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बढ़ी ठंड, ठिठुरा जनजीवन
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Tue, 19 Jan 2016 11:24 PM IST
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देर से ही सही लेकिन सर्दी अब अपने पूरे तेवर में हैं। मंगलवार की सुबह हुई बूंदाबांदी ने गलन और बढ़ा दी है। सूरज दिन भर बादलों की ओट में छिपा रहा। न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान भी सोमवार के मुकाबले एक डिग्री सेल्सियस गिरकर 19 डिग्री पर आ गया।
सोमवार को घने कोहरे के बाद मंगलवार को सुबह हुई बूंदाबांदी ने तो लोगों को गलन का अहसास करा दिया। दोपहर के समय कुछ देर के लिए धूप निकली, लेकिन कुछ देर बाद ही बादलों ने सूरज को ढक लिया। सर्दी का असर जनजीवन पर भी दिखा। बाजार और दफ्तरों में भी असर दिखा।
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो फसलों में अच्छे उत्पादन के लिए मौसम का उनके लिए अनकूल बना रहना जरूरी है। रबी की फसलें इन दिनों अधिक तापमान से बर्बाद होने की कगार पर थी, लेकिन मौसम के करवट लेते ही बीते दिनों से लगातार तापमान गिर रहा है। इसकी वजह से रबी की फसलों में जान पड़ गई है। किसानों की मानें तो गेहूं, मटर, मसूड़ की खेती इस मौसम से सुधार होगा। मंगलवार की बूंदाबांदी ने इन फसलों के लिए संजीवनी का काम किया है। रबी की फसलों में अभी हल्की सिंचाई की जरूरत थी जो बूंदाबांदी ने पूरी कर दी है।
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सोमवार को घने कोहरे के बाद मंगलवार को सुबह हुई बूंदाबांदी ने तो लोगों को गलन का अहसास करा दिया। दोपहर के समय कुछ देर के लिए धूप निकली, लेकिन कुछ देर बाद ही बादलों ने सूरज को ढक लिया। सर्दी का असर जनजीवन पