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Etawah News: पूंछ कटने के 52 दिन बाद शेरनी राधिका ने तोड़ा दम
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इटावा। सफारी पार्क में करीब दो महीने से जिंदगी के लिए जूझ रही करीब नौ वर्षीय शेरनी राधिका ने सोमवार सुबह साढ़े चार बजे दम तोड़ दिया। वह पूंछ कटने के बाद से बीमार चल रही थी। 15 दिनों से शेरनी ने खाना भी छोट दिया था।
बता दें कि आठ जुलाई को शेरनी नीरजा ने उसकी पूंछ काट ली थी। इसके बाद से राधिका का लगातार इलाज चल रहा था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव के निर्देश पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा से विशेषज्ञों को बुलाया गया था। संक्रमण की आशंका को देखते हुए विशेषज्ञों की सलाह पर उसकी पूंछ को काटकर छोटा किया था। इलाज के दौरान राधिका ने कई बार अपनी पूंछ को खुद भी काटने का प्रयास किया था। वह बार-बार अपनी पूंछ पर बैठ जाती थी, जिससे तीन बार टांके भी टूट गए थे। सफारी प्रशासन की ओर से उसकी लगातार निगरानी की जाती रही और उपचार जारी रखा गया, लेकिन उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका था। बीमार होने की वजह से उसने 15 दिनों से खाना भी छोड़ दिया था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव के निर्देश पर राधिका के शव का चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया था। प्रथम दृष्टया अत्यधिक कमजोर होने के कारण मल्टी ऑर्गन फेल्योर से मौत की आशंका जताई गई है। पोस्टमार्टम के दौरान उसके पेट और आंतों में काफी मात्रा में हवा और गैस भी मिली। निदेशक डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए विसरा सुरक्षित कर लिया गया है। इसे जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
राधिका को वर्ष 2019 में गुजरात से इटावा सफारी पार्क लाया गया था। सफारी प्रशासन के अनुसार, शारीरिक अक्षमता और असामान्य व्यवहार के कारण उसे कभी पर्यटकों के दीदार के लिए नहीं खोला गया। कुनबा बढ़ाने के लिए ब्रीडिंग में भी उसका इस्तेमाल नहीं किया गया था। नीरजा द्वारा पूंछ काटे जाने के बाद उसने कई बार खुद भी पूंछ को काटने का प्रयास किया था।
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बता दें कि आठ जुलाई को शेरनी नीरजा ने उसकी पूंछ काट ली थी। इसके बाद से राधिका का लगातार इलाज चल रहा था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव के निर्देश पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा से विशेषज्ञों को बुलाया गया था। संक्रमण की आशंका को देखते हुए विशेषज्ञों की सलाह पर उसकी पूंछ को काटकर छोटा किया था। इलाज के दौरान राधिका ने कई बार अपनी पूंछ को खुद भी काटने का प्रयास किया था। वह बार-बार अपनी पूंछ पर बैठ जाती थी, जिससे तीन बार टांके भी टूट गए थे। सफारी प्रशासन की ओर से उसकी लगातार निगरानी की जाती रही और उपचार जारी रखा गया, लेकिन उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका था। बीमार होने की वजह से उसने 15 दिनों से खाना भी छोड़ दिया था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव के निर्देश पर राधिका के शव का चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया था। प्रथम दृष्टया अत्यधिक कमजोर होने के कारण मल्टी ऑर्गन फेल्योर से मौत की आशंका जताई गई है। पोस्टमार्टम के दौरान उसके पेट और आंतों में काफी मात्रा में हवा और गैस भी मिली। निदेशक डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए विसरा सुरक्षित कर लिया गया है। इसे जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
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राधिका को वर्ष 2019 में गुजरात से इटावा सफारी पार्क लाया गया था। सफारी प्रशासन के अनुसार, शारीरिक अक्षमता और असामान्य व्यवहार के कारण उसे कभी पर्यटकों के दीदार के लिए नहीं खोला गया। कुनबा बढ़ाने के लिए ब्रीडिंग में भी उसका इस्तेमाल नहीं किया गया था। नीरजा द्वारा पूंछ काटे जाने के बाद उसने कई बार खुद भी पूंछ को काटने का प्रयास किया था।
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