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इटावा की गोशाला में दो दिन में 20 गोवंशों की मौत
Fri, 31 May 2019 11:14 PM IST
प्रतीक दुबे
इटावा, अमर उजाला ब्यूरो
इटावा, अमर उजाला ब्यूरो
Published by: प्रतीक दुबे
Updated Fri, 31 May 2019 11:14 PM IST
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मृत गोवंश को जेसीबी से उठवाकर दफन किया गया।
- फोटो : amar ujala
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ब्लॉक स्थित परौली रमायन ग्राम पंचायत की गोशाला में दो दिन में 20 गोवंशों की मौत हो गई। प्रशासन ने बिना पोस्टमार्टम कराए जेसीबी से गड्ढा खोदवाकर जमीन में दफन करा दिया। डॉक्टरों का कहना है कि लू और तेज धूप के कारण गोवंशों की जान गई है।
करीब छह महीने पहले शुरू की गई परौली रमायन गोशाला जिले की सबसे बड़ी गोशाला है। यहां पर उस समय 1500 के करीब गोवंश लाए गए थे, जिनमें से इस समय छह सौ गोवंश बचे हैं। बताया जा रहा है कि गोशाला में मवेशियों को सूखा भूसा खाने को दिया जाता है।
पीने के लिए सीमेंट की बनी चरही में पानी भरा रहता है। दो दिनों में एक के बाद एक बीस गोवंशों की मौत की खबर पर शुक्रवार को अधिकारियों ने एक जेसीबी भेजी। गोशाला कर्मचारी इंदल सिंह पुत्र मुरारीलाल के मुताबिक जेसीबी चालक ने गोशाला के एक किनारे पर गड्ढा खोदकर सभी मृत गोवंशों को दफना दिया। किसी भी गोवंश का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। ग्रामीणों ने बताया कि गोशाला में पशु चिकित्सक आते ही नहीं। मवेशियों के मरने के बाद भी वे नहीं आए।
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उधर, पशु चिकित्सक डॉ. मंजू दोहरे ने बताया जो गोवंश मर जाता है, पंचनामा भरवाकर उसके शव को दफन करवा दिया जाता है। दो दिनों में मृत किसी भी मवेशी का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। उन्होंने बताया कि गोवंशों की मौत तेज धूप और लू के कारण हो रही है।
जिलाधिकारी जीबी सिंह ने बताया कि गोशाला में पांच-छह गोवंश मरने की जानकारी मिली है। बीडीओ और पशु चिकित्सकों की टीम भेजी गई है। परौली रामायन और आसपास के गांवों में बीमारी से मवेशी मरे हैं। जो सूचना आ रही हैं, उसमें गांव में बीमारी से मरे मवेशियों की संख्या ज्यादा है। फिर भी बीडीओ से वहां की स्थिति की रिपोर्ट लेंगे और स्थिति में सुधार किया जाएगा।
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करीब छह महीने पहले शुरू की गई परौली रमायन गोशाला जिले की सबसे बड़ी गोशाला है। यहां पर उस समय 1500 के करीब गोवंश लाए गए थे, जिनमें से इस समय छह सौ गोवंश बचे हैं। बताया जा रहा है कि गोशाला में मवेशियों को सूखा भूसा खाने को दिया जाता है।
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पीने के लिए सीमेंट की बनी चरही में पानी भरा रहता है। दो दिनों में एक के बाद एक बीस गोवंशों की मौत की खबर पर शुक्रवार को अधिकारियों ने एक जेसीबी भेजी। गोशाला कर्मचारी इंदल सिंह पुत्र मुरारीलाल के मुताबिक जेसीबी चालक ने गोशाला के एक किनारे पर गड्ढा खोदकर सभी मृत गोवंशों को दफना दिया। किसी भी गोवंश का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। ग्रामीणों ने बताया कि गोशाला में पशु चिकित्सक आते ही नहीं। मवेशियों के मरने के बाद भी वे नहीं आए।
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उधर, पशु चिकित्सक डॉ. मंजू दोहरे ने बताया जो गोवंश मर जाता है, पंचनामा भरवाकर उसके शव को दफन करवा दिया जाता है। दो दिनों में मृत किसी भी मवेशी का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। उन्होंने बताया कि गोवंशों की मौत तेज धूप और लू के कारण हो रही है।
जिलाधिकारी जीबी सिंह ने बताया कि गोशाला में पांच-छह गोवंश मरने की जानकारी मिली है। बीडीओ और पशु चिकित्सकों की टीम भेजी गई है। परौली रामायन और आसपास के गांवों में बीमारी से मवेशी मरे हैं। जो सूचना आ रही हैं, उसमें गांव में बीमारी से मरे मवेशियों की संख्या ज्यादा है। फिर भी बीडीओ से वहां की स्थिति की रिपोर्ट लेंगे और स्थिति में सुधार किया जाएगा।