 900 रुपये व जाति प्रमाणपत्र के नाम पर 300 रुपये वसूले जाने की जानकारी दी। इस पर उन्होंने वसूली करने वालों के नाम-पते की जानकारी कर जिलाधिकारी से शिकायत करने के लिए कहा।
जिन लोगों ने वसूली की वह तहसील के कर्मचारी हो सकते हैं। इसलिए वह न तो अनुदान ही स्वीकृत करेंगे और न ही वसूली करने वालों की जांच कराएंगे। अगली बार जब कोई पैसा मांगे तो उसकी वीडियो बनाकर डीएम को सौंप दें।