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वोटर, नेता और प्रशासन सभी होंगे हाईटेक
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फर्रुखाबाद। स्मार्ट टेक्नोलॉजी ने हमारे बहुत से काम आसान कर दिए हैं। चुनाव में टेक्नोलॉजी ईवीएम से शुरू हुआ सफर अब सी-विजिल तक पहुंच गया है। इसके अलावा कई तरह की हाईटेक व्यवस्थाएं इस चुनाव में उपयोग की जाएंगी। इनसे वोटर, प्रत्याशी और मतदान कर्मियों सभी को आसानी होगी।
भारत में 1999 के आम चुनाव से पहले तक बैलेट पेपर से चुनाव होता था। इसकी प्रक्रिया भी काफी लंबी होती थी और चुनाव के परिणाम आने में भी बहुत समय लग जाता था। 1999 के आम चुनाव में पहली बार चुनाव आयोग ने ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) से मतदान करवाए। इससे वोटिंग का सामान आदि ले जाना व वोटों की गिनती में चार-चार दिन का समय लगना भी बंद हो गया। हाल ही में हुए चुनावाें में जब बीजेपी को लगातार जीत मिली तो नेताओं ने ईवीएम का जमकर विरोध किया। संसद से लेकर सड़कों तक ईवीएम के खिलाफ प्रदर्शन हुए।
इतना ही नहीं गली-गली में ईवीएम के पुतले भी फूंके गए। इसके बाद चुनाव आयोग ने 2017 के यूपी के विधानसभा चुनाव में कुछ बूथों पर वीवीपैट को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लांच किया। इसके सफल परीक्षण के बाद अब इस आगामी लोकसभा चुनाव में आयोग ने वीवीपैट को पूरी तरह से लांच कर दिया। आलम यह है कि वोट बनवाने से लेकर वोट डालने तक सब कुछ टेक्नोलॉजी पर ही निर्भर है। यहां तक की आचार संहिता के उल्लंघन के लिए भी सी-विजिल एप का उपयोग किया जा सकता है।
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कौन-कौन सी एप का होगा उपयोग
पीडब्ल्यूडी एप : यह एप विशेषकर दिव्यांगों के लिए जारी किया गया है।
सी-विजिल एप : आचार संहिता के उल्लंघन संबंधी किसी भी तरह की शिकायत के लिए सी-विजिल एप का उपयोग किया जा सकता है। इसके द्वारा 100 मिनट में समस्या का समाधान होगा।
1950 हेल्प लाइन : चुनाव के संबंध में किसी भी प्रकार की समस्या के लिए 1950 नंबर पर कॉल कर जानकारी दी जा सकती है।
समाधान पोर्टल : निर्वाचन आयोग ने नागरिकों से जुड़ी जानकारियों की शिकायत और सुझाव के लिए एकीकृत वेब पोर्टल डिजाइन किया है।
यह भी हैं ऑनलाइन
इसके अलावा इस चुनाव में निगरानी डैशबोर्ड, सुविधा एप और पर्यवेक्षक एप आदि का भी इस्तेमाल होगा। इस बार नामांकन प्रक्रिया व चुनावी सभा के लिए अनुमति आदि लेने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन है।
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भारत में 1999 के आम चुनाव से पहले तक बैलेट पेपर से चुनाव होता था। इसकी प्रक्रिया भी काफी लंबी होती थी और चुनाव के परिणाम आने में भी बहुत समय लग जाता था। 1999 के आम चुनाव में पहली बार चुनाव आयोग ने ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) से मतदान करवाए। इससे वोटिंग का सामान आदि ले जाना व वोटों की गिनती में चार-चार दिन का समय लगना भी बंद हो गया। हाल ही में हुए चुनावाें में जब बीजेपी को लगातार जीत मिली तो नेताओं ने ईवीएम का जमकर विरोध किया। संसद से लेकर सड़कों तक ईवीएम के खिलाफ प्रदर्शन हुए।
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इतना ही नहीं गली-गली में ईवीएम के पुतले भी फूंके गए। इसके बाद चुनाव आयोग ने 2017 के यूपी के विधानसभा चुनाव में कुछ बूथों पर वीवीपैट को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लांच किया। इसके सफल परीक्षण के बाद अब इस आगामी लोकसभा चुनाव में आयोग ने वीवीपैट को पूरी तरह से लांच कर दिया। आलम यह है कि वोट बनवाने से लेकर वोट डालने तक सब कुछ टेक्नोलॉजी पर ही निर्भर है। यहां तक की आचार संहिता के उल्लंघन के लिए भी सी-विजिल एप का उपयोग किया जा सकता है।
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कौन-कौन सी एप का होगा उपयोग
पीडब्ल्यूडी एप : यह एप विशेषकर दिव्यांगों के लिए जारी किया गया है।
सी-विजिल एप : आचार संहिता के उल्लंघन संबंधी किसी भी तरह की शिकायत के लिए सी-विजिल एप का उपयोग किया जा सकता है। इसके द्वारा 100 मिनट में समस्या का समाधान होगा।
1950 हेल्प लाइन : चुनाव के संबंध में किसी भी प्रकार की समस्या के लिए 1950 नंबर पर कॉल कर जानकारी दी जा सकती है।
समाधान पोर्टल : निर्वाचन आयोग ने नागरिकों से जुड़ी जानकारियों की शिकायत और सुझाव के लिए एकीकृत वेब पोर्टल डिजाइन किया है।
यह भी हैं ऑनलाइन
इसके अलावा इस चुनाव में निगरानी डैशबोर्ड, सुविधा एप और पर्यवेक्षक एप आदि का भी इस्तेमाल होगा। इस बार नामांकन प्रक्रिया व चुनावी सभा के लिए अनुमति आदि लेने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन है।