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चकरनगर में बालू का अवैध खनन, अधिकारी चुप
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Tue, 21 Feb 2017 10:51 PM IST
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अवैध खनन से एकत्र रेत का लदान सहित खड़े ट्रैक्टर।
- फोटो : amarujala
यूपी और एमपी की सीमा में पड़ने वाले तहसील चकरनगर क्षेत्र में अवैध रूप से बालू का खनन हो रहा है। इससे सरकार को लाखों रुपये राजस्व की क्षति हो रही है। लेकिन खनन माफियाओं पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। मामले में खनन अधिकारी भी चुप्पी साधे बैठे हैं। चकरनगर क्षेत्र में सिंधु नदी से बड़े पैमाने पर जेसीबी से खनन किया जा रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि अवैध खनन में पुलिस और विभागीय अधिकारी भी शामिल हैं।
विरोध करने पर माफियाओं के गुर्गे धमकी देते हैं। इस कारोबार में दो जेसीबी मशीनें, 40 ट्रक और 90 ट्रैक्टर लगे हैं। नदी से खनन की गई बालू जंगल के रास्ते ट्रैक्टरों से बल्लो की गढ़िया, भिंड मार्ग के किनारे मारकंडेय नामक स्थान पर डाली जाती है। फिर यहां से ट्रकों से लखना, सिंडौस मार्ग से यूपी के विभिन्न स्थानों पर पहुंचाई जाती है। लोगों का कहना है कि खुलेआम हो रहे खनन के बदले पुलिस 1500 रुपये प्रति ट्रक और 300 रुपये प्रति ट्रैक्टर वसूल करती है।
रात में 40 ट्रक और 90 ट्रैक्टर इन मार्गों से गुजरते हैं। लेकिन प्रशासन अनजान बना है। इस संबंध में खनन अधिकारी इटावा ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
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विरोध करने पर माफियाओं के गुर्गे धमकी देते हैं। इस कारोबार में दो जेसीबी मशीनें, 40 ट्रक और 90 ट्रैक्टर लगे हैं। नदी से खनन की गई बालू जंगल के रास्ते ट्रैक्टरों से बल्लो की गढ़िया, भिंड मार्ग के किनारे मारकंडेय नामक स्थान पर डाली जाती है। फिर यहां से ट्रकों से लखना, सिंडौस मार्ग से यूपी के विभिन्न स्थानों पर पहुंचाई जाती है। लोगों का कहना है कि खुलेआम हो रहे खनन के बदले पुलिस 1500 रुपये प्रति ट्रक और 300 रुपये प्रति ट्रैक्टर वसूल करती है।
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रात में 40 ट्रक और 90 ट्रैक्टर इन मार्गों से गुजरते हैं। लेकिन प्रशासन अनजान बना है। इस संबंध में खनन अधिकारी इटावा ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।