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Etawah News: बाबा के बाद पौत्र निभा रहे रावण की भूमिका
Sun, 11 Oct 2026 11:52 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Sun, 11 Oct 2026 11:52 PM IST
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फोटो 01: बाबा श्याम सिंह यादव। स्रोत स्वयं
बसरेहर। बाबा के बाद रामलीला में पौत्र रावण की भूमिका निभा रहा है। बीते 55 सालों से यह परिवार श्रद्धाभाव से निशुल्क अभिनय और अन्य कार्य करके रामलीला महोत्सव में सक्रिय सहयोग कर रहा है।
श्री रामलीला महोत्सव बसरेहर में इसी कस्बे के श्याम सिंह यादव ने 1970 से लगातार रावण की भूमिका निभाई। इस पात्र के विशेष आकर्षण होने से इन्होंने निशुल्क अभिनय ही नहीं किया बल्कि रावण की पूरी ड्रेस भी निजी तौर पर ली। इस दौरान अन्य लोगों ने रावण का अभिनय किया लेकिन श्रद्धालुओं ने श्याम सिंह यादव के अभिनय की सराहना की। इनकी बुलंद आवाज और चाल आकर्षण का केंद्र रही।
रामलीला में उनका रावण का अभिनय हर बार चर्चा का विषय बना रहा। इसकी वजह से वह गांव समेत आसपास क्षेत्र में होने वाली रामलीला में वह रावण की भूमिका निभाना लगे। वर्ष 1994 में श्याम सिंह के युवा पुत्र का अचानक निधन होने से उन्होंने रावण का अभिनय निभाना बंद कर दिया लेकिन महंत के रूप में रामलीला में अभी भी सपरिवार सहयोग कर रहे हैं।
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बीते पांच वर्षों से इनके अधिवक्ता पौत्र रोहित यादव अपने बाबा की तर्ज पर रावण की भूमिका निभा रहे हैं। वह बाबा की ही तरह अभिनय शैली अपनाकर श्रद्धालुओं की सराहना प्राप्त कर रहे हैं।
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72 सालों से गांव में हो रही रामलीला
रामलीला महोत्सव कस्बा बसरेहर में 1954 से लगातार हर साल मनाया जाता है, इसमें शुरुआत में कस्बा और उसके आसपास के गांवों के लोग निशुल्क अभिनय करते थे, बीते तीन दशक से क्षेत्रीय कलाकारों के अभाव में बाहर से निर्धारित शुल्क पर बाहर से कलाकार बुलाए जाते हैं। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रीय लोगों में रामलीला के प्रति श्रद्धाभाव बरकरार है।
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श्री रामलीला महोत्सव बसरेहर में इसी कस्बे के श्याम सिंह यादव ने 1970 से लगातार रावण की भूमिका निभाई। इस पात्र के विशेष आकर्षण होने से इन्होंने निशुल्क अभिनय ही नहीं किया बल्कि रावण की पूरी ड्रेस भी निजी तौर पर ली। इस दौरान अन्य लोगों ने रावण का अभिनय किया लेकिन श्रद्धालुओं ने श्याम सिंह यादव के अभिनय की सराहना की। इनकी बुलंद आवाज और चाल आकर्षण का केंद्र रही।
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रामलीला में उनका रावण का अभिनय हर बार चर्चा का विषय बना रहा। इसकी वजह से वह गांव समेत आसपास क्षेत्र में होने वाली रामलीला में वह रावण की भूमिका निभाना लगे। वर्ष 1994 में श्याम सिंह के युवा पुत्र का अचानक निधन होने से उन्होंने रावण का अभिनय निभाना बंद कर दिया लेकिन महंत के रूप में रामलीला में अभी भी सपरिवार सहयोग कर रहे हैं।
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बीते पांच वर्षों से इनके अधिवक्ता पौत्र रोहित यादव अपने बाबा की तर्ज पर रावण की भूमिका निभा रहे हैं। वह बाबा की ही तरह अभिनय शैली अपनाकर श्रद्धालुओं की सराहना प्राप्त कर रहे हैं।
72 सालों से गांव में हो रही रामलीला
रामलीला महोत्सव कस्बा बसरेहर में 1954 से लगातार हर साल मनाया जाता है, इसमें शुरुआत में कस्बा और उसके आसपास के गांवों के लोग निशुल्क अभिनय करते थे, बीते तीन दशक से क्षेत्रीय कलाकारों के अभाव में बाहर से निर्धारित शुल्क पर बाहर से कलाकार बुलाए जाते हैं। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रीय लोगों में रामलीला के प्रति श्रद्धाभाव बरकरार है।

फोटो 01: बाबा श्याम सिंह यादव। स्रोत स्वयं