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कोरोना के चलते पोल्ट्री फार्म पर मक्का की मांग घटी
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कमालगंज। कोरोना की दहशत से क्षेत्र के करीब 150 पोल्ट्री फार्म पर संकट आ गया है। मुर्गी पर आई मंदी से पोल्ट्री फार्म चलाने वाले किसानों व व्यापारियों को लाखों का घाटा है। 70 से 90 रुपये किलो बिकने वाला चिकन आलू के भाव 30 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
कमालगंज क्षेत्र में 150 से ज्यादा पोल्ट्री फार्म हैं। कस्बे के निकटवर्ती गांव शेखपुर में ही 5 पोल्ट्री फार्म हैं। करीमगंज में 7 मुर्गी फार्म संचालित हैं। इसके साथ ही सियांपुर, अमालियाहार, जीरागौर, भमौआ, हुसैनगंज, चिरपुरा आदि गांव में कई किसान पोल्ट्री फार्म चला रहे हैं। हरियाणा के साथ ही यूपी के शहरों गाजियाबाद, बुलंदशहर, प्रयागराज आदि में स्थित हेचरी से चूजे लाए जाते हैं।
होली पर परवा के दिन मुर्गे की खासी बिक्री होती है। इसके लिए काफी माल तैयार किया गया था लेकिन कोरोना की दहशत से मांग घट गई। होली से कुछ दिन पहले तक मुर्गे का मांस का भाव 70 से 90 रुपये प्रति किलो था। वह अब 30 रुपये प्रति किलो रह गया है। पोल्ट्री फार्म संचालक हस्सान अहमद सोहरवर्दी का कहना है कि कोरोना के डर से ही मुर्गे के भाव गिरे हैं। चिकन का भाव 30 से 40 रुपये प्रति किलो रह गया।
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उधर, 400 रुपये प्रति किलो बिकने वाला बकरे का मीट 800 से 900 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। मुर्गी फार्म के कर्मचारी सर्वेश ने बताया कि जबसे कोरोना की हवा फैली है, तभी से मांग में गिरावट आई है। हस्सान अहमद सोहरवर्दी ने बताया कि एक हजार चूजे पालने वाले पोल्ट्री फार्म संचालकों को डेढ़ लाख व दो हजार चूजे वाले पोल्ट्री फार्म को तीन लाख का घाटा हुआ है।
कमालगंज। कोरोना वायरस के खौफ से पोल्ट्री फार्म में मक्का की मांग घट गई है। इसके चलते बाहर की मंडियों के लिए लदान प्रभावित हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष नवीन मंडी में मक्का की आमद में 17152 क्विंटल की गिरावट आई है जबकि धान की आमद 10319 क्विंटल अधिक हुई।
कृषि उत्पादन मंडी समिति कमालगंज क कि वर्ष 2019-20 में दिसंबर 2019 तक 2,34120 क्विंटल मक्का की ही आमद हुई। वहीं मंडी में आने वाले अच्छी किस्म के धान-1509 व मेनका-धान की आमद में काफी बढ़ोत्तरी हुई। 2018-19 में दिसंबर 2018 तक 16,476 क्विंटल धान की आमद हुई थी। 2019-20 में दिसंबर तक 26,476 क्विंटल धान मंडी में आया। मंडी में इस आमदनी पर 2 प्रतिशत मंडी शुल्क लिया गया। इसके अलावा .5 प्रतिशत विकास कर लिया गया। आढ़ती संघ के अध्यक्ष संजय कमल का कहना है कि कोरोना वायरस के खौफ से पोल्ट्री व्यवसाय भारी मंदी में घिर गया है। इससे मक्का की मांग में गिरावट आ गई है।
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कमालगंज क्षेत्र में 150 से ज्यादा पोल्ट्री फार्म हैं। कस्बे के निकटवर्ती गांव शेखपुर में ही 5 पोल्ट्री फार्म हैं। करीमगंज में 7 मुर्गी फार्म संचालित हैं। इसके साथ ही सियांपुर, अमालियाहार, जीरागौर, भमौआ, हुसैनगंज, चिरपुरा आदि गांव में कई किसान पोल्ट्री फार्म चला रहे हैं। हरियाणा के साथ ही यूपी के शहरों गाजियाबाद, बुलंदशहर, प्रयागराज आदि में स्थित हेचरी से चूजे लाए जाते हैं।
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होली पर परवा के दिन मुर्गे की खासी बिक्री होती है। इसके लिए काफी माल तैयार किया गया था लेकिन कोरोना की दहशत से मांग घट गई। होली से कुछ दिन पहले तक मुर्गे का मांस का भाव 70 से 90 रुपये प्रति किलो था। वह अब 30 रुपये प्रति किलो रह गया है। पोल्ट्री फार्म संचालक हस्सान अहमद सोहरवर्दी का कहना है कि कोरोना के डर से ही मुर्गे के भाव गिरे हैं। चिकन का भाव 30 से 40 रुपये प्रति किलो रह गया।
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उधर, 400 रुपये प्रति किलो बिकने वाला बकरे का मीट 800 से 900 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। मुर्गी फार्म के कर्मचारी सर्वेश ने बताया कि जबसे कोरोना की हवा फैली है, तभी से मांग में गिरावट आई है। हस्सान अहमद सोहरवर्दी ने बताया कि एक हजार चूजे पालने वाले पोल्ट्री फार्म संचालकों को डेढ़ लाख व दो हजार चूजे वाले पोल्ट्री फार्म को तीन लाख का घाटा हुआ है।
कमालगंज। कोरोना वायरस के खौफ से पोल्ट्री फार्म में मक्का की मांग घट गई है। इसके चलते बाहर की मंडियों के लिए लदान प्रभावित हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष नवीन मंडी में मक्का की आमद में 17152 क्विंटल की गिरावट आई है जबकि धान की आमद 10319 क्विंटल अधिक हुई।
कृषि उत्पादन मंडी समिति कमालगंज क कि वर्ष 2019-20 में दिसंबर 2019 तक 2,34120 क्विंटल मक्का की ही आमद हुई। वहीं मंडी में आने वाले अच्छी किस्म के धान-1509 व मेनका-धान की आमद में काफी बढ़ोत्तरी हुई। 2018-19 में दिसंबर 2018 तक 16,476 क्विंटल धान की आमद हुई थी। 2019-20 में दिसंबर तक 26,476 क्विंटल धान मंडी में आया। मंडी में इस आमदनी पर 2 प्रतिशत मंडी शुल्क लिया गया। इसके अलावा .5 प्रतिशत विकास कर लिया गया। आढ़ती संघ के अध्यक्ष संजय कमल का कहना है कि कोरोना वायरस के खौफ से पोल्ट्री व्यवसाय भारी मंदी में घिर गया है। इससे मक्का की मांग में गिरावट आ गई है।