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Etah News: मोबाइल से आंखें हो रहीं कमजोर, ओपीडी में बढ़ रहे मरीज
Fri, 05 Jun 2026 11:06 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Fri, 05 Jun 2026 11:06 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में ओपीडी के बाहर लगी मरीजों की कतार। संवाद
एटा। गर्मी, धूल व डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग का असर अब लोगों की आंखों पर साफ दिखाई देने लगा है। वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में शुक्रवार को करीब 120 मरीजों ने उपचार लिया। इनमें अधिकांश मरीज आंखों में दर्द, जलन, खुजली, लालिमा, पानी आने और ड्राई आई सिंड्रोम जैसी समस्याओं से पीड़ित पाए गए।
नेत्र विभाग के चिकित्सकों के अनुसार इन दिनों आंखों से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक व खुले वातावरण में काम करने वाले लोगों में आंखों की परेशानी अधिक देखने को मिल रही है। इसके अलावा लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करने वाले लोग भी बड़ी संख्या में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अंजू ने बताया कि लगातार कई घंटों तक मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग करने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे आंखों का प्राकृतिक लुब्रिकेशन कम होने लगता है जिसके कारण ड्राई आई सिंड्रोम और डिजिटल आई स्ट्रेन (कंप्यूटर विजन सिंड्रोम) जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे मरीजों को आंखों में दर्द के साथ-साथ सिरदर्द की शिकायत भी रहती है।चिकित्सक के अनुसार तेज गर्मी और लू का असर भी आंखों पर पड़ रहा है। गर्म व शुष्क हवाओं के संपर्क में आने से आंखों की सतह पर मौजूद आंसुओं की पतली परत तेजी से सूख जाती है। इससे आंखों में सूखापन, जलन व संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
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नेत्र रोग होने के प्रमुख कारण
- तेज धूप और अल्ट्रावायलेट (यूर्वी) किरणों का सीधा प्रभाव।
- आंखों को गंदे हाथों से बार-बार छूना या मलना।
- गर्म और शुष्क हवा के कारण आंखों की नमी कम होना।
- धूल, प्रदूषण और एलर्जी के संपर्क में लगातार रहना।
इन बातों का रखें ध्यान
- धूप में निकलते समय काले चश्मे का प्रयोग करें।
- आंखों को ठंडे और साफ पानी से समय-समय पर धोना।
- पर्याप्त पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखना।
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नेत्र विभाग के चिकित्सकों के अनुसार इन दिनों आंखों से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक व खुले वातावरण में काम करने वाले लोगों में आंखों की परेशानी अधिक देखने को मिल रही है। इसके अलावा लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करने वाले लोग भी बड़ी संख्या में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
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नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अंजू ने बताया कि लगातार कई घंटों तक मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग करने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे आंखों का प्राकृतिक लुब्रिकेशन कम होने लगता है जिसके कारण ड्राई आई सिंड्रोम और डिजिटल आई स्ट्रेन (कंप्यूटर विजन सिंड्रोम) जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे मरीजों को आंखों में दर्द के साथ-साथ सिरदर्द की शिकायत भी रहती है।चिकित्सक के अनुसार तेज गर्मी और लू का असर भी आंखों पर पड़ रहा है। गर्म व शुष्क हवाओं के संपर्क में आने से आंखों की सतह पर मौजूद आंसुओं की पतली परत तेजी से सूख जाती है। इससे आंखों में सूखापन, जलन व संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
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नेत्र रोग होने के प्रमुख कारण
- तेज धूप और अल्ट्रावायलेट (यूर्वी) किरणों का सीधा प्रभाव।
- आंखों को गंदे हाथों से बार-बार छूना या मलना।
- गर्म और शुष्क हवा के कारण आंखों की नमी कम होना।
- धूल, प्रदूषण और एलर्जी के संपर्क में लगातार रहना।
इन बातों का रखें ध्यान
- धूप में निकलते समय काले चश्मे का प्रयोग करें।
- आंखों को ठंडे और साफ पानी से समय-समय पर धोना।
- पर्याप्त पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखना।