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रोडवेज रोजाना कर रहा 1.75 लाख रुपये की बचत
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फर्रुखाबाद। थोक डीजल में आई 25 रुपये लीटर की बढ़ोतरी से पहले ही रोडवेज ने पेट्रोल पंप से फुटकर खरीद शुरू कर दी है। इससे प्रतिदिन 1.75 लाख रुपये की बचत होने लगी है। रोडवेज बसों में रोजाना करीब सात हजार लीटर डीजल की खपत होती है।
रूस और यूक्रेन में युद्ध के बाद डीजल में 25 रुपये लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल यह बढ़ोतरी बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लागू की गई है। ऐसे में राज्य सड़क परिवहन निगम को बड़ा घाटा होने का अंदेशा था। लिहाजा रोडवेज प्रशासन ने निजी पेट्रोल पंप से फुटकर डीजल खरीद शुरू कर दी। इससे पहले रोडवेज प्रशासन सीधे कंपनी से डीजल मंगवाता था।
रोडवेज के स्थानीय डिपो में औसतन रोजाना 76 बसें चलती हैं। यह बसें 35,236 किलोमीटर चलाई जाती हैं। इनमें रोजाना करीब सात हजार लीटर डीजल की खपत होती है। डीजल की फुटकर खरीद से रोजाना 1.75 लाख रुपये की बचत हो रही है।
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रोडवेज प्रशासन ने यह कदम प्रदेश स्तर पर उठाया है। इसके पीछे मंशा थी कि यदि एक साथ 25 रुपये लीटर की बढ़ोतरी होती तो बसें घाटे में चली जातीं। इससे बचने के लिए किराये में काफी बढ़ोतरी करनी पड़ती। ऐसे में यात्रियों पर ही इसका बोझ पड़ जाता।
प्रदेश स्तर से निजी पेट्रोल पंपों से करार किया गया है। टैंकर सीधे कार्यशाला में पहुंच जाता है। बसों को डीजल की उपलब्धता वहीं हो जाती है। यात्रियों पर बोझ न पड़े, इसलिए यह कदम उठाया गया है।
आरसी यादव, एआरएम, फर्रुखाबाद डिपो।
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रूस और यूक्रेन में युद्ध के बाद डीजल में 25 रुपये लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल यह बढ़ोतरी बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लागू की गई है। ऐसे में राज्य सड़क परिवहन निगम को बड़ा घाटा होने का अंदेशा था। लिहाजा रोडवेज प्रशासन ने निजी पेट्रोल पंप से फुटकर डीजल खरीद शुरू कर दी। इससे पहले रोडवेज प्रशासन सीधे कंपनी से डीजल मंगवाता था।
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रोडवेज के स्थानीय डिपो में औसतन रोजाना 76 बसें चलती हैं। यह बसें 35,236 किलोमीटर चलाई जाती हैं। इनमें रोजाना करीब सात हजार लीटर डीजल की खपत होती है। डीजल की फुटकर खरीद से रोजाना 1.75 लाख रुपये की बचत हो रही है।
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रोडवेज प्रशासन ने यह कदम प्रदेश स्तर पर उठाया है। इसके पीछे मंशा थी कि यदि एक साथ 25 रुपये लीटर की बढ़ोतरी होती तो बसें घाटे में चली जातीं। इससे बचने के लिए किराये में काफी बढ़ोतरी करनी पड़ती। ऐसे में यात्रियों पर ही इसका बोझ पड़ जाता।
प्रदेश स्तर से निजी पेट्रोल पंपों से करार किया गया है। टैंकर सीधे कार्यशाला में पहुंच जाता है। बसों को डीजल की उपलब्धता वहीं हो जाती है। यात्रियों पर बोझ न पड़े, इसलिए यह कदम उठाया गया है।
आरसी यादव, एआरएम, फर्रुखाबाद डिपो।