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Farrukhabad News: लोहिया अस्पताल के सीएमएस सेवानिवृत्त, सीट के लिए देर रात तक खींचतान
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फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए। कुर्सी पर काबिज होने के लिए दो वरिष्ठ डॉक्टरों में दिन भर खींचतान चलती रही।
एक ने एडी का पत्र दिखाया, तो दूसरे डॉक्टर के 2011 के शासनादेश दिखाने पर पेंच फंस गया। अंत में सीएमओ और सीएमएस डीएम के दरबार में अंतिम फैसला कराने देर रात तक डटे रहे। अस्पताल का स्टाफ असमंजस में रहा।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए। इससे पहले सीट पर काबिज होने के लिए वरिष्ठ डॉक्टर हरेंद्र चौहान और उसके बाद डॉ. अशोक प्रियदर्शी जोर आजमाइश करते रहे। डॉ. हरेंद्र चौहान तीन दिन पहले एडी का एक पत्र लेकर आए, जिसमें वरिष्ठतम डॉक्टर को पूरा प्रभार देने की बात कही गई थी।
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अस्पताल सूत्र बताते हैं कि मंगलवार को सुबह सीएमएस के दफ्तर में तीनों डॉक्टर बैठे। इसी दौरान डॉ. अशोक प्रियदर्शी ने वर्ष 2011 का एक शासनादेश दिखाया। इसमें कहा गया कि यदि किसी डॉक्टर के खिलाफ जांच चल रही हो अथवा जांच में दोषमुक्त के एक साल तक कोई भी वित्तीय चार्ज नहीं दिया जा सकता।
उसी आदेश में साफ किया गया कि यदि किसी वरिष्ठ डॉक्टर की सेवा में एक साल से कम समय रह गया है, तो भी उसे वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाएंगे। इस आदेश का सहारा लेकर सीएमएस ने डॉ. हरेंद्र चौहान को चार्ज देने से इन्कार कर दिया।
हरेंद्र चौहान ने यहां तक कह दिया कि यदि उन्होंने किसी और को चार्ज दिया, तो वह कोर्ट का सहारा लेंगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने पूरा मामला वरिष्ठ अफसरों के संज्ञान में दिया। इसके बाद देर शाम सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार, सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त जिलाधिकारी के दरबार में पहुंच गए। अब जिलाधिकारी स्तर से ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। देर रात तक सीएमएस का दफ्तर भी खुला रहा। अस्पताल कर्मियों में असमंजस की स्थिति बनी रही। सीएमएस का फोन रिसीव न होने से उनका पक्ष नहीं मिल सका।
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एक ने एडी का पत्र दिखाया, तो दूसरे डॉक्टर के 2011 के शासनादेश दिखाने पर पेंच फंस गया। अंत में सीएमओ और सीएमएस डीएम के दरबार में अंतिम फैसला कराने देर रात तक डटे रहे। अस्पताल का स्टाफ असमंजस में रहा।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए। इससे पहले सीट पर काबिज होने के लिए वरिष्ठ डॉक्टर हरेंद्र चौहान और उसके बाद डॉ. अशोक प्रियदर्शी जोर आजमाइश करते रहे। डॉ. हरेंद्र चौहान तीन दिन पहले एडी का एक पत्र लेकर आए, जिसमें वरिष्ठतम डॉक्टर को पूरा प्रभार देने की बात कही गई थी।
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अस्पताल सूत्र बताते हैं कि मंगलवार को सुबह सीएमएस के दफ्तर में तीनों डॉक्टर बैठे। इसी दौरान डॉ. अशोक प्रियदर्शी ने वर्ष 2011 का एक शासनादेश दिखाया। इसमें कहा गया कि यदि किसी डॉक्टर के खिलाफ जांच चल रही हो अथवा जांच में दोषमुक्त के एक साल तक कोई भी वित्तीय चार्ज नहीं दिया जा सकता।
उसी आदेश में साफ किया गया कि यदि किसी वरिष्ठ डॉक्टर की सेवा में एक साल से कम समय रह गया है, तो भी उसे वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाएंगे। इस आदेश का सहारा लेकर सीएमएस ने डॉ. हरेंद्र चौहान को चार्ज देने से इन्कार कर दिया।
हरेंद्र चौहान ने यहां तक कह दिया कि यदि उन्होंने किसी और को चार्ज दिया, तो वह कोर्ट का सहारा लेंगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने पूरा मामला वरिष्ठ अफसरों के संज्ञान में दिया। इसके बाद देर शाम सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार, सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त जिलाधिकारी के दरबार में पहुंच गए। अब जिलाधिकारी स्तर से ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। देर रात तक सीएमएस का दफ्तर भी खुला रहा। अस्पताल कर्मियों में असमंजस की स्थिति बनी रही। सीएमएस का फोन रिसीव न होने से उनका पक्ष नहीं मिल सका।