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बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्यों के खिलाफ रिपोर्ट
Updated Thu, 21 Dec 2017 10:13 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
इटावा। सिटी मजिस्ट्रेट ने गुरुवार को सिविल लाइन थाने में बाल कल्याण समिति अध्यक्ष व चार सदस्यों के खिलाफ मानव तस्करी, धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। मामला लावारिस मिले नवजात को बेचने का बताया जा रहा है।
जसवंत नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत सेंगर नदी के किनारे आठ मार्च को दस दिन का नवजात शिशु मिला था। मौके पर पहुंची पुलिस ने नवजात को उठाया। बाल कल्याण समिति ने उसे बच्चे को पुलिस से लेकर इटावा शहर निवासी प्रियंका जैन पत्नी सचिन जैन को दे दिया। कुछ समय बाद समिति ने नवजात को जैन दंपति से ले लिया। इस पर प्रियंका जैन से डीएम से नवजात वापस लेने की शिकायत की। उनका आरोप था कि समिति के पदाधिकरियों ने बच्चे को किसी को रुपया लेकर बेच दिया। डीएम ने इस शिकायत की जांच कराई । जांच के बाद उन्हाेंने सिटी मजिस्ट्रेट शमशाद हुसैन को बाल कल्याण समिति के पदाधिकरियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए। सिटी मजिस्ट्रेट ने गुरुवार को सिविल लाइन थाने में समिति के अध्यक्ष एके बाजपेई, सदस्य सूरज भान, देश कुमारी, प्रदीप कुमार , धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। यह रिपोर्ट मानव तस्करी, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज की गई है। सीओ सिटी अंजनि कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। वही समिति के सदस्य सूरज भान ने बताया कि लावारिस बच्चे को प्रियंका जैन को देखरेख के लिए सौपा गया था। लेकिन लखनऊ में केंद्रीय दत्तक अभिकरण की बैठक में निर्देश दिए गये थे कि इस तरह से बच्चों को गोद देने का नियम नहीं है। आनलाइन बच्चे को साैंपने के बारे में पूरी जानकारी अपलोड करें। इसके बाद आनलाइन आवेदनों के आधार पर बच्चे की सुपुर्दगी का निर्णय करें। दत्तक अभिकरण की बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर समिति ने बच्चे को 17 नवंबर 2017 को प्रियंका जैन से ले लिया गया था । बाद में बच्चे को 17 नवंबर को ही शिशु गृह मथुुरा भेज दिया गया था। उनका कहना है कि समिति पर साजिशन आरोप लगाए गए है।
- मानव तस्करी में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्यों पर रिपोर्ट
- धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार सहित अन्य कई गंभीर आरोप भी
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इटावा। सिटी मजिस्ट्रेट ने गुरुवार को सिविल लाइन थाने में बाल कल्याण समिति अध्यक्ष व चार सदस्यों के खिलाफ मानव तस्करी, धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। मामला लावारिस मिले नवजात को बेचने का बताया जा रहा है।
जसवंत नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत सेंगर नदी के किनारे आठ मार्च को दस दिन का नवजात शिशु मिला था। मौके पर पहुंची पुलिस ने नवजात को उठाया। बाल कल्याण समिति ने उसे बच्चे को पुलिस से लेकर इटावा शहर निवासी प्रियंका जैन पत्नी सचिन जैन को दे दिया। कुछ समय बाद समिति ने नवजात को जैन दंपति से ले लिया। इस पर प्रियंका जैन से डीएम से नवजात वापस लेने की शिकायत की। उनका आरोप था कि समिति के पदाधिकरियों ने बच्चे को किसी को रुपया लेकर बेच दिया। डीएम ने इस शिकायत की जांच कराई । जांच के बाद उन्हाेंने सिटी मजिस्ट्रेट शमशाद हुसैन को बाल कल्याण समिति के पदाधिकरियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए। सिटी मजिस्ट्रेट ने गुरुवार को सिविल लाइन थाने में समिति के अध्यक्ष एके बाजपेई, सदस्य सूरज भान, देश कुमारी, प्रदीप कुमार , धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। यह रिपोर्ट मानव तस्करी, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज की गई है। सीओ सिटी अंजनि कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। वही समिति के सदस्य सूरज भान ने बताया कि लावारिस बच्चे को प्रियंका जैन को देखरेख के लिए सौपा गया था। लेकिन लखनऊ में केंद्रीय दत्तक अभिकरण की बैठक में निर्देश दिए गये थे कि इस तरह से बच्चों को गोद देने का नियम नहीं है। आनलाइन बच्चे को साैंपने के बारे में पूरी जानकारी अपलोड करें। इसके बाद आनलाइन आवेदनों के आधार पर बच्चे की सुपुर्दगी का निर्णय करें। दत्तक अभिकरण की बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर समिति ने बच्चे को 17 नवंबर 2017 को प्रियंका जैन से ले लिया गया था । बाद में बच्चे को 17 नवंबर को ही शिशु गृह मथुुरा भेज दिया गया था। उनका कहना है कि समिति पर साजिशन आरोप लगाए गए है।
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- मानव तस्करी में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्यों पर रिपोर्ट
- धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार सहित अन्य कई गंभीर आरोप भी