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अभियोजन पक्ष सजा दिलाने में लापरवाही न बरतें-जिलाधिकारी
Farrukhabad
Updated Sat, 12 May 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। जो अपराधी पुलिस द्वारा पकड़े जाते हैं उन्हें कोर्ट में आसानी से जमानत मिल जाती है। यानि अभियोजन पक्ष अपराधियों को सजा दिलवाने का भरपूर प्रयास नहीं कर रहे। इसके अलावा कोर्ट से जारी होने वाले वारंट को तामील कराने में होने वाली कार्यवाही की समुचित निगरानी भी नहीं हो रही है। इन दोनों ही गंभीर बिंदुओं पर अभियोजन पक्ष और पुलिस अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित करना होगा ताकि कोर्ट में लंबित मामलों का जल्द निस्तारण हो सके। जिलाधिकारी डा.मुथुकुमार स्वामी बी. ने शुक्रवार को सरकारी अधिवक्ताओं के कार्यों की समीक्षा की तो कई मामले उजागर हुए। जिलाधिकारी को एसपीओ आर.डी.निगम ने बताया कि कुल दस हजार 23 मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। इन सभी मामलों में आरोप पत्र लगे हैं। जिनमें केवल 47 मामलों का निस्तारण हो सका है। इसमें नौ मामलों में अपराधियों को सजा हुई। उन्होंने पुलिस और अभियोजन पक्ष के बीच आपसी समन्वय पर भी विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि अपराधियों को पकड़कर जेल भेजने और उन्हें अपराध की सजा दिलाने में इन्हीं दो कड़ियों पर प्रमुख दायित्व होता है। डीएम ने कहा कि फर्रुखाबाद में अपराध बहुत हो रहे हैं। हर एक दिन के बाद यहां हत्याएं होती हैं। अपराधियों के हौसले सिर्फ इसलिए बुलंद होते हैं क्योंकि उन्हें कोर्ट में आसानी से जमानत मिल जाती है। इसके लिए अभियोजन पक्ष को पक्के तौर पर यह जिम्मेदारी निभानी होगी कि जिस अपराधी को पुलिस कर्मी जीतोड़ प्रयास करके पकड़ते हैं उन्हें जमानत आसानी से न मिलने पाए। जिलाधिकारी को विभिन्न मामलों की जानकारी एसपीओ आर.डी.निगम और डीजीसी क्रिमिनल, चंद्रशेखर वर्मा ने दी। अन्य सरकारी अधिवक्ता भी इस बैठक में मौजूद रहे।
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