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Farrukhabad News: आलू के घाटे से उबरने के लिए किसान उगाएं मक्का
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फर्रुखाबाद। आलू किसानों को पिछले दो साल से हो रहे घाटे से उबारने के लिए कृषि विभाग ने नई पहल की है। विभाग रबी के सीजन में किसानों को आलू की जगह मक्का की फसल बोने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इस कदम से किसानों को प्रति बीघा करीब 10 हजार रुपये का मुनाफा होने की उम्मीद है।
पिछले दो वर्षों से आलू की मंदी के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। छोटे किसान कर्ज चुकाने में असमर्थ हो गए हैं। सरकार ने आलू भंडारण पर 100 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान की घोषणा की है। आलू की खेती में करीब 10 हजार रुपये प्रति बीघा लागत आती है। 25 क्विंटल प्रति बीघा उत्पादन पर औसतन 400 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलता है। इसमें भंडारण, परिवहन और अन्य खर्चों के बाद किसानों को करीब 7500 रुपये प्रति बीघा का नुकसान हो रहा है। इसके विपरीत, सर्दी में मक्का की फसल में 1500 से 2000 रुपये प्रति बीघा लागत आती है। इससे 12000 रुपये प्रति बीघा तक का उत्पादन मिल सकता है। फसल चक्र बदलने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी।
उपकृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र ने बताया कि सर्दी में मक्का के साथ किसान मटर, चना, मसूर और सरसों जैसी सहफसलें भी उगा सकते हैं। मक्का की बोआई नवंबर में शुरू होगी। यह फसल लगभग तीन माह में तैयार हो जाएगी। इसके बाद किसान जायद की फसल में फिर मक्का या उर्द, मूंग जैसी फसलें लगाकर कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
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अनुदान पर मिलेगा बीज
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने जानकारी दी कि रबी के सीजन के लिए संकर मक्का का बीज अनुदान पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मक्का की फसल से किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। यह पहल आलू की खेती में हुए घाटे से किसानों को उबरने में मदद करेगी। कृषि विभाग किसानों को इस नई फसल पद्धति के बारे में जागरूक कर रहा है।
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पिछले दो वर्षों से आलू की मंदी के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। छोटे किसान कर्ज चुकाने में असमर्थ हो गए हैं। सरकार ने आलू भंडारण पर 100 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान की घोषणा की है। आलू की खेती में करीब 10 हजार रुपये प्रति बीघा लागत आती है। 25 क्विंटल प्रति बीघा उत्पादन पर औसतन 400 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलता है। इसमें भंडारण, परिवहन और अन्य खर्चों के बाद किसानों को करीब 7500 रुपये प्रति बीघा का नुकसान हो रहा है। इसके विपरीत, सर्दी में मक्का की फसल में 1500 से 2000 रुपये प्रति बीघा लागत आती है। इससे 12000 रुपये प्रति बीघा तक का उत्पादन मिल सकता है। फसल चक्र बदलने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी।
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उपकृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र ने बताया कि सर्दी में मक्का के साथ किसान मटर, चना, मसूर और सरसों जैसी सहफसलें भी उगा सकते हैं। मक्का की बोआई नवंबर में शुरू होगी। यह फसल लगभग तीन माह में तैयार हो जाएगी। इसके बाद किसान जायद की फसल में फिर मक्का या उर्द, मूंग जैसी फसलें लगाकर कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
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अनुदान पर मिलेगा बीज
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने जानकारी दी कि रबी के सीजन के लिए संकर मक्का का बीज अनुदान पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मक्का की फसल से किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। यह पहल आलू की खेती में हुए घाटे से किसानों को उबरने में मदद करेगी। कृषि विभाग किसानों को इस नई फसल पद्धति के बारे में जागरूक कर रहा है।