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आमदापुर घाट पर बना पांटून पुल
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चकरनगर। ग्राम पंचायत भरेह की आमदापुर यमुना नदी के घाट पर पैंटून पुल बनने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। लोक निर्माण विभाग ने पैंटून पुल बनवाया है। पुल की लंबाई लगभग 350 फीट है। यह पुल इटावा और औरैया को जोड़ता है। पुल के बनने से करीब 50 गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिली है।
इटावा और औरैया को जोड़ने के लिए आमदापुर यमुना नदी पर हर साल पीपे का पुल बनाया जाता है। जो आमदापुर घाट से औरैया के कैथोली गांव में उतरता है। हर साल बारिश में पुल डूबकर टूट जाता है। जिसे दीपावली के बाद बनवाया जाता था। लेकिन इस साल चंबल सेंक्चुअरी की आपत्ति पर इसे नहीं बनवाया गया था। अमर उजाला ने पुल न बनने से लोगों को हो रही दिक्कत की खबर 20 दिसंबर 2020 को प्रकाशित की थी। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग ने पुल बनाना शुरू कर दिया था। जो अब चालू हो चुका है। इससे इटावा के 30 और औरैया के करीब 20 गांवों को राहत मिली है।
पुल न बनता तो 20 किमी चक्कर लगाते
इटावा के चकरपुरा, पथर्रा, हरपुरा, गढ़ाकासदा, कायची, भरेह, निदी, हरौली समेत 30 गांवों के ग्रामीण इस पुल का इस्तेमाल औरैया जाने के लिए करते हैं। लगभग इतने ही गांवों के ग्रामीण औरैया से इटावा आते हैं। यदि पुल न बनता तो उन्हें 20 किलोमीटर का चक्कर लगाकर अजीतमल से जाना पड़ता है। साथ ही इटावा में आमदापुर घाट से एक किलोमीटर दूर बने सुप्रसिद्ध भारेश्वर शिवालय में हजारों लोग इसी पुल के माध्यम से औरैया से रोज आते-जाते हैं। इस पुल पर चार पहिए, अनलोड ट्रैक्टर और दो पहिया वाहन गुजरते हैं। पुल बनने से भरेह के हेम रुद्र प्रताप सिंह सेंगर, विनोद सिंह सेंगर, सरमन सिंह सेंगर आदि ने खुशी जताई है।
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इटावा और औरैया को जोड़ने के लिए आमदापुर यमुना नदी पर हर साल पीपे का पुल बनाया जाता है। जो आमदापुर घाट से औरैया के कैथोली गांव में उतरता है। हर साल बारिश में पुल डूबकर टूट जाता है। जिसे दीपावली के बाद बनवाया जाता था। लेकिन इस साल चंबल सेंक्चुअरी की आपत्ति पर इसे नहीं बनवाया गया था। अमर उजाला ने पुल न बनने से लोगों को हो रही दिक्कत की खबर 20 दिसंबर 2020 को प्रकाशित की थी। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग ने पुल बनाना शुरू कर दिया था। जो अब चालू हो चुका है। इससे इटावा के 30 और औरैया के करीब 20 गांवों को राहत मिली है।
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पुल न बनता तो 20 किमी चक्कर लगाते
इटावा के चकरपुरा, पथर्रा, हरपुरा, गढ़ाकासदा, कायची, भरेह, निदी, हरौली समेत 30 गांवों के ग्रामीण इस पुल का इस्तेमाल औरैया जाने के लिए करते हैं। लगभग इतने ही गांवों के ग्रामीण औरैया से इटावा आते हैं। यदि पुल न बनता तो उन्हें 20 किलोमीटर का चक्कर लगाकर अजीतमल से जाना पड़ता है। साथ ही इटावा में आमदापुर घाट से एक किलोमीटर दूर बने सुप्रसिद्ध भारेश्वर शिवालय में हजारों लोग इसी पुल के माध्यम से औरैया से रोज आते-जाते हैं। इस पुल पर चार पहिए, अनलोड ट्रैक्टर और दो पहिया वाहन गुजरते हैं। पुल बनने से भरेह के हेम रुद्र प्रताप सिंह सेंगर, विनोद सिंह सेंगर, सरमन सिंह सेंगर आदि ने खुशी जताई है।
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