खामोशी से गुजर गया विश्व अस्थमा दिवस

Etawah Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
इटावा। जिले में अस्थमा पीड़ितों की अच्छी खासी संख्या है। इसके बावजूद विश्व अस्थमा दिवस खामोशी के साथ गुजर गया। इस खास दिन को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कहीं कोई जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया, न कहीं उपचार के लिए विशेष चिकित्सा शिविर लगाया गया। हररोज की तरह एक मई को भी जिला अस्पताल सहित सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपने ढर्रे पर खुले और बंद हो गए। यहां तक की अधिकांश चिकित्सकों को भी इस दिन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
नहीं है कोई स्पेशलिस्ट चिकित्सक
जिले में अस्थमा के इलाज की कोई खास व्यवस्था नहीं है। अगर सरकारी अस्पतालों में उपचार की बात कही जाए तो जिला अस्पताल में अस्थमा का कोई स्पेशलिस्ट चिकित्सक नहीं है। न ही इस बीमारी से संबंधित दवाएं उपलब्ध हैं। कुछ महीनों पूर्व से एक प्राइवेट दवा कंपनी के सहयोग से जिला अस्पताल में गुरुवार को स्पेशल दमा क्लीनिक चलती है। मिनी पीजीआई सैफई में इस बीमारी से पीड़ित लोगों को प्रारंभिक इलाज जरूर मिल जाता है।
बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते
बकौल बालरोग विशेषज्ञ डा. नीलेश हर सप्ताह अस्थमा पीड़ित 20 से 25 बच्चे उपचार के लिए पहुंचते हैं। एक सप्ताह में इतनी ही संख्या उम्र दराज मरीजों की भी रहती है। लगातार इस बीमारी के मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है।
क्या है विश्व अस्थमा दिवस
अस्थमा पीड़ित मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या को देखते हुए लोगों में जनजागरूकता पैदा करने के लिए हर वर्ष एक मई को विश्व अस्थमा दिवस के रुप में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य इस बीमारी के संबंध में विशेष चिकित्सा शिविरों का आयोजन करके बीमारी का जांच व उपचार करना है।
क्या है अस्थमा की बीमारी
यह एक आनुवांशिक बीमारी है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की सांस की नलियां की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। बदलते मौसम, धुंआ-मिट्टी, फूलों के पराग, ठंडी हवाओं आदि से नलियों में सूजन आ जाती है जिससे मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। इसके साथ ही यह बीमारी धूल में मौजूद बैक्टीरिया, जानवरों के फर सहित असंतुलित खानपान से होने का खतरा रहता है।
अस्थमा के लक्षण
अस्थमा पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है। इसी के साथ छाती में घबराहट, बार-बार जुकाम होना, गले में सीटी जैसी आवाज आना, लंबे समय से खांसी आना, पसलियां चलना, सीने में दर्द की शिकायत होना आदि लक्षण हैं।
अस्थमा से विश्व में हर वर्ष 1.75 लाख मौतें
इटावा। विश्व अस्थमा दिवस के मौके पर सिप्ला दवा कंपनी के प्रतिनिधियों ने चिकित्सक डा. आरएस सिंह के साथ पत्रकार वार्ता कर बीमारी के संबंध में जानकारी दी। डा. सिंह ने बताया कि अस्थमा गंभीर बीमारी है। प्रतिवर्ष विश्व में एक लाख अस्सी हजार लोग इस बीमारी के कारण मरते हैं। इस बीमारी पर काबू पाना जरूरी है।
श्री सिंह ने बताया कि अस्थमा के लिए इनहेलर्स सबसे अच्छी दवा है। इनहेलर्स से दवा सीधे तकलीफ की जगह पहुंचती है। यह सीरप के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद है। बीमारी से पीड़ित सीधे बैठें, शांति और आराम से रहें। देरी किए बिना अपनी रिलीवर दवा डाक्टर द्वारा बताई गई मात्रा में लें। पांच मिनट के लिए रुके, अगर कोई सुधार न हो तो दोबारा उतनी दवा फिर से लें जितनी डाक्टर ने बताई है। अगर फिर भी राहत न मिले तो चिकित्सक से संपर्क करें।
पीजीआई में जल्द खुलेगी अस्थमा क्लीनिक
सैफई (इटावा)। विश्व अस्थमा दिवस पर उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई में पल्मोनरी मेडिसिन विभाग द्वारा अस्थमा मरीजों की स्पायरोमीटर मशीन से निशुल्क जांच की गई। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. राजेंद्र कुमार ने निकट भविष्य में संस्थान में एलर्जी एवं अस्थमा क्लीनिक खोले जाने की बात कही। उन्होंने बताया कि अस्थमा के इलाज में इंहेलर सबसे उचित व कारगर दवा है। इस अवसर पर पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रभारी डा. आदेश, वरिष्ठ फैकल्टी मेंबर, चिकित्सा अधिकारी आदि उपस्थित रहे।

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