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कोरोना: केवल 11 मरीजों को पड़ी अस्पताल की जरूरत
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एटा। इस बार कोरोना वायरस संक्रामक तो ज्यादा दिख रहा है, लेकिन गंभीरता अभी तक कम ही नजर आ रही है। 24 दिनों में मिले करीब एक हजार मरीजों में से कुल 11 को ही अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ी है। जबकि 341 मरीज होम आइसोलेशन में ही स्वस्थ होकर काम पर लौट चुके हैं।
इस बार आई लहर में पहला कोरोना मरीज 28 दिसंबर को मिला था। इसके बाद से शुक्रवार तक 1015 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से अधिकांश लोगों ने होम आइसोलेशन को प्राथमिकता दी। किसी तरह की गंभीरता न पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग ने भी उन्हें घर पर ही आइसोलेट कर दवाएं उपलब्ध कराकर उपचार शुरू कर दिया। पांच से सात दिन में 341 लोग घरों पर ही रहकर स्वस्थ हो गए। इस बीच 11 ऐसे लोगों को बागवाला के एलवन अस्पताल में भर्ती किया गया, जिनमें कुछ जटिलता नजर आ रही थी। जबकि अतिगंभीर रोगियों के लिए बनाए गए एलटू अस्पताल की तो अभी तक जरूरत ही नहीं पड़ी। कोविड प्रभारी डिप्टी सीएमओ डॉ. सतीश चंद्र नागर ने बताया कि अधिकांश संक्रमित लोग ऐसे मिल रहे हैं, जिनमें किसी तरह के लक्षण और परेशानी ही नहीं है। ऐसे में उन्हें आइसोलेट करने का उद्देश्य अन्य लोगों को संक्रमण से बचाना है। हफ्ते भर में लोग स्वस्थ हो जा रहे हैं। किसी तरह की जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैयार हैं।
कोरोना संक्रमण अभी तक घातक रूप में सामने नहीं आया है। संक्रमण के शिकार हो रहे लोग आसानी से स्वस्थ हो रहे हैं। फिर भी लोगों को सतर्कता और सावधानी बरतनी होगी। जिससे जल्द से जल्द संक्रमण पर नियंत्रण किया जा सके।
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- डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी, सीएमओ
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इस बार आई लहर में पहला कोरोना मरीज 28 दिसंबर को मिला था। इसके बाद से शुक्रवार तक 1015 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से अधिकांश लोगों ने होम आइसोलेशन को प्राथमिकता दी। किसी तरह की गंभीरता न पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग ने भी उन्हें घर पर ही आइसोलेट कर दवाएं उपलब्ध कराकर उपचार शुरू कर दिया। पांच से सात दिन में 341 लोग घरों पर ही रहकर स्वस्थ हो गए। इस बीच 11 ऐसे लोगों को बागवाला के एलवन अस्पताल में भर्ती किया गया, जिनमें कुछ जटिलता नजर आ रही थी। जबकि अतिगंभीर रोगियों के लिए बनाए गए एलटू अस्पताल की तो अभी तक जरूरत ही नहीं पड़ी। कोविड प्रभारी डिप्टी सीएमओ डॉ. सतीश चंद्र नागर ने बताया कि अधिकांश संक्रमित लोग ऐसे मिल रहे हैं, जिनमें किसी तरह के लक्षण और परेशानी ही नहीं है। ऐसे में उन्हें आइसोलेट करने का उद्देश्य अन्य लोगों को संक्रमण से बचाना है। हफ्ते भर में लोग स्वस्थ हो जा रहे हैं। किसी तरह की जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैयार हैं।
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कोरोना संक्रमण अभी तक घातक रूप में सामने नहीं आया है। संक्रमण के शिकार हो रहे लोग आसानी से स्वस्थ हो रहे हैं। फिर भी लोगों को सतर्कता और सावधानी बरतनी होगी। जिससे जल्द से जल्द संक्रमण पर नियंत्रण किया जा सके।
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- डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी, सीएमओ