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जिपं अध्यक्ष का चुनाव आज, देर रात तक जिले में पहुंचे सदस्य
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फर्रुखाबाद। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मतदान शनिवार को होगा। अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदारों में एक प्रत्याशी के सदस्यों की शरण स्थली दिल्ली और राजस्थान बनी रही। देर रात तक इन सदस्यों को जिले में बुला लिया गया। हालांकि दूसरे प्रत्याशी ने अधिकांश सदस्यों को प्रदेश में ही रखा है। इनके कुछ सदस्य तो जिले में ही हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद का ताज किसके सिर सजेगा, यह शनिवार को साफ हो जाएगा। फिलहाल शुक्रवार देर रात तक अपने खेमे के सदस्यों को किस तरह जिले में एंट्री करवाकर सुरक्षित रखा जाए, यह विपक्षी प्रत्याशी के लिए चुनौती बन गया है। चुनाव पूर्व एक प्रत्याशी ने अपने अधिकांश सदस्यों को दिल्ली और राजस्थान में रोके रखा। इन दो स्थानों को सुरक्षित पनाहगाह इस लिए माना गया कि एक जगह आम आदमी पार्टी और दूसरी जगह कांग्रेस की सरकार है। लिहाजा आसानी से शरण मिल गई। जबकि दूसरे प्रत्याशी के सदस्यों को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ी। अधिकांश सदस्य प्रदेश में ही रहे। इन सदस्यों में कुछ उत्तराखंड और कुछ तो जिले में ही हैं। जो सदस्य बाहर हैं उन्हें जिले में देर रात तक खास रणनीति के तहत बुला लिया गया।
सदस्यों को मतदेय स्थल तक पहुंचाना चुनौती
सदस्यों को मतदेय स्थल तक पहुंचाना सपा प्रत्याशी के लिए बड़ी चुनौती है। जो भी सदस्य हैं, उन्हें एक भीड़ के साथ मुख्य बैरियर तक पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही हैै। इस दौरान सदस्यों को बीच में रखा जाएगा, ताकि कोई भी आसानी से उनके पास तक न पहुंच सके।
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मुकदमों को लेकर नामजद सदस्यों में उहापोह
सपा प्रत्याशी डॉ. सुबोध यादव समेत कई सदस्यों पर कमालगंज, मोहम्मदाबाद कोतवाली में मुकदमे दर्ज हैं। इन मुकदमों में पुलिस गिरफ्तारी न कर ले, इसे लेकर सभी सदस्य उहापोह की स्थिति में हैं। हालांकि चुनाव आयोग मतदान तक किसी भी सदस्य की गिरफ्तारी न करने के निर्देश जिला पुलिस और प्रशासन को दे चुका है। इस पर कितना अमल होता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद का ताज किसके सिर सजेगा, यह शनिवार को साफ हो जाएगा। फिलहाल शुक्रवार देर रात तक अपने खेमे के सदस्यों को किस तरह जिले में एंट्री करवाकर सुरक्षित रखा जाए, यह विपक्षी प्रत्याशी के लिए चुनौती बन गया है। चुनाव पूर्व एक प्रत्याशी ने अपने अधिकांश सदस्यों को दिल्ली और राजस्थान में रोके रखा। इन दो स्थानों को सुरक्षित पनाहगाह इस लिए माना गया कि एक जगह आम आदमी पार्टी और दूसरी जगह कांग्रेस की सरकार है। लिहाजा आसानी से शरण मिल गई। जबकि दूसरे प्रत्याशी के सदस्यों को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ी। अधिकांश सदस्य प्रदेश में ही रहे। इन सदस्यों में कुछ उत्तराखंड और कुछ तो जिले में ही हैं। जो सदस्य बाहर हैं उन्हें जिले में देर रात तक खास रणनीति के तहत बुला लिया गया।
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सदस्यों को मतदेय स्थल तक पहुंचाना चुनौती
सदस्यों को मतदेय स्थल तक पहुंचाना सपा प्रत्याशी के लिए बड़ी चुनौती है। जो भी सदस्य हैं, उन्हें एक भीड़ के साथ मुख्य बैरियर तक पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही हैै। इस दौरान सदस्यों को बीच में रखा जाएगा, ताकि कोई भी आसानी से उनके पास तक न पहुंच सके।
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मुकदमों को लेकर नामजद सदस्यों में उहापोह
सपा प्रत्याशी डॉ. सुबोध यादव समेत कई सदस्यों पर कमालगंज, मोहम्मदाबाद कोतवाली में मुकदमे दर्ज हैं। इन मुकदमों में पुलिस गिरफ्तारी न कर ले, इसे लेकर सभी सदस्य उहापोह की स्थिति में हैं। हालांकि चुनाव आयोग मतदान तक किसी भी सदस्य की गिरफ्तारी न करने के निर्देश जिला पुलिस और प्रशासन को दे चुका है। इस पर कितना अमल होता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।