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केबल टूटने से लगा करंट, युवक की मौत
अमर उजाला ब्यूरो। इटावा
Updated Tue, 08 Aug 2017 11:34 PM IST
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मजदूर की करंट लगने से मौत के बाद रास्ता अवरुद्ध किए ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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इटावा(ब्यूरो)। फ्रेंड्स कालोनी के मोहल्ला अड्डा पाय में घर के बाहर निकलते समय केबिल टूटकर गिरने से करंट लगने से युवक की मौत हो गई। अड्डापाय निवासी भगवान दास कुशवाहा (30) पुत्र राज कुमार सोमवार शाम घर से दुकान जा रहा था। घर के बाहर केबिल टूटकर उस पर जा गिरी। करंट लगने से वह जमीन पर गिर पड़ा। उसे गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
विक्रमपुर निवासी शिशुपाल की मौत के बाद हुआ बवाल बिजली विभाग की लापरवाही की वजह से हुआ। इस इलाके में आए दिन हाईटेंशन तार टूटते रहते हैं। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की, लेकिन विभाग की ओर से नजरअंदाज कर दिया गया। दूसरी तरफ मजदूर की मौत के बाद रास्ता जाम करने वालों के पास पहुंची पुलिस ने लोगों की बात सुनने के बजाय बल प्रयोग कर दिया। लाठी फटकारते ही लोग आग बबूला हो गए और पथराव कर दिया।
रास्ता जाम करने वाले ग्रामीणों का आरोप है कि शिशुपाल बेहद गरीब है। उसके पास खेती बाड़ी भी नहीं है। इस वजह से वे मुआवजा के मांग कर रहे थे। शव रखकर चौराहे के पास जाम लगा दिया। जाम लगने से यातायात बंद हो गया। जाम लगने की सूचना मिलने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लाठी फटकार कर खदेड़ने की कोशिश की। ग्रामीणों ने बताया कि सोमवार शाम को भी एक तार टूटकर गिर गया था। इस तार को जुड़वाया नहीं गया था कि मंगलवार को दोबारा टूट गया और मजदूर की मौत हो गई।
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कैसे होगा परिवार का भरण पोषण
इटावा। बिजली का करंट लगने से मौत का शिकार हुआ शिशुपाल सिंह मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था। पैतिृक गांव में काम धंधा न होने के कारण वह परिवार सहित अपनी सुसराल में ओर बस गया था ताकि यहा पर मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण कर सके । उसके परिवार में पत्नी शारदा के पुत्र अक्षय के अलावा पुत्री पूनम, रजनी, काजल, बब्ली व शिल्पी हैं। अभी किसी की शादी भी नहीं हुई है।
पिता की मौत के बाद बच्चियों का रो रो कर बुरा हाल है। पूनम ने बताया कि उसके पापा ही पूरे परिवार का भरण पोषण करते थे। वह रोजाना कोल्ड स्टोर में जाकर मजदूरी करते थे मजदूरी के बाद ही उसके घर पर खाना बनता था। अब उसके परिवार के सामन रोजी रोटी का संकट खडा हो गया है। गांव के लोग परिजनों को ढाढस बंधा रहे थे लेकिन उनके आंसू रूकने का नाम नही ले रहे थे। वह कहती है कि वह जानती तो आज पापा को नही जाने देती। वही पत्नी शारदा की हालत खराब थी।
शिकायतों के बाद भी अधिकारियो ने नहीं की सुनवाई
इटावा। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में विक्रमपुर में लगे बिजली के तार काफी जर्जर हालत में है। तारों को सही कराने के लिए कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन किसी भी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया।
बच्चे बाहर होते तो हो सकता था बड़ा हादसा
इटावा। जिस जगह पर तार टूटने की घटना हुई उससे थेडी ही दूर पर प्राथमिक विद्यालय है। चूकि उस समय स्कूल का समय हो चुका था बच्चे स्कूल मे ंजाकर बैठ गए थे। चूंकि बच्चों के स्कूल जाने की वही रास्ता है। यदि तार थोउी देर पहले हुआ होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। लोगों ने बताया कि इसी रास्ते से स्कूली बच्चे जाते है। गलीमत तो यह रही कि उस समय कोई बच्चा रास्ते से नही गुजर रहा था। नही तो वह भी उसकी चपेट में आ सकते थे।
प्रभारी निरीक्षक ने दिखाई मानवता
इटावा। एक तरफ तो पुलिस जाम लगाने वालों को लाठियां मारकर खदेड़ रही थी। प्रभारी निरीक्षक हेमंत राय भी जाम खुलवाने में सख्ती दिखा रहे थे। वहीं भगदड़ एवं अफरा तफरी के बीच एक महिला अपने तीन छोटे छोटे बच्चों को लेकर फंस गई। चारों ओर भगदड़ देखकर बच्चे बुरी तरह से डर गये। बच्चों ने रोना शुरू कर दिया।
