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Etawah News: मिट्टी से मूर्तियां, हुनर से रोजगार गढ़ रहीं अंजलि
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इटावा। ब्लॉक महेवा के बकेवर की अंजलि ने बचपन के शौक को कमाई का जरिया बना लिया। जय मां दुर्गे नाम से स्वयं सहायता समूह बनाकर अंजलि ने मिट्टी की मूर्तियां बनानी शुरू की थी। आज उनके समूह में 10 से अधिक महिलाएं काम रही हैं। बेहतर कार्य करने पर जिला प्रशासन की ओर से अंजलि को सम्मानित किया जा चुका है।
अंजलि को बचपन से पेंटिंग का शौक था। शुरुआत में परिजन पढ़ाई की जगह पेंटिंग करने पर उससे नाराज होते थे लेकिन वह चोरी-छिपे मूर्तियां बनाने लगीं। लोगों ने जब उनके काम की तारीफ की तो परिजन ने विरोध करना छोड़ दिया। मूर्तियों को बेचने के लिए प्लेटफार्म की जरूरत हुई तो उन्होंने जय मां दुर्गे से नाम से स्वयं सहायता समूह शुरू किया। शुरुआत में दिक्कत आई लेकिन धीरे-धीरे काम को सराहना मिलने लगी। क्षेत्र व जिला मुख्यालय पर लगनी वाली प्रदर्शनी में मिट्टी की बनीं मूर्तियों की प्रशंसा हुई। अफसरों ने उनके कार्य की सराहना करते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र दिया। उन्होंने गांव की कई महिलाओं को मिट्टी की मूर्तियां बनाना सिखा दिया। इसके बाद क्षेत्र की कई महिलाएं समूह से जुड़ती चलीं गईं।
मिट्टी से बनी गणेश, लक्ष्मी, खाटू श्याम आदि देवी-देवताओं समेत कई महापुरुषों की मूर्तियां उपलब्ध हैं। इन मूर्तियों की कीमत 50 से लेकर 300 रुपये तक है। मूर्तियों की बढ़ती मांग को देखते हुए काफी संख्या में मूर्तियां तैयार की जा रही हैं।
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वर्जन
अंजलि मिट्टी से देवी-देवताओं समेत महापुरुषों की भी मूर्तियां बना रहीं हैं। उन्होंने कई लोगों को रोजगार दिया है। आने वाले समय में उनकी मूर्तियों को बिक्री के लिए जिले से बाहर भी भेजा जाएगा। -विनय कुमार, उपायुक्त स्वत: रोजगार
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अंजलि को बचपन से पेंटिंग का शौक था। शुरुआत में परिजन पढ़ाई की जगह पेंटिंग करने पर उससे नाराज होते थे लेकिन वह चोरी-छिपे मूर्तियां बनाने लगीं। लोगों ने जब उनके काम की तारीफ की तो परिजन ने विरोध करना छोड़ दिया। मूर्तियों को बेचने के लिए प्लेटफार्म की जरूरत हुई तो उन्होंने जय मां दुर्गे से नाम से स्वयं सहायता समूह शुरू किया। शुरुआत में दिक्कत आई लेकिन धीरे-धीरे काम को सराहना मिलने लगी। क्षेत्र व जिला मुख्यालय पर लगनी वाली प्रदर्शनी में मिट्टी की बनीं मूर्तियों की प्रशंसा हुई। अफसरों ने उनके कार्य की सराहना करते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र दिया। उन्होंने गांव की कई महिलाओं को मिट्टी की मूर्तियां बनाना सिखा दिया। इसके बाद क्षेत्र की कई महिलाएं समूह से जुड़ती चलीं गईं।
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मिट्टी से बनी गणेश, लक्ष्मी, खाटू श्याम आदि देवी-देवताओं समेत कई महापुरुषों की मूर्तियां उपलब्ध हैं। इन मूर्तियों की कीमत 50 से लेकर 300 रुपये तक है। मूर्तियों की बढ़ती मांग को देखते हुए काफी संख्या में मूर्तियां तैयार की जा रही हैं।
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अंजलि मिट्टी से देवी-देवताओं समेत महापुरुषों की भी मूर्तियां बना रहीं हैं। उन्होंने कई लोगों को रोजगार दिया है। आने वाले समय में उनकी मूर्तियों को बिक्री के लिए जिले से बाहर भी भेजा जाएगा। -विनय कुमार, उपायुक्त स्वत: रोजगार