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लैपटॉप न मोबाइल, बच्चे कैसे करेंगे ऑनलाइन पढ़ाई
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शासन के आदेश पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने 15 जुलाई से माध्यमिक स्कूलों के छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कराने का निर्देश दे दिया है।
लेकिन, ग्रामीण इलाकों से जुड़े जिले के 70 फीसदी छात्रों के पास लैपटॉप, टैबलेट तो दूर स्मार्ट फोन तक नहीं है। यही वजह है कि लॉकडाउन के दूसरे चरण में ऑनलाइन पढ़ाई का प्रयोग जिले में फेल साबित हो चुका है।
अभिभावकों का कहना है कि एक बार फिर विभाग बिना सुविधा मुहैया करवाए इस व्यवस्था को लागू करके बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है।
लॉकडाउन के दौरान अप्रैल के महीने में भी माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा चुकी है। वह भी ज्यादा सफल नहीं हो सकी।
उस समय तो छात्र-छात्राओं के अभिभावक घरों में ही थे। ऐसी स्थिति में मोबाइल घरों में ही थे। उस वक्त भी 30 से 35 प्रतिशत बच्चों तक ही ऑनलाइन पढ़ाई की पहुंच हो सकी थी।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चों के पास मोबाइल नहीं हैं। गांवों में नेटवर्किंग की समस्या अलग से है।
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अब 15 जुलाई से फिर से ऑनलाइन पढ़ाई होगी।
ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के सामने आएगी। अब अभिभावक भी घरों से बाहर निकलकर काम पर जाने लगे हैं।
ऐसे में स्मार्ट फोन की उपलब्धता सबसे बड़ी समस्या है। बच्चों के पास जब मोबाइल ही नहीं होगा तो वे ऑनलाइन कक्षाओं तक जुडे़ंगे कैसे।
माध्यमिक शिक्षक संघ चंदेल गुट के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार को पहले मोबाइल फोन की व्यवस्था करनी चाहिए।
बच्चों के पास मोबाइल है या नहीं इस बात का डाटा जुटाना चाहिए। बगैर पूरी तैयारी के ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ छात्रों तक कैसे पहुंचेगा।
तमाम छात्र जो मोबाइल न होने के कारण पढ़ाई से दूर हो जाएंगे उनके भविष्य को लेकर सरकार को अपना रवैया स्पष्ट करना चाहिए।
प्रधानाचार्य परिषद के जिला महामंत्री एवं सनातन धर्म इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य संजय शर्मा ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में ऑनलाइन पढ़ाई ही बेहतर विकल्प है।
सभी छात्र छात्राओं एवं अभिभावकों को इसमें सहयोग करना चाहिए। कहीं-कहीं समस्या हो सकती है। इसके लिए कोई न कोई हल भी निकाला जाएगा।
ऑनलाइन पढ़ाई के प्रयोग के पहले चरण में विभाग ने जिले में सर्वे करवाया था। इसमें 76210 छात्र-छात्राओं में से महज 26000 ने अपने संपर्क के लिए अभिभावकों या पड़ोसियों के मोबाइल नंबर नोट करवाए थे।
विभाग ने इन नंबरों के आधार पर 26000 छात्रों के पास स्मार्ट फोन की उपलब्धता दिखाकर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। नतीजा यह हुआ कि ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई तो केवल 30 फीसदी बच्चे ही इससे जुड़ पाए थे।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजू राणा ने कहा कि 15 जुलाई से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू होनी हैं। इसके लिए सभी प्रधानाचार्य इन कार्य दिवसों में तैयारियां पूरी कर लें। सभी विषय अध्यापक अपने-अपने विषयों से संबंधित पाठ्यक्रम सरल भाषा में तैयार कर लें। यदि कहीं कोई दिक्कत हो निसंकोच उनसे संपर्क कर सकते हैं।
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लेकिन, ग्रामीण इलाकों से जुड़े जिले के 70 फीसदी छात्रों के पास लैपटॉप, टैबलेट तो दूर स्मार्ट फोन तक नहीं है। यही वजह है कि लॉकडाउन के दूसरे चरण में ऑनलाइन पढ़ाई का प्रयोग जिले में फेल साबित हो चुका है।
अभिभावकों का कहना है कि एक बार फिर विभाग बिना सुविधा मुहैया करवाए इस व्यवस्था को लागू करके बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है।
लॉकडाउन के दौरान अप्रैल के महीने में भी माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा चुकी है। वह भी ज्यादा सफल नहीं हो सकी।
उस समय तो छात्र-छात्राओं के अभिभावक घरों में ही थे। ऐसी स्थिति में मोबाइल घरों में ही थे। उस वक्त भी 30 से 35 प्रतिशत बच्चों तक ही ऑनलाइन पढ़ाई की पहुंच हो सकी थी।
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सबसे बड़ी समस्या यह है कि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चों के पास मोबाइल नहीं हैं। गांवों में नेटवर्किंग की समस्या अलग से है।
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अब 15 जुलाई से फिर से ऑनलाइन पढ़ाई होगी।
ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के सामने आएगी। अब अभिभावक भी घरों से बाहर निकलकर काम पर जाने लगे हैं।
ऐसे में स्मार्ट फोन की उपलब्धता सबसे बड़ी समस्या है। बच्चों के पास जब मोबाइल ही नहीं होगा तो वे ऑनलाइन कक्षाओं तक जुडे़ंगे कैसे।
माध्यमिक शिक्षक संघ चंदेल गुट के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार को पहले मोबाइल फोन की व्यवस्था करनी चाहिए।
बच्चों के पास मोबाइल है या नहीं इस बात का डाटा जुटाना चाहिए। बगैर पूरी तैयारी के ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ छात्रों तक कैसे पहुंचेगा।
तमाम छात्र जो मोबाइल न होने के कारण पढ़ाई से दूर हो जाएंगे उनके भविष्य को लेकर सरकार को अपना रवैया स्पष्ट करना चाहिए।
प्रधानाचार्य परिषद के जिला महामंत्री एवं सनातन धर्म इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य संजय शर्मा ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में ऑनलाइन पढ़ाई ही बेहतर विकल्प है।
सभी छात्र छात्राओं एवं अभिभावकों को इसमें सहयोग करना चाहिए। कहीं-कहीं समस्या हो सकती है। इसके लिए कोई न कोई हल भी निकाला जाएगा।
ऑनलाइन पढ़ाई के प्रयोग के पहले चरण में विभाग ने जिले में सर्वे करवाया था। इसमें 76210 छात्र-छात्राओं में से महज 26000 ने अपने संपर्क के लिए अभिभावकों या पड़ोसियों के मोबाइल नंबर नोट करवाए थे।
विभाग ने इन नंबरों के आधार पर 26000 छात्रों के पास स्मार्ट फोन की उपलब्धता दिखाकर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। नतीजा यह हुआ कि ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई तो केवल 30 फीसदी बच्चे ही इससे जुड़ पाए थे।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजू राणा ने कहा कि 15 जुलाई से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू होनी हैं। इसके लिए सभी प्रधानाचार्य इन कार्य दिवसों में तैयारियां पूरी कर लें। सभी विषय अध्यापक अपने-अपने विषयों से संबंधित पाठ्यक्रम सरल भाषा में तैयार कर लें। यदि कहीं कोई दिक्कत हो निसंकोच उनसे संपर्क कर सकते हैं।