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सफारी में विष्णु-हीर और लक्ष्मी-गीगो के साथ रहेगी
Etawah
Updated Sat, 13 Sep 2014 05:31 AM IST
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इटावा। कानपुर जू से लॉयन सफारी पहुंचे विष्णु और लक्ष्मी नाम के शेर-शेरनी सगे भाई-बहन हैं। लिहाजा शेर के इस जोड़े को अलग-अलग जोड़ों में रखा जाएगा। सफारी प्रशासन ने तय किया है कि नर शेर विष्णु को शेरनी हीर के साथ और लक्ष्मी को नर गीगो के साथ रखा जाएगा। इस बदलाव की वजह शेर और उनके शावकों को बेहद करीब के रिश्तों से होने वाली बीमारियों से बचाना है।
लॉयन सफारी में अब एशियाटिक प्रजाति के चारों जोड़े बब्बर शेर आ चुके हैं। सबसे पहले गत अप्रैल के महीने में नर मनन और मादा कुंवारी लाए गए। उसके बाद सितंबर के इस महीने में बाकी तीनों जोड़े शेर यहां पहुंचा दिए गए। गत दो सितंबर को नर कुबेर और मादा ग्रीष्मा, सात सितंबर को नर गीगो और मादा हीर और दस सितंबर को नर विष्णु और मादा लक्ष्मी को यहां पहुंचा दिया गया। मनन और कुंवारी तो कई महीने से एक साथ ब्रीडिंग सेंटर में रह रहे हैं। बाकी जोड़ों को अभी यहां के माहौल में न केवल खुद को ढालना है बल्कि जोड़े में रखे जाने वाले शेर और शेरनी को एक दूसरे के साथ रहने के लिए अभ्यस्त होना है। इसलिए सफारी प्रशासन सतर्कता बरत रहा है कि जोड़े ऐसे बनाए जाएं, जिससे ब्रीडिंग में सहूलियत रहे और जो शावक पैदा हों, उनमें कोई दबी हुई आनुवांशिक बीमारी न पनपे। चूंकि लॉयन सफारी का मुख्य मकसद एशियाटिक प्रजाति को बढ़ाना है। इसी के तहत कानपुर चिड़ियाघर से यहां लाए गए विष्णु और लक्ष्मी नाम के शेर-शेरनी जोड़े को बदला जाएगा। सफारी में तैनात पशु चिकित्सक डॉ. कुलदीप दुबे के मुताबिक विष्णु-लक्ष्मी जोड़े के पिता एक ही रहे हैं। इसे देखते हुए इस जोड़े को गीगो और हीर से बदलकर रखा जाएगा। विष्णु के साथ हीर और लक्ष्मी के साथ गीगो रहेंगे। डॉ. दुबे के मुताबिक जानवरों में भी बेहद करीब के रिश्तों में ब्रीडिंग कराने से परहेज किया जाता है। अमूमन दूर का रिश्ता रखने के प्रयास होते हैं। एक तो पास का रिश्ता होने से इनब्रीडिंग होने की समस्या रहती है। दूसरे इससे दबी हुई बीमारियों के पनपने का खतरा बना रहता है। जबकि विष्णु और लक्ष्मी तो सगे भाई-बहन है। इसलिए इन दोनों को अलग-अलग जोड़े में रखा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि बब्बर शेरों के बाकी दोनों जोड़ों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यह बदलाव तब तक नहीं होगा जब तक कोई समस्या नहीं आती। उन्होंने कहा कि अभी ब्रीडिंग की शुरुआत नहीं हुई है। अनुकूल स्थिति आने पर ब्रीडिंग कराई जाएगी। अन्यथा की स्थिति में ब्रीडिंग कराने पर मेल और फीमेल शेर के मध्य फाइट होने का अंदेशा रहता है।
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लॉयन सफारी में अब एशियाटिक प्रजाति के चारों जोड़े बब्बर शेर आ चुके हैं। सबसे पहले गत अप्रैल के महीने में नर मनन और मादा कुंवारी लाए गए। उसके बाद सितंबर के इस महीने में बाकी तीनों जोड़े शेर यहां पहुंचा दिए गए। गत दो सितंबर को नर कुबेर और मादा ग्रीष्मा, सात सितंबर को नर गीगो और मादा हीर और दस सितंबर को नर विष्णु और मादा लक्ष्मी को यहां पहुंचा दिया गया। मनन और कुंवारी तो कई महीने से एक साथ ब्रीडिंग सेंटर में रह रहे हैं। बाकी जोड़ों को अभी यहां के माहौल में न केवल खुद को ढालना है बल्कि जोड़े में रखे जाने वाले शेर और शेरनी को एक दूसरे के साथ रहने के लिए अभ्यस्त होना है। इसलिए सफारी प्रशासन सतर्कता बरत रहा है कि जोड़े ऐसे बनाए जाएं, जिससे ब्रीडिंग में सहूलियत रहे और जो शावक पैदा हों, उनमें कोई दबी हुई आनुवांशिक बीमारी न पनपे। चूंकि लॉयन सफारी का मुख्य मकसद एशियाटिक प्रजाति को बढ़ाना है। इसी के तहत कानपुर चिड़ियाघर से यहां लाए गए विष्णु और लक्ष्मी नाम के शेर-शेरनी जोड़े को बदला जाएगा। सफारी में तैनात पशु चिकित्सक डॉ. कुलदीप दुबे के मुताबिक विष्णु-लक्ष्मी जोड़े के पिता एक ही रहे हैं। इसे देखते हुए इस जोड़े को गीगो और हीर से बदलकर रखा जाएगा। विष्णु के साथ हीर और लक्ष्मी के साथ गीगो रहेंगे। डॉ. दुबे के मुताबिक जानवरों में भी बेहद करीब के रिश्तों में ब्रीडिंग कराने से परहेज किया जाता है। अमूमन दूर का रिश्ता रखने के प्रयास होते हैं। एक तो पास का रिश्ता होने से इनब्रीडिंग होने की समस्या रहती है। दूसरे इससे दबी हुई बीमारियों के पनपने का खतरा बना रहता है। जबकि विष्णु और लक्ष्मी तो सगे भाई-बहन है। इसलिए इन दोनों को अलग-अलग जोड़े में रखा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि बब्बर शेरों के बाकी दोनों जोड़ों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यह बदलाव तब तक नहीं होगा जब तक कोई समस्या नहीं आती। उन्होंने कहा कि अभी ब्रीडिंग की शुरुआत नहीं हुई है। अनुकूल स्थिति आने पर ब्रीडिंग कराई जाएगी। अन्यथा की स्थिति में ब्रीडिंग कराने पर मेल और फीमेल शेर के मध्य फाइट होने का अंदेशा रहता है।
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