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सफेदपोश व खाकी की गोद में खेल रहे ट्रैवल्स माफिया
Updated Sat, 25 Aug 2018 11:45 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। सफेदपोश नेता और खाकी की शरण मिलने से ट्रैवल्स माफिया बेखौफ हो गए हैं। उनके काउंटर शाम होते ही पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर सज जाते हैं। पिकेट होने पर भी रोडवेज बस स्टेशन के पास प्राइवेट बसों में सवारियां भरी जाती हैं। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है, जिसका नतीजा शुक्रवार रात को दिखाई दिया। रोडवेज बस स्टेशन के बाहर प्राइवेट बस खड़ी कर सवारियां भरने का विरोध करने पर यात्रीकर अधिकारी की पिटाई कर दी गई। ट्रैवल्स एजेंसियों पर कार्रवाई न होने के मामले में अधिकारी एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ने लगे हैं।
प्रदेश सरकार ने रोडवेज बस स्टेशन से करीब एक किलोमीटर की परिधि में प्राइवेट बसों के खड़े होने और उनमें सवारियों को भरने पर प्रतिबंध लगाया है। यह फरमान आए करीब एक साल से अधिक का समय हो गया है। इस पर शुरू हुआ अभियान चंद दिनों में बंद हो गया। शहर के कई ट्रैवल्स एजेंसी संचालकों को सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों और पुलिस की शरण मिली है। इससे ट्रैवल्स एजेंसी संचालकों को परिवहन विभाग के अफसरों का कोई खौफ नहीं है। कादरीगेट पुलिस चौकी के पास शाम होते ही ट्रैवल्स एजेंसियों के काउंटर सजते हैं। सवारियों की बुकिंग होती है और बसों में सवारियां बैठाई जाती हैं। यह स्थान रोडवेज बस स्टेशन से करीब आधा किलोमीटर दूरी पर है। रोडवेज बस स्टेशन के गेट पर पिकेट और यातायात पुलिस रहती है। यहीं पर पेट्रोल पंप है। जिसके पास रोजाना शाम को प्राइवेट बसों में सवारियां भरी जाती हैं। जिनको देख कर पुलिस कर्मी मुंह मोड़ लेते हैं। इन बसों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है।
परिवहन विभाग के अफसर जब अभियान चलाते हैं तो सफेदपोश बीच में आकर रोड़ा बन जाते और कार्रवाई नहीं होने देते हैं। पुलिस भी कार्रवाई नहीं करती। इसके पीछे सफेदपोश और खाकी राजस्व को चूना और अपना भला करने का पूरा खेल करती है। इससे ट्रैवल्स एजेंसी संचालक बेखौफ होकर अपना कारोबार करते हैं। जब कोई मामला फंसता है तो अधिकारी एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर खुद को पीछे हटा लेते हैं। ऐसा ही पीटीओ के साथ हुई मारपीट में हुआ। इसमें अफसरों ने एक दूसरे की जिम्मेदारी डाल कर खुद पल्ला झाड़ लिया।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
प्राइवेट बस और डग्गामार वाहनों के खिलाफ अभियान चलाने में पुलिस कोई सहयोग नहीं करती है। पुलिस के सहयोग के बिना अभियान नहीं चल सकता है। कई बार पत्र लिखा, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पिकेट लगी होने के बाद भी रोडवेज बस स्टेशन के पास प्राइवेट बसें खड़ी होती हैं। इनको पुलिस कर्मी नहीं रोकते हैं। -
वीके गंगवार, एआरएम
यात्रीकर अधिकारी ने बिना बताए छापेमारी की थी। विवाद होने पर सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची थी। तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यदि सूचना देकर छापेमारी करते तो पुलिस बल मुहैया कराया जाता। - राजेश पाठक, शहर कोतवाल
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फर्रुखाबाद। सफेदपोश नेता और खाकी की शरण मिलने से ट्रैवल्स माफिया बेखौफ हो गए हैं। उनके काउंटर शाम होते ही पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर सज जाते हैं। पिकेट होने पर भी रोडवेज बस स्टेशन के पास प्राइवेट बसों में सवारियां भरी जाती हैं। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है, जिसका नतीजा शुक्रवार रात को दिखाई दिया। रोडवेज बस स्टेशन के बाहर प्राइवेट बस खड़ी कर सवारियां भरने का विरोध करने पर यात्रीकर अधिकारी की पिटाई कर दी गई। ट्रैवल्स एजेंसियों पर कार्रवाई न होने के मामले में अधिकारी एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ने लगे हैं।
प्रदेश सरकार ने रोडवेज बस स्टेशन से करीब एक किलोमीटर की परिधि में प्राइवेट बसों के खड़े होने और उनमें सवारियों को भरने पर प्रतिबंध लगाया है। यह फरमान आए करीब एक साल से अधिक का समय हो गया है। इस पर शुरू हुआ अभियान चंद दिनों में बंद हो गया। शहर के कई ट्रैवल्स एजेंसी संचालकों को सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों और पुलिस की शरण मिली है। इससे ट्रैवल्स एजेंसी संचालकों को परिवहन विभाग के अफसरों का कोई खौफ नहीं है। कादरीगेट पुलिस चौकी के पास शाम होते ही ट्रैवल्स एजेंसियों के काउंटर सजते हैं। सवारियों की बुकिंग होती है और बसों में सवारियां बैठाई जाती हैं। यह स्थान रोडवेज बस स्टेशन से करीब आधा किलोमीटर दूरी पर है। रोडवेज बस स्टेशन के गेट पर पिकेट और यातायात पुलिस रहती है। यहीं पर पेट्रोल पंप है। जिसके पास रोजाना शाम को प्राइवेट बसों में सवारियां भरी जाती हैं। जिनको देख कर पुलिस कर्मी मुंह मोड़ लेते हैं। इन बसों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है।
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परिवहन विभाग के अफसर जब अभियान चलाते हैं तो सफेदपोश बीच में आकर रोड़ा बन जाते और कार्रवाई नहीं होने देते हैं। पुलिस भी कार्रवाई नहीं करती। इसके पीछे सफेदपोश और खाकी राजस्व को चूना और अपना भला करने का पूरा खेल करती है। इससे ट्रैवल्स एजेंसी संचालक बेखौफ होकर अपना कारोबार करते हैं। जब कोई मामला फंसता है तो अधिकारी एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर खुद को पीछे हटा लेते हैं। ऐसा ही पीटीओ के साथ हुई मारपीट में हुआ। इसमें अफसरों ने एक दूसरे की जिम्मेदारी डाल कर खुद पल्ला झाड़ लिया।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
प्राइवेट बस और डग्गामार वाहनों के खिलाफ अभियान चलाने में पुलिस कोई सहयोग नहीं करती है। पुलिस के सहयोग के बिना अभियान नहीं चल सकता है। कई बार पत्र लिखा, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पिकेट लगी होने के बाद भी रोडवेज बस स्टेशन के पास प्राइवेट बसें खड़ी होती हैं। इनको पुलिस कर्मी नहीं रोकते हैं। -
वीके गंगवार, एआरएम
यात्रीकर अधिकारी ने बिना बताए छापेमारी की थी। विवाद होने पर सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची थी। तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यदि सूचना देकर छापेमारी करते तो पुलिस बल मुहैया कराया जाता। - राजेश पाठक, शहर कोतवाल