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Farrukhabad News: आरोप मुक्ति की मांग खारिज, लुईस खुर्शीद के खिलाफ चलेगा मुकदमा
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फर्रुखाबाद। कायमगंज के जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट से जुड़े मामले में पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी व पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद को आरोपमुक्त करने की मांग अदालत ने खारिज कर दी। विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र एवं तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने दांडिक निगरानी पर सुनवाई करते हुए कहा कि आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) की जांच रिपोर्ट में आए साक्ष्यों के आधार पर आरोप विरचित करने के लिए प्रथमदृष्ट्या पर्याप्त आधार मौजूद हैं। विवेचना में कुछ त्रुटियां रह जाने मात्र से आरोपित को उन्मोचित नहीं किया जा सकता।
आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन के निरीक्षक रामशंकर यादव ने एक जून 2017 को कायमगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। जाकिर हुसैन ट्रस्ट से जुड़े धन के गबन, धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, उनका फर्जी इस्तेमाल करने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगाए गए थे। लुईस खुर्शीद ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां आरोपमुक्त किए जाने का प्रार्थना पत्र दिया था। 17 अप्रैल 2025 को इसे निरस्त कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने दांडिक निगरानी दाखिल की थी।
निगरानी में पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद के अधिवक्ता की ओर से तर्क दिया गया कि उनका नाम प्राथमिकी में नहीं था और विवेचक ने बिना साक्ष्य जुटाए आरोपपत्र दाखिल कर दिया। उन्होंने विवेचना में गवाहों को नामित नहीं किए जाने और दस्तावेजों की जांच नहीं कराए जाने का भी आधार रखा।
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अदालत ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ईओडब्ल्यू ने लाभार्थियों के संबंध में नगरपालिका आदि से प्रमाणपत्र जुटाए थे। विवेचक ने इन प्रमाणपत्रों को विवेचना का हिस्सा बनाया और जांच रिपोर्ट पर विश्वास व्यक्त किया। इन साक्ष्यों से आरोप विरचित करने के लिए प्रथमदृष्ट्या आधार पर्याप्त हैं।
न्यायालय ने माना कि कुछ साक्षियों को आरोपपत्र में नामित नहीं किया गया और कूटरचित दस्तावेजों को जांच के लिए नहीं भेजा गया, यह विवेचना की त्रुटियां हैं। लेकिन अभियोजन न्यायालय की पूर्व अनुमति लेकर संबंधित साक्षियों को साक्ष्य के लिए तलब कर सकता है। इसलिए इन त्रुटियों के आधार पर आरोपमुक्त नहीं किया जा सकता।
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आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन के निरीक्षक रामशंकर यादव ने एक जून 2017 को कायमगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। जाकिर हुसैन ट्रस्ट से जुड़े धन के गबन, धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, उनका फर्जी इस्तेमाल करने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगाए गए थे। लुईस खुर्शीद ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां आरोपमुक्त किए जाने का प्रार्थना पत्र दिया था। 17 अप्रैल 2025 को इसे निरस्त कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने दांडिक निगरानी दाखिल की थी।
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निगरानी में पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद के अधिवक्ता की ओर से तर्क दिया गया कि उनका नाम प्राथमिकी में नहीं था और विवेचक ने बिना साक्ष्य जुटाए आरोपपत्र दाखिल कर दिया। उन्होंने विवेचना में गवाहों को नामित नहीं किए जाने और दस्तावेजों की जांच नहीं कराए जाने का भी आधार रखा।
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अदालत ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ईओडब्ल्यू ने लाभार्थियों के संबंध में नगरपालिका आदि से प्रमाणपत्र जुटाए थे। विवेचक ने इन प्रमाणपत्रों को विवेचना का हिस्सा बनाया और जांच रिपोर्ट पर विश्वास व्यक्त किया। इन साक्ष्यों से आरोप विरचित करने के लिए प्रथमदृष्ट्या आधार पर्याप्त हैं।
न्यायालय ने माना कि कुछ साक्षियों को आरोपपत्र में नामित नहीं किया गया और कूटरचित दस्तावेजों को जांच के लिए नहीं भेजा गया, यह विवेचना की त्रुटियां हैं। लेकिन अभियोजन न्यायालय की पूर्व अनुमति लेकर संबंधित साक्षियों को साक्ष्य के लिए तलब कर सकता है। इसलिए इन त्रुटियों के आधार पर आरोपमुक्त नहीं किया जा सकता।