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शीतगृहों में आग लगी तो बुझाना होगी मुश्किल
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अलीगंज रोड स्थित कोल्ड स्टोरेज के बरामदे में रखे आलू के पैकेट।संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। जी हां, दुआ करिए ऐसा न हो, लेकिन किसी तरह शीतगृह में आग लगी तो उसको बुझाना मुश्किल हो जाएगा। वजह, ये शीतगृह अग्नि सुरक्षा संबंधी नियमों को पूरा नहीं करते। आलू भंडारण के लिए सभी शीतगृहों का संचालन शुरू किया जा चुका है। वहीं एक भी शीतगृह संचालक ने इसके लिए अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं लिया है, जो जरूरी होता है। जिले में करीब 1.81 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता के 18 कोल्ड स्टोर संचालित हैं।
अनापत्ति के लिए ये हैं मानक
- फायर एक्टिंग्यूशर और फायर बकेट।
- फायर अलार्म सिस्टम।
- कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपकरण व किट।
- पानी का स्टेटिक टैंक 1.25 लाख लीटर क्षमता का होना चाहिए।
- ऐसे स्थान पर हो जहां अग्निशमन वाहन आसानी से आ-जा सकें।
- 1620 एलपीएम क्षमता की एक विद्युत चलित फायर पंप हो।
- फर्स्ट एड होज रील आइएसआइ के अनुसार होनी चाहिए।
- इलेक्ट्रिक, मीटर, मशीन कक्ष बरामदे में होंगे। ताकि आगजनी की घटना होने पर निपटने के लिए आसानी मिल सके।
निर्माण के समय ही ली गई एनओसी
प्रभारी अग्निशमन अधिकारी सतीश चंद्र बताते हैं कि शीतगृह निर्माण के समय प्रोवीजनल एनओसी ली गई थी। शीतगृह संचालन पर भी एनओसी ली जानी चाहिए, लेकिन आज तक किसी भी संचालक ने एनओसी प्राप्त नहीं की है। अधिकांश शीतगृहों पर मानक के अनुसार यंत्र व अन्य व्यवस्थाएं नहीं हैं।
सात साल तक की सजा का प्रावधान
अग्निशमन संबंधी नियमों के उल्लंघन पर सात साल तक की सजा का प्रावधान है। प्रभारी अग्निशमन अधिकारी बताते हैं कि अग्निरोधक मानक पूरे न करने पर सीजेएम न्यायालय में वाद दायर किया जाता है। इसमें संचालक को सात साल तक के कारावास की सजा और एक लाख रुपये तक का अर्थदंड दिया जा सकता है।
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बिना एनओसी 6 के लाइसेंस हो गए नवीनीकृत
संचालकों को शीतगृह लाइसेंस का भी नवीनीकरण शासन स्तर से कराना होता है। जिसमें अग्निशमन विभाग की एनओसी लगाना जरूरी है। स्थानीय अग्निशमन विभाग से किसी ने भी एनओसी नहीं ली, लेकिन हैरत की बात है कि छह शीतगृहों के लाइसेंस का नवीनीकरण भी हो गया है।
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अनापत्ति के लिए ये हैं मानक
- फायर एक्टिंग्यूशर और फायर बकेट।
- फायर अलार्म सिस्टम।
- कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपकरण व किट।
- पानी का स्टेटिक टैंक 1.25 लाख लीटर क्षमता का होना चाहिए।
- ऐसे स्थान पर हो जहां अग्निशमन वाहन आसानी से आ-जा सकें।
- 1620 एलपीएम क्षमता की एक विद्युत चलित फायर पंप हो।
- फर्स्ट एड होज रील आइएसआइ के अनुसार होनी चाहिए।
- इलेक्ट्रिक, मीटर, मशीन कक्ष बरामदे में होंगे। ताकि आगजनी की घटना होने पर निपटने के लिए आसानी मिल सके।
निर्माण के समय ही ली गई एनओसी
प्रभारी अग्निशमन अधिकारी सतीश चंद्र बताते हैं कि शीतगृह निर्माण के समय प्रोवीजनल एनओसी ली गई थी। शीतगृह संचालन पर भी एनओसी ली जानी चाहिए, लेकिन आज तक किसी भी संचालक ने एनओसी प्राप्त नहीं की है। अधिकांश शीतगृहों पर मानक के अनुसार यंत्र व अन्य व्यवस्थाएं नहीं हैं।
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सात साल तक की सजा का प्रावधान
अग्निशमन संबंधी नियमों के उल्लंघन पर सात साल तक की सजा का प्रावधान है। प्रभारी अग्निशमन अधिकारी बताते हैं कि अग्निरोधक मानक पूरे न करने पर सीजेएम न्यायालय में वाद दायर किया जाता है। इसमें संचालक को सात साल तक के कारावास की सजा और एक लाख रुपये तक का अर्थदंड दिया जा सकता है।
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बिना एनओसी 6 के लाइसेंस हो गए नवीनीकृत
संचालकों को शीतगृह लाइसेंस का भी नवीनीकरण शासन स्तर से कराना होता है। जिसमें अग्निशमन विभाग की एनओसी लगाना जरूरी है। स्थानीय अग्निशमन विभाग से किसी ने भी एनओसी नहीं ली, लेकिन हैरत की बात है कि छह शीतगृहों के लाइसेंस का नवीनीकरण भी हो गया है।