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आंधी-बारिश से मक्का की फसल बर्बाद
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नवाबगंज/कमालगंज बेमौसम आंधी और बारिश ने आम और मक्का की फसल को बर्बाद कर दिया है। खेतों में खड़ी पिछैती मक्का की फसल गिर गई, जबकि बड़ी मक्का भुट्टा के नीचे से टूट गई है। मक्का में पैदावार कम होने से किसान चिंतित हैं। इस बारिश से धान की फसल को फायदा मिला है।
बरतल गांव के रामनिवास राठौर ने बताया कि उनके पास चार बीघा मक्का है। पूरी फसल खेत में ही गिर गई है। पहले कोरोना ने मारा अब आंधी ने बर्बाद कर दिया। समझ नहीं आ रहा अब क्या करेंगे।
बरतल के मुकेश बाथम ने कहा कि बड़ी मुश्किल से पैसे इकट्ठा करके 12 बीघा मक्का की फसल तैयार की थी। आधी से ज्यादा फसल बर्बाद हो गई। यह दैवीय आपदा है। अधिकारियों को किसानों के लिए मुआवजे की व्यवस्था करनी चाहिए।
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उस्मानगंज निवासी किसान बृजेश कटियार ने बताया कि मक्का की फसल को तैयार करने में चार महीने लगे। उनकी चार बीघा फसल में करीब 15 हजार रुपये की लागत आई है। आवारा पशुओं से फसल को जैसे-तैसे बचाया। मगर अब बारिश और तेज हवा में फसल नष्ट हो गई।
फोटो - 21सत्यम कटियार
कंधरापुर निवासी किसान सत्यम कटियार ने बताया कि उनके क्षेत्र में मक्का की फसल चौपट हो गई। उन्होंने 11 बीघा मक्का की फसल की थी। इसकी लागत करीब 40 हजार रुपये है। तेज हवा ने पूरी फसल बेकार कर दी। पानी बरसने से धान की फसल को फायदा मिला है।
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बरतल गांव के रामनिवास राठौर ने बताया कि उनके पास चार बीघा मक्का है। पूरी फसल खेत में ही गिर गई है। पहले कोरोना ने मारा अब आंधी ने बर्बाद कर दिया। समझ नहीं आ रहा अब क्या करेंगे।
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बरतल के मुकेश बाथम ने कहा कि बड़ी मुश्किल से पैसे इकट्ठा करके 12 बीघा मक्का की फसल तैयार की थी। आधी से ज्यादा फसल बर्बाद हो गई। यह दैवीय आपदा है। अधिकारियों को किसानों के लिए मुआवजे की व्यवस्था करनी चाहिए।
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उस्मानगंज निवासी किसान बृजेश कटियार ने बताया कि मक्का की फसल को तैयार करने में चार महीने लगे। उनकी चार बीघा फसल में करीब 15 हजार रुपये की लागत आई है। आवारा पशुओं से फसल को जैसे-तैसे बचाया। मगर अब बारिश और तेज हवा में फसल नष्ट हो गई।
फोटो - 21सत्यम कटियार
कंधरापुर निवासी किसान सत्यम कटियार ने बताया कि उनके क्षेत्र में मक्का की फसल चौपट हो गई। उन्होंने 11 बीघा मक्का की फसल की थी। इसकी लागत करीब 40 हजार रुपये है। तेज हवा ने पूरी फसल बेकार कर दी। पानी बरसने से धान की फसल को फायदा मिला है।