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डीएम समेत कई अफसर, पैदल पहुंचे दफ्तर

Sat, 02 Jan 2016 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा Updated Sat, 02 Jan 2016 12:15 AM IST
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DM , including officers , on foot office
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल करते हुए डीएम नितिन बंसल समेत जिले के कई अफसरों ने शुक्रवार को घर से दफ्तर तक का रास्ता पैदल तय किया। दो अधिकारियों ने तो पूरे दिन वाहन का इस्तेमाल नहीं किया। डीएम समेत कई आला अफसरों के पैदल दफ्तर आने से कुछ कर्मचारियों ने भी इसका अनुकरण किया और पैदल या साइकिल से आते जाते दिखे।
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नए साल के पहले दिन प्रशासन की इस अनूठी पहल को सभी ने सराहा। वहीं, सीएमओ अपने सरकारी वाहन से कचहरी पहुंचे। दरअसल बीते दिनों इटावा महोत्सव पंडाल में पर्यावरण छात्र संसद के नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें छात्र-छात्राओं ने जनहित से जुड़े 11 प्रस्ताव रखे थे, जिनपर डीएम नितिन बंसल ने अपनी मंजूरी प्रदान की थी।
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उन्हीं प्रस्तावों में एक प्रस्ताव शुक्रवार के दिन वाहन का प्रयोग न करने को लेकर था। इस पर नए साल के पहले दिन अमल किया गया। इसके तहत डीएम नितिन बंसल सुबह तकरीबन 10 बजे अपने आवास से निकले और पैदल चलते हुए कचहरी स्थित अपने दफ्तर पहुंचे।
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उनके साथ सहायक बचत निदेशक प्रभात मिश्रा, डीडीओ विनोद चंद्र यादव, डीडी कृषि एसपी सिंह आदि कई अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी रहे। एडीएम ईश्वर चंद्र व सिटी मजिस्ट्रेट रजनीश राय भी अपने सरकारी आवास से पैदल दफ्तर पहुंचे। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी रजनीश पांडेय व बिजली विभाग के राजेश ग्रोवर ने वाहनों का इस्तेमाल नहीं किया।



जबकि अन्य कई अधिकारी दफ्तर तो पैदल पहुंचे, लेकिन बाद में उन्होंने वाहन मंगा लिए थे। उधर, सीएमओ डॉ. राज कुुमार नैय्यर ने छात्र संसद की इस पहल की अनदेखी की। वह अपने सरकारी वाहन से कचहरी पहुंचे। उनसे इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने मजबूरी जताई और बोले कि तमाम जगह आना-जाना होता है।



 ऐसे में पैदल चलना मुमकिन नहीं है। उधर, डीएम नितिन बंसल का इस बाबत कहना है कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह बेहतर कदम है। सभी अधिकारियों को स्वैच्छिक तौर पर इसे दिनचर्या में अपनाना चाहिए, जिससे आम जनमानस तक सकारात्मक संदेश पहुंचे।




पर्यावरण छात्र संसद के संस्थापक सहायक बचत निदेशक प्रभात मिश्र ने कहा कि यह पहल गत वर्ष शुरू हुई थी। पिछले वर्ष भी छात्र संसद का आयोजन हुआ था। इस बार इसमें सप्ताह में एक दिन वाहन का प्रयोग न करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे मंजूर कर लिया गया।
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