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लॉकडाउन में फंसे बेटे को घर बुलाने को मां ने बेच दी गाय
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लॉकडाउन में साइकिल चलाकर नवाबगंज आया युवक।
- फोटो : FARRUKHABAD
नवाबगंज (फर्रुखाबाद)। जनपद हरदोई के थाना शाहाबाद के गांव महमूद नगर दिलीप कुमार तीन माह पहले बुलंदशहर गया था। वहां फर्श पर टायल लगाने का काम करता था। लॉकडाउन में काम न मिलने से उसके रुपये खत्म हो गए। भोजन का संकट आ गया। इसकी जानकारी से दुखी मां राजेश्वरी देवी ने बेटे से पूछा कैसे घर आ सकता है।
बेटे ने कहा कि साइकिल हो तो आ सकता है। साथ ही साइकिल खरीदने के लिए रुपये बैंक खाते में डालने को कहा। मां ने लोगों से रुपये उधार मांगे तो नहीं मिले। इस पर उसने अपनी गाय 4000 रुपये में बेच दी और रुपये पुत्र के खाते में जमा कर दिए। ये रकम निकालकर दिलीप ने 3500 रुपये की साइकिल खरीदी।
26 अप्रैल को साइकिल से घर के लिए बुलंदशहर से निकल पड़ा। 30 अप्रैल की देर शाम नवाबगंज पहुंचा। वहां चौराहे पर कुछ लोगों को अपनी कहानी बताई। कहा कि उसे रास्ते में कई जगह पुलिस ने रोका और डंडों से पीटा। उसने शरीर पर लगी चोटें भी दिखाईं। कहा कि कई बैरियरों पर पुलिस ने उसे वापस कर दिया।
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इस पर उसने सड़क छोड़ दी और खेतों के रास्ते किसी तरह निकला। चोट के निशान देख लोगों ने उसे दवा दिलाई और भोजन कराया। इसके बाद वह साइकिल से अपने घर के लिए रात में ही निकल गया।
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बेटे ने कहा कि साइकिल हो तो आ सकता है। साथ ही साइकिल खरीदने के लिए रुपये बैंक खाते में डालने को कहा। मां ने लोगों से रुपये उधार मांगे तो नहीं मिले। इस पर उसने अपनी गाय 4000 रुपये में बेच दी और रुपये पुत्र के खाते में जमा कर दिए। ये रकम निकालकर दिलीप ने 3500 रुपये की साइकिल खरीदी।
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26 अप्रैल को साइकिल से घर के लिए बुलंदशहर से निकल पड़ा। 30 अप्रैल की देर शाम नवाबगंज पहुंचा। वहां चौराहे पर कुछ लोगों को अपनी कहानी बताई। कहा कि उसे रास्ते में कई जगह पुलिस ने रोका और डंडों से पीटा। उसने शरीर पर लगी चोटें भी दिखाईं। कहा कि कई बैरियरों पर पुलिस ने उसे वापस कर दिया।
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इस पर उसने सड़क छोड़ दी और खेतों के रास्ते किसी तरह निकला। चोट के निशान देख लोगों ने उसे दवा दिलाई और भोजन कराया। इसके बाद वह साइकिल से अपने घर के लिए रात में ही निकल गया।