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सात करोड़ से बने 50 शैया अस्पताल में नहीं पानी का इंतजाम
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बकेवर। सात करोड़ रुपये से कस्बे में बने 50 शैया अस्पताल में मरीजों व तीमारदारों के लिए पानी का इंतजाम नहीं है। लोग बाहर से पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं। डॉक्टर और स्टाफ भी घर से बोतल लेकर आ रहे हैं।
कस्बे के इस अस्पताल में प्रतिदिन करीब 100 मरीज आते हैं। डॉक्टर और स्टाफ समेत करीब 10 लोग यहां तैनात हैं। इसके बावजूद अस्पताल में पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं हैं। सबमर्सिबल लगा है लेकिन इससे सिर्फ शौचालय में कनेक्शन है। परिसर में न तो कोई टंकी है और न ही कोई टोंटी। हैंडपंप की भी कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को प्यास बुझाने के लिए बाहर से पानी की बोतल और पाउच खरीदने पड़ते हैं।
तत्कालीन ईओ ने दिया था वाटरकूलर लगवाने का आश्वासन
करीब पांच माह पहले नगर पंचायत बकेवर के तत्कालीन ईओ अजय कुमार ने अस्पताल परिसर में वाटर कूलर लगवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ ही दिनों में उनका स्थानांतरण हो गया। नवागत ईओ सुनील कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करके समस्या का समाधान कराएंगे।
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प्रभारी डॉ. संदीप ने कहा कि अस्पताल में पेयजल के लिए न कोई टंकी है और न वाटर कूलर लगा है। इससे अस्पताल के स्टाफ के साथ उपचार के लिए आने मरीजों को भी पेयजल के लिए भटकना पड़ता है। उच्चाधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी जा चुकी है।
मरीजों ने बताई पीड़ा
शनिवार को अस्पताल में दिखाने आईं लखना की विनीता कहती हैं कि प्यास लगने पर पानी की तलाश की, लेकिन कहीं कोई नल नहीं दिखा। इस पर दो मीटर दूर जाकर पानी खरीदकर पिया।
कछपुरा गांव से आईं अनीता ने बताया कि इतना बड़ा अस्पताल है, लेकिन यहां पीने का पानी का कोई इंतजाम नहीं। कॉलेज के पास दुकान से 20 रुपये की पानी की बोतल खरीदकर पानी पीना पड़ा।
कछपुरा के ही वेदप्रकाश कहते हैं कि अस्पताल में दवा लेने आए थे। प्यास लगने पर पानी पीने के लिए पूछा तो बताया गया कोई इंतजाम नहीं है। अब जा रहे हैं।
प्रशिक्षण लेने आ रहे बीफार्मा के छात्र उमंग त्रिपाठी ने बताया कि वह यहां कई दिनों से आ रहे हैं। पानी का इंतजाम न होने की वजह से बोतल लेकर आते हैं।
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कस्बे के इस अस्पताल में प्रतिदिन करीब 100 मरीज आते हैं। डॉक्टर और स्टाफ समेत करीब 10 लोग यहां तैनात हैं। इसके बावजूद अस्पताल में पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं हैं। सबमर्सिबल लगा है लेकिन इससे सिर्फ शौचालय में कनेक्शन है। परिसर में न तो कोई टंकी है और न ही कोई टोंटी। हैंडपंप की भी कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को प्यास बुझाने के लिए बाहर से पानी की बोतल और पाउच खरीदने पड़ते हैं।
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तत्कालीन ईओ ने दिया था वाटरकूलर लगवाने का आश्वासन
करीब पांच माह पहले नगर पंचायत बकेवर के तत्कालीन ईओ अजय कुमार ने अस्पताल परिसर में वाटर कूलर लगवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ ही दिनों में उनका स्थानांतरण हो गया। नवागत ईओ सुनील कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करके समस्या का समाधान कराएंगे।
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प्रभारी डॉ. संदीप ने कहा कि अस्पताल में पेयजल के लिए न कोई टंकी है और न वाटर कूलर लगा है। इससे अस्पताल के स्टाफ के साथ उपचार के लिए आने मरीजों को भी पेयजल के लिए भटकना पड़ता है। उच्चाधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी जा चुकी है।
मरीजों ने बताई पीड़ा
शनिवार को अस्पताल में दिखाने आईं लखना की विनीता कहती हैं कि प्यास लगने पर पानी की तलाश की, लेकिन कहीं कोई नल नहीं दिखा। इस पर दो मीटर दूर जाकर पानी खरीदकर पिया।
कछपुरा गांव से आईं अनीता ने बताया कि इतना बड़ा अस्पताल है, लेकिन यहां पीने का पानी का कोई इंतजाम नहीं। कॉलेज के पास दुकान से 20 रुपये की पानी की बोतल खरीदकर पानी पीना पड़ा।
कछपुरा के ही वेदप्रकाश कहते हैं कि अस्पताल में दवा लेने आए थे। प्यास लगने पर पानी पीने के लिए पूछा तो बताया गया कोई इंतजाम नहीं है। अब जा रहे हैं।
प्रशिक्षण लेने आ रहे बीफार्मा के छात्र उमंग त्रिपाठी ने बताया कि वह यहां कई दिनों से आ रहे हैं। पानी का इंतजाम न होने की वजह से बोतल लेकर आते हैं।