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यूक्रेन से लौटे शिवांग ने परिजनों संग खाया राजमा चावल
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फोटो संख्या 02- अपने परिजनों के साथ शिवांग
- फोटो : ETAWAH
भरथना। यूक्रेन से घर वापसी के बाद इकलौते बेटे शिवांग उर्फ हनी को उसकी मां ने पसंदीदा राजमा चावल खिलाया। शिवांग ने बताया कि फंसे रहने के दौरान जरूरत का ही खाना खा पाते थे, जिसमें ब्रेड, चावल आदि शामिल था।
शिवांग बुधवार सुबह छह बजे ब्रह्मनगर स्थित आवास पर शिवांग पहुंचा। पिता सुरेंद्र दुबे, मां सीमा दुबे सहित संयुक्त परिवार के लोगों ने उसे गले लगा लिया।
शिवांग ने भी माता-पिता सहित सभी बड़ों के पैर छुए। ताऊ डॉ. वीरेंद्र दुबे, ताई सुशीला देवी, चचेरे भाई विकास और भाभी कीर्ति दुबे आदि ने मिलकर दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया।
कई दिनों की बेचैनी के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल छा गया। सभी ने मिलजुल कर राजमा चावल खाया। चाचा शिवांग के घर पहुंचने पर भतीजा राघव भी काफी खुश दिखा।
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शिवांग ने सुनाई आपबीती
शिवांग यूक्रेन की खारकीव नेशनल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई करने 12 फरवरी को पहुंचा था।
युद्ध के दौरान की आपबीती सुनाते हुए उसने बताया कि 24 फरवरी को वह अन्य छात्रों के साथ क्लास रूम में था। उसी दौरान मोबाइल से रूस के हमले की जानकारी मिली।
हमले की सूचना पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी छात्रों को हॉस्टल के बंकर में जाने के निर्देश दिए। इस दौरान बंकर में खाना-पीना होता रहा।
दो मार्च को खारकीव छोड़ने की भारतीय दूतावास की एडवाइजरी पर सभी छात्रों को रेलवे स्टेशन ले जाया गया। वहां ट्रेन में पहले यूक्रेन के और बाद में विदेशी महिला छात्रों को अनुमति दी गई।
ट्रेन पर छात्र नहीं चढ़ सके। हॉस्टल के बंकर से रेलवे स्टेशन तक जाने के बीच तीन एयर स्ट्राइक लगभग 500 मीटर की दूरी पर हुई, उन धमाकों के कण आंखों के सामने से निकलने से सभी सहम गए।
पर, साथ मे यूक्रेन सैनिकों और हॉस्टल कर्मियों ने तत्काल जमीन पर लेटने का निर्देश देते हुए सभी छात्रों को मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में सुरक्षित पहुंचाया।
बाद में बस से सभी छात्रों को खारकीव से लगभग 28 किलोमीटर दूर दो मार्च की देर शाम पिशोचिन में स्थित एक हॉस्टल ले जाया गया। वहां से पांच मार्च को बस से पोलटावा ले जाया गया।
सात मार्च को देर शाम को रोमानिया सीमा पहुंचा। उस दौरान वहां माइनस 6 डिग्री तापमान था। सीमा पार कर देर रात सेल्सिया एयरपोर्ट से भारत के लिए फ्लाइट से अगले आठ मार्च को सुबह लगभग आठ बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंच गया।
परिजनों ने ऑपरेशन गंगा को सराहा
शिवांग की सकुशल घर वापसी पर पिता सुरेंद्र दुबे आदि परिजनों ने युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीय छात्रों के निकालने के भारत सरकार के चलाए गए ऑपरेशन गंगा की सराहना की।
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शिवांग बुधवार सुबह छह बजे ब्रह्मनगर स्थित आवास पर शिवांग पहुंचा। पिता सुरेंद्र दुबे, मां सीमा दुबे सहित संयुक्त परिवार के लोगों ने उसे गले लगा लिया।
शिवांग ने भी माता-पिता सहित सभी बड़ों के पैर छुए। ताऊ डॉ. वीरेंद्र दुबे, ताई सुशीला देवी, चचेरे भाई विकास और भाभी कीर्ति दुबे आदि ने मिलकर दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया।
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कई दिनों की बेचैनी के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल छा गया। सभी ने मिलजुल कर राजमा चावल खाया। चाचा शिवांग के घर पहुंचने पर भतीजा राघव भी काफी खुश दिखा।
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शिवांग ने सुनाई आपबीती
शिवांग यूक्रेन की खारकीव नेशनल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई करने 12 फरवरी को पहुंचा था।
युद्ध के दौरान की आपबीती सुनाते हुए उसने बताया कि 24 फरवरी को वह अन्य छात्रों के साथ क्लास रूम में था। उसी दौरान मोबाइल से रूस के हमले की जानकारी मिली।
हमले की सूचना पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी छात्रों को हॉस्टल के बंकर में जाने के निर्देश दिए। इस दौरान बंकर में खाना-पीना होता रहा।
दो मार्च को खारकीव छोड़ने की भारतीय दूतावास की एडवाइजरी पर सभी छात्रों को रेलवे स्टेशन ले जाया गया। वहां ट्रेन में पहले यूक्रेन के और बाद में विदेशी महिला छात्रों को अनुमति दी गई।
ट्रेन पर छात्र नहीं चढ़ सके। हॉस्टल के बंकर से रेलवे स्टेशन तक जाने के बीच तीन एयर स्ट्राइक लगभग 500 मीटर की दूरी पर हुई, उन धमाकों के कण आंखों के सामने से निकलने से सभी सहम गए।
पर, साथ मे यूक्रेन सैनिकों और हॉस्टल कर्मियों ने तत्काल जमीन पर लेटने का निर्देश देते हुए सभी छात्रों को मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में सुरक्षित पहुंचाया।
बाद में बस से सभी छात्रों को खारकीव से लगभग 28 किलोमीटर दूर दो मार्च की देर शाम पिशोचिन में स्थित एक हॉस्टल ले जाया गया। वहां से पांच मार्च को बस से पोलटावा ले जाया गया।
सात मार्च को देर शाम को रोमानिया सीमा पहुंचा। उस दौरान वहां माइनस 6 डिग्री तापमान था। सीमा पार कर देर रात सेल्सिया एयरपोर्ट से भारत के लिए फ्लाइट से अगले आठ मार्च को सुबह लगभग आठ बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंच गया।
परिजनों ने ऑपरेशन गंगा को सराहा
शिवांग की सकुशल घर वापसी पर पिता सुरेंद्र दुबे आदि परिजनों ने युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीय छात्रों के निकालने के भारत सरकार के चलाए गए ऑपरेशन गंगा की सराहना की।