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सैफई मिनी पीजीआई में मेडिकल छात्रों ने किया बवाल

Fri, 15 Sep 2017 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा Updated Fri, 15 Sep 2017 11:48 PM IST
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Medical students in Saifei Mini PGI done
सैफई आयुर्विज्ञान विवि के एडमिन ब्लॉक में तोड़फोड़ के बाद टूटे गमले एवं शीशे। - फोटो : amarujala

सैफई (इटावा)।  सैफई स्थित मिनी पीजीआई में भर्ती एमबीबीएस छात्र की मां के  इलाज में लापरवाही का आरोप लगा  छात्रों एवं जूनियर डाक्टरों ने शुक्रवार को जमकर बवाल किया। डंडे-हॉकी लेकर निकले एडमिन ब्लॉक एवं कुलपति कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की। कुलपति कार्यालय में घुसकर सोफे, कुर्सियां, कंप्यूटर, फोन एवं शीशे आदि तोड़ दिए। कुलपति ने अपने कार्यालय में बने केबिन में छिपकर जान बचाई। वह करीब दो घंटे तक वहीं छिपे रहे। उनका गुस्सा इतने से भी शांत नहीं हुआ तो वे कुलपतिआवास पहुंचे और वहां भी तोड़फोड़ की। इसके बाद एडमिन ब्लाक के पास बने सांई मंदिर परिसर में धरने पर बैठ गए और कुलपति को हटाने की मांग करने लगे। अपर पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। कुलपति एवं वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत के बाद आगे की कार्रवाई के बारे में निर्णय लिया जाएगा।

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औरैया निवासी एमबीबीएस छात्र दिग्विजय सिंह की मां मनीषा देवी को गुरुवार को मिनी पीजीआई के चिकित्सा वार्ड में भर्ती कराया गया था। उनको फेफड़े में संक्रमण की शिकायत थी। पहले दिन इलाज शुरू हुआ। ब्लड के लिए कुलपति के पास गया। पहले से उसे फटकार मिली और बाद में कुलपति ने आदेश किया। इसके बाद भी ब्लड बैंक से ब्लड नहीं मिला। इसी बीच शुक्रवार को मनीषा देवी की मौत हो गई। छात्र की मां की मौत की सूचना मिलते ही करीब 200 छात्र व जूनियर डाक्टर दोपहर करीब दो बजे एडमिन ब्लॉक में कुलपति बिग्रेडियर टी प्रभाकर के कार्यालय पर तोड़फोड़ शुरू कर दी। कुलपति ने कार्यालय के अंदर बने केबिन में छिपकर अपनी जान बचाई। उन्होंने केबिन को अंदर से बंद कर लिया।
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इसके बाद छात्रों ने कुलपति के आवास पर जाकर उनकी सरकारी गाड़ी को पलट दिया। एसडीएम सैफई सिद्धार्थ, एएसपी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसओ महेशवीर सिंह पुलिस बल के साथ पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को समझाया। इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्र धरने पर बैठ गए। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके गुप्ता ने छात्रों के इलाज में लापरवाही के आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने दिग्विजय की मां को खुद जाकर देखा था। सभी आवश्यक चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई थीं। ब्लड न देने का आरोप बिल्कुल गलत है। कुलपति की ओर से अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। फिलहाल देर शाम तक इस मामले में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।
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 दो घंटे तक केबिन में छुपे रहे कुलपति
सैफई।  बवाल देख कुलपति बिग्रेडियर टी प्रभाकर ने केबिन में घुसकर अंदर से बंद कर लिया। जूनियर डॉक्टरों के इस रूप को देखकर कर्मचारी भी भौचक रह गए। कुलपति ने  किसी तरीक से छिपकर अपनी जान बचाई। कुलपति करीब दो घंटे तक अपनी केबिन में ही बंद रहे।

केबिन से ही उन्होंने ड्राइवर से फोन करके गाड़ी ले आने को कहा। ड्राइवर ने जैसे ही गाड़ी स्टार्ट की। छात्रों ने उसे घेर लिया। गाड़ी को पलट दिया। गाड़ी के शीशे तोड़ दिए। इसके बाद आवास पर पथराव शुरू कर दिया। आवास पर उनकी पत्नी मौजूद थी। वह सहम गईं। कुलपति आवास पर तैनात सुरक्षा गार्ड रामकिशन यादव का कहना है की गाड़ी आ रही थी। उन्होंने कुलपति को  समझते हुए गेट खोल दिया।  तब तक पीछे से 200 छात्र पहुंचे और कुलपति  को मारने की धमकी देते हुए तोड़फोड़ करने लगे।


ये है मामला  
दिग्विजय सिंह 2016-17 बैच का  एमबीबीएस  छात्र है। उनकी  मां  मनीषा बृहस्पतिवार को मेडिकल कालेज में भर्ती हुई। डॉक्टरों ने उन्हें ब्लड की जरूरत बताई थी। शुक्रवार को छात्र दिग्विजय सिंह कुलपति के पास ब्लड के लिए गया। आरोप है कि कुलपति ने उसे पहले डांट दिया और फिर ब्लड दिलाने का आदेश कर दिया। ब्लड बैंक में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ने ब्लड देने से मना कर दिया। इसी बीच छात्र की माता की मृत्यु हो गई। मृत्यु होने के बाद छात्र दिग्विजय सिंह रोता हुआ कुलपति के पास आया और बताया कि ब्लड नहीं मिलने से उसकी मां की मौत हो गई। फिर वह रोता हुआ हॉस्टल में गया और अपने साथियों को पूरी बात बताई। वहां से करीब दो सौ छात्रों एवं जूनियर डाक्टरों के साथ फिर कुलपति के पास पहुंचे। कुलपति ने बाहर निकलने का आदेश दिया। इसी बात पर उनका गुस्सा फूट पड़ा। एमबीबीएस छात्रों का कहना है हर साल ब्लड डोनेशन होता है। हमारे सभी साथी ब्लड देते हैं। ब्लड देने के बाद प्रमाण पत्र भी दिया जाता है । हम लोगों ने प्रमाण पत्र भी दिखाया था पर उसके बाद भी ब्लड नहीं दिया गया।

 

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