महिला की कुछ समझ में नहीं आ रहा था। वह किधर जाए। इस पर प्रभारी निरीक्षक सिविल लाइन हेमंत राय की नजर महिला के रोते हुए बच्चों पर पड़ी। उन्होंने महिला और बच्चों को भीड़ से किनारे किया। सबसे छोटे बच्चे को जमीन को उठाकर अपनी गोद में खिलाया। उसे पुचकारा। बच्चे को चुप कराने केबाद महिला को साैंप दिया।
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विक्रमपुर निवासी शिशुपाल की मौत के बाद हुआ बवाल बिजली विभाग की लापरवाही की वजह से हुआ। इस इलाके में आए दिन हाईटेंशन तार टूटते रहते हैं। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की, लेकिन विभाग की ओर से नजरअंदाज कर दिया गया। दूसरी तरफ मजदूर की मौत के बाद रास्ता जाम करने वालों के पास पहुंची पुलिस ने लोगों की बात सुनने के बजाय बल प्रयोग कर दिया। लाठी फटकारते ही लोग आग बबूला हो गए और पथराव कर दिया।
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रास्ता जाम करने वाले ग्रामीणों का आरोप है कि शिशुपाल बेहद गरीब है। उसके पास खेती बाड़ी भी नहीं है। इस वजह से वे मुआवजा के मांग कर रहे थे। शव रखकर चौराहे के पास जाम लगा दिया। जाम लगने से यातायात बंद हो गया। जाम लगने की सूचना मिलने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लाठी फटकार कर खदेड़ने की कोशिश की। ग्रामीणों ने बताया कि सोमवार शाम को भी एक तार टूटकर गिर गया था। इस तार को जुड़वाया नहीं गया था कि मंगलवार को दोबारा टूट गया और मजदूर की मौत हो गई।
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कैसे होगा परिवार का भरण पोषण
इटावा। बिजली का करंट लगने से मौत का शिकार हुआ शिशुपाल सिंह मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था। पैतिृक गांव में काम धंधा न होने के कारण वह परिवार सहित अपनी सुसराल में ओर बस गया था ताकि यहा पर मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण कर सके । उसके परिवार में पत्नी शारदा के पुत्र अक्षय के अलावा पुत्री पूनम, रजनी, काजल, बब्ली व शिल्पी हैं। अभी किसी की शादी भी नहीं हुई है।
पिता की मौत के बाद बच्चियों का रो रो कर बुरा हाल है। पूनम ने बताया कि उसके पापा ही पूरे परिवार का भरण पोषण करते थे। वह रोजाना कोल्ड स्टोर में जाकर मजदूरी करते थे मजदूरी के बाद ही उसके घर पर खाना बनता था। अब उसके परिवार के सामन रोजी रोटी का संकट खडा हो गया है। गांव के लोग परिजनों को ढाढस बंधा रहे थे लेकिन उनके आंसू रूकने का नाम नही ले रहे थे। वह कहती है कि वह जानती तो आज पापा को नही जाने देती। वही पत्नी शारदा की हालत खराब थी।
शिकायतों के बाद भी अधिकारियो ने नहीं की सुनवाई
इटावा। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में विक्रमपुर में लगे बिजली के तार काफी जर्जर हालत में है। तारों को सही कराने के लिए कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन किसी भी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया।
बच्चे बाहर होते तो हो सकता था बड़ा हादसा
इटावा। जिस जगह पर तार टूटने की घटना हुई उससे थेडी ही दूर पर प्राथमिक विद्यालय है। चूकि उस समय स्कूल का समय हो चुका था बच्चे स्कूल मे ंजाकर बैठ गए थे। चूंकि बच्चों के स्कूल जाने की वही रास्ता है। यदि तार थोउी देर पहले हुआ होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। लोगों ने बताया कि इसी रास्ते से स्कूली बच्चे जाते है। गलीमत तो यह रही कि उस समय कोई बच्चा रास्ते से नही गुजर रहा था। नही तो वह भी उसकी चपेट में आ सकते थे।
प्रभारी निरीक्षक ने दिखाई मानवता
इटावा। एक तरफ तो पुलिस जाम लगाने वालों को लाठियां मारकर खदेड़ रही थी। प्रभारी निरीक्षक हेमंत राय भी जाम खुलवाने में सख्ती दिखा रहे थे। वहीं भगदड़ एवं अफरा तफरी के बीच एक महिला अपने तीन छोटे छोटे बच्चों को लेकर फंस गई। चारों ओर भगदड़ देखकर बच्चे बुरी तरह से डर गये। बच्चों ने रोना शुरू कर दिया।
महिला की कुछ समझ में नहीं आ रहा था। वह किधर जाए। इस पर प्रभारी निरीक्षक सिविल लाइन हेमंत राय की नजर महिला के रोते हुए बच्चों पर पड़ी। उन्होंने महिला और बच्चों को भीड़ से किनारे किया। सबसे छोटे बच्चे को जमीन को उठाकर अपनी गोद में खिलाया। उसे पुचकारा। बच्चे को चुप कराने केबाद महिला को साैंप दिया।