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...दौलत के चस्के ने फकीरी छीन ली मेरी
Farrukhabad
Updated Sat, 21 Dec 2013 05:44 AM IST
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17वां फर्रुखाबाद महोत्सव
कवि सम्मेलन और मुशायरे का उठाया लुत्फ
कवियों, शायरों ने लूटी श्रोताओं की वाहवाही
फर्रुखाबाद। पटेल पार्क में आयोजित 17वें फर्रुखाबाद महोत्सव में हुए कवि सम्मेलन व मुशायरे में कवियों और शायरों ने गीत व गजलों की ऐसी तान छेड़ी की पूरी रात यादगार बन गई। साहित्य प्रेमियों ने इसका जमकर लुत्फ उठाया। इस दौरान शायरों और कवियों को सम्मानित भी किया गया।
कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में जिलाधिकारी पवन कुमार ने रचना पेश की- मजहब, दौलत, जाति, घराना, सरहद, शोहरत, खुद्दारी एक मोहब्बत की चादर को कितने चूहे कुतर गए। गरिमा पांडेय ने रचना सुनाई- पहन के प्रीत के कंगन तुम्हारे द्वार आई हूं, मैं अपनी साधना के पुष्पों का हार लाई हूं। संचालक मंसूर उस्मानी ने शेर पढ़ा- वक्ता होता है बेवफा यारों आदमी बेवफा नहीं होता है, इश्क उसको अता नहीं होता जिनके दिलों में खुदा नहीं होता। कमल सक्सेना ने रचना सुनाई- नदियां हैं खामोश समुंदर प्यासा है, मेरे देश में यह कैसा खेल तमाशा है। पवन दीक्षित ने रचना पढ़ी- वह हस्ती छीन ली मेरी वह मस्ती छीन ली मेरी, दौलत के चस्के ने फकीरी छीन ली मेरी। बलराम श्रीवास्तव ने रचना सुनाई- पंचामृत व मदिरा में समुचित दूरी बनी रहे, लफ्फाजी हो हर मंच से मगर कविता बनी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने नज्म पेश की- सबे फैसले होते नहीं सिक्के उछाल के, दिल का मामला है जरा देखभाल के। इस दौरान मदनमोहन दानिश, अकील, कविता तिवारी, शरीफ भारतीय, अनिल मिश्रा, विद्या प्रकाश और कृष्णकांत त्रिपाठी आदि ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंकित अग्रवाल, सिटी मजिस्ट्रेट प्रभुनाथ सिंह, जिला क्रीड़ाधिकारी अनिमेष सक्सेना, डा. रामकृष्ण राजपूत, राकेश चौहान, पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत, सरल दुबे, रोहित गोयल, अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, दिलदार हुसैन, कामता प्रसाद राजपूत, पंचशील राजपूत और सरदार बाबू सिंह गिल आदि मौजूद रहे।
पत्रकारिता में आईं चुनौतियों का करें सामना
फर्रुखाबाद। 17वें फर्रुखाबाद महोत्सव में पत्रकारिता व साहित्यिक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि आने वाला समय पत्रकारिता के लिए बहुत ही प्रतिकूल और कष्टपूर्ण होगा। इन चुनौतियों से निपटने को पत्रकार तैयार रहें। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट ने पत्रकारों को सम्मानित भी किया। मुख्य अतिथि पदमकांत शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता साहित्य का ही अभिन्न अंग है। वरिष्ठ पत्रकार यदुनंदन गोस्वामी ने कहा कि पत्रकारिता में विकृतियां आई हैं लेकिन इससे युवा पत्रकारों को घबराना नहीं है। डटकर इसका सामना करना है। पत्रकार समाज का आईना होते हैं। इस दौरान डा. श्रीकृष्ण गुप्त, महेशचंद्र अवस्थी, सत्यमोहन पांडेय, विनय सिंह शाक्य, इंदू अवस्थी, डा. संतोष प्रजापति, उपकार मंणि उपकार, डा. रामकृष्ण राजपूत, डा. कृष्णकांत अक्षर, विनोद श्रीवास्तव, शिवमंगल, वेदपाल सिंह, कन्हैयालाल पांडेय आदि मौजूद रहे। संचालन पूरनचंद्र मिश्रा ने किया।
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प्रकृति का करें संरक्षण-वीपी सिंह
फर्रुखाबाद। पटेलपार्क में चल रहे 17वें फर्रुखाबाद महोत्सव में शुक्रवार को वन्य एवं पर्यावरण संगोष्ठी हुई। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डा. वीपी सिंह ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण करना बहुत आवश्यक हो गया है। कार्यक्रम का संचालन अजीत सिंह यादव ने किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी पवन कुमार, हरिश्चंद्र, डा. श्याम निर्मोही, डीएफओ आरके सिंह, अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, डा. एसके गुप्ता, डा. श्याम निर्मोही, योगेंद्र सिंह और विशंभर दयाल पाल आदि मौजूद रहे।
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कवि सम्मेलन और मुशायरे का उठाया लुत्फ
कवियों, शायरों ने लूटी श्रोताओं की वाहवाही
फर्रुखाबाद। पटेल पार्क में आयोजित 17वें फर्रुखाबाद महोत्सव में हुए कवि सम्मेलन व मुशायरे में कवियों और शायरों ने गीत व गजलों की ऐसी तान छेड़ी की पूरी रात यादगार बन गई। साहित्य प्रेमियों ने इसका जमकर लुत्फ उठाया। इस दौरान शायरों और कवियों को सम्मानित भी किया गया।
कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में जिलाधिकारी पवन कुमार ने रचना पेश की- मजहब, दौलत, जाति, घराना, सरहद, शोहरत, खुद्दारी एक मोहब्बत की चादर को कितने चूहे कुतर गए। गरिमा पांडेय ने रचना सुनाई- पहन के प्रीत के कंगन तुम्हारे द्वार आई हूं, मैं अपनी साधना के पुष्पों का हार लाई हूं। संचालक मंसूर उस्मानी ने शेर पढ़ा- वक्ता होता है बेवफा यारों आदमी बेवफा नहीं होता है, इश्क उसको अता नहीं होता जिनके दिलों में खुदा नहीं होता। कमल सक्सेना ने रचना सुनाई- नदियां हैं खामोश समुंदर प्यासा है, मेरे देश में यह कैसा खेल तमाशा है। पवन दीक्षित ने रचना पढ़ी- वह हस्ती छीन ली मेरी वह मस्ती छीन ली मेरी, दौलत के चस्के ने फकीरी छीन ली मेरी। बलराम श्रीवास्तव ने रचना सुनाई- पंचामृत व मदिरा में समुचित दूरी बनी रहे, लफ्फाजी हो हर मंच से मगर कविता बनी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने नज्म पेश की- सबे फैसले होते नहीं सिक्के उछाल के, दिल का मामला है जरा देखभाल के। इस दौरान मदनमोहन दानिश, अकील, कविता तिवारी, शरीफ भारतीय, अनिल मिश्रा, विद्या प्रकाश और कृष्णकांत त्रिपाठी आदि ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंकित अग्रवाल, सिटी मजिस्ट्रेट प्रभुनाथ सिंह, जिला क्रीड़ाधिकारी अनिमेष सक्सेना, डा. रामकृष्ण राजपूत, राकेश चौहान, पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत, सरल दुबे, रोहित गोयल, अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, दिलदार हुसैन, कामता प्रसाद राजपूत, पंचशील राजपूत और सरदार बाबू सिंह गिल आदि मौजूद रहे।
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पत्रकारिता में आईं चुनौतियों का करें सामना
फर्रुखाबाद। 17वें फर्रुखाबाद महोत्सव में पत्रकारिता व साहित्यिक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि आने वाला समय पत्रकारिता के लिए बहुत ही प्रतिकूल और कष्टपूर्ण होगा। इन चुनौतियों से निपटने को पत्रकार तैयार रहें। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट ने पत्रकारों को सम्मानित भी किया। मुख्य अतिथि पदमकांत शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता साहित्य का ही अभिन्न अंग है। वरिष्ठ पत्रकार यदुनंदन गोस्वामी ने कहा कि पत्रकारिता में विकृतियां आई हैं लेकिन इससे युवा पत्रकारों को घबराना नहीं है। डटकर इसका सामना करना है। पत्रकार समाज का आईना होते हैं। इस दौरान डा. श्रीकृष्ण गुप्त, महेशचंद्र अवस्थी, सत्यमोहन पांडेय, विनय सिंह शाक्य, इंदू अवस्थी, डा. संतोष प्रजापति, उपकार मंणि उपकार, डा. रामकृष्ण राजपूत, डा. कृष्णकांत अक्षर, विनोद श्रीवास्तव, शिवमंगल, वेदपाल सिंह, कन्हैयालाल पांडेय आदि मौजूद रहे। संचालन पूरनचंद्र मिश्रा ने किया।
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प्रकृति का करें संरक्षण-वीपी सिंह
फर्रुखाबाद। पटेलपार्क में चल रहे 17वें फर्रुखाबाद महोत्सव में शुक्रवार को वन्य एवं पर्यावरण संगोष्ठी हुई। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डा. वीपी सिंह ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण करना बहुत आवश्यक हो गया है। कार्यक्रम का संचालन अजीत सिंह यादव ने किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी पवन कुमार, हरिश्चंद्र, डा. श्याम निर्मोही, डीएफओ आरके सिंह, अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, डा. एसके गुप्ता, डा. श्याम निर्मोही, योगेंद्र सिंह और विशंभर दयाल पाल आदि मौजूद रहे।