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आरबीएसके टीम ने आंगनबाड़ी व स्कूलों में तलाशे 11615 बीमार बच्चे
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एटा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत बीमार बच्चों की विद्यालयों में तलाश की जाती है। प्रत्येक ब्लॉक पर दो-दो टीम तैनात की गईं हैं। चालू वर्ष के तहत इन टीमों ने 11615 बीमार बच्चों को चिह्नित कर उपचार कराया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य बाल कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्कूल, कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच करने और उपचार कराना है।
कभी-कभी परिजन को भी नहीं पता होता कि उनके बच्चे को क्या बीमारी है। दिल में छेद की पहचान बहुत आसानी से नहीं हो पाती। टीम में शामिल चिकित्सकों को इस तरह की बीमारियों की पहचान का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। आरबीएसके टीम ने जनवरी से अब तक 270 स्कूलों और 208 आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर 11615 बीमार बच्चों को चिह्नित किया। इनमें से 5107 का मौके पर ही उपचार किया गया। जबकि 5477 को विभिन्न स्वास्थ्य इकाइयों पर भर्ती करके उपचार किया गया।
कुछ गंभीर बच्चों का इलाज अभी भी जारी है। इनमें 13 बच्चे क्लबफुट (टेड़े पैर), सात बच्चे कटे होंठ सहित 28 बच्चों को इलाज दिया जा रहा है। नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ. ओपी आर्या ने बताया कि प्रत्येक ब्लॉक में दो-दो टीमें काम कर रही हैं। चिह्नित बीमार बच्चों में 28 गंभीर थे, इनको ऑपरेशन की जरूरत थी। इनमें से 17 को इलाज मिल चुका है, जबकि 11 को तारीख दी गई है। जल्द ही इनके भी ऑपरेशन कराए जाएंगे।
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कभी-कभी परिजन को भी नहीं पता होता कि उनके बच्चे को क्या बीमारी है। दिल में छेद की पहचान बहुत आसानी से नहीं हो पाती। टीम में शामिल चिकित्सकों को इस तरह की बीमारियों की पहचान का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। आरबीएसके टीम ने जनवरी से अब तक 270 स्कूलों और 208 आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर 11615 बीमार बच्चों को चिह्नित किया। इनमें से 5107 का मौके पर ही उपचार किया गया। जबकि 5477 को विभिन्न स्वास्थ्य इकाइयों पर भर्ती करके उपचार किया गया।
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कुछ गंभीर बच्चों का इलाज अभी भी जारी है। इनमें 13 बच्चे क्लबफुट (टेड़े पैर), सात बच्चे कटे होंठ सहित 28 बच्चों को इलाज दिया जा रहा है। नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ. ओपी आर्या ने बताया कि प्रत्येक ब्लॉक में दो-दो टीमें काम कर रही हैं। चिह्नित बीमार बच्चों में 28 गंभीर थे, इनको ऑपरेशन की जरूरत थी। इनमें से 17 को इलाज मिल चुका है, जबकि 11 को तारीख दी गई है। जल्द ही इनके भी ऑपरेशन कराए जाएंगे।
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