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‘ऑक्सीजन लेवल 90 से कम होने पर ही बच्चों को कराएं भर्ती’
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एटा। कोविड की तीसरी लहर की संभावना को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गाइडलाइन जारी कर दी है। 90 से नीचे ऑक्सीजन लेवल वाले कोरोना से पीड़ित गंभीर बच्चों को अस्पताल में रखने की जरूरत है। डिप्टी सीएमओ डॉ. सतीश चंद्र नागर ने बताया कि गाइडलाइन के मुताबिक जिन बच्चों का ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे गिरता है, उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए। बच्चों को स्टेराइड देने की मनाही की है। सिर्फ गंभीर मरीजों को ही यह दवा देने की बात कही गई है।
इसके अलावा कोविड के इलाज में इस्तेमाल हो रही रेमडिसिविर, आइवरमेक्टिन, फैवीपिराविर जैसी दवाओं को भी बच्चों को देने से मना किया गया है। कहा गया है कि जिन बच्चों का ऑक्सीजन लेवल 90 से कम आता है उन्हें गंभीर निमोनिया, एक्यूट रिसपाइटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, सैप्टिक शाक, मल्टी आर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे मरीजों को फौरन किसी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया जाए और जरूरत पड़े तो आईसीयू में शिफ्ट किया जाए। कुछ बच्चे बुखार के साथ पेट दर्द, उल्टी व दस्त की समस्या के आ सकते हैं, उनका भी कोरोना मरीज के तौर पर इलाज किया जाना चाहिए। उनका स्टूल टेस्ट कराने पर कोरोना की पुष्टि की जाएगी।
क्या हो सकते है लक्षण
- ज्यादातर बच्चे लक्षणविहीन या हल्के-फुल्के लक्षण वाले होंगे।
- बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकावट, सूंघने व स्वाद की क्षमता में कमी आना
- नाक बहना, मांसपेशियों में तकलीफ, गले में खराश जैसे लक्षण होंगे।
- कुछ बच्चों में दस्त आना, उल्टी होना, पेट दर्द होना ।
- कुछ में मल्टी सिस्टम इन्फ्लैमेट्री सिंड्रोम हो सकता है।
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इसके अलावा कोविड के इलाज में इस्तेमाल हो रही रेमडिसिविर, आइवरमेक्टिन, फैवीपिराविर जैसी दवाओं को भी बच्चों को देने से मना किया गया है। कहा गया है कि जिन बच्चों का ऑक्सीजन लेवल 90 से कम आता है उन्हें गंभीर निमोनिया, एक्यूट रिसपाइटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, सैप्टिक शाक, मल्टी आर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे मरीजों को फौरन किसी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया जाए और जरूरत पड़े तो आईसीयू में शिफ्ट किया जाए। कुछ बच्चे बुखार के साथ पेट दर्द, उल्टी व दस्त की समस्या के आ सकते हैं, उनका भी कोरोना मरीज के तौर पर इलाज किया जाना चाहिए। उनका स्टूल टेस्ट कराने पर कोरोना की पुष्टि की जाएगी।
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क्या हो सकते है लक्षण
- ज्यादातर बच्चे लक्षणविहीन या हल्के-फुल्के लक्षण वाले होंगे।
- बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकावट, सूंघने व स्वाद की क्षमता में कमी आना
- नाक बहना, मांसपेशियों में तकलीफ, गले में खराश जैसे लक्षण होंगे।
- कुछ बच्चों में दस्त आना, उल्टी होना, पेट दर्द होना ।
- कुछ में मल्टी सिस्टम इन्फ्लैमेट्री सिंड्रोम हो सकता है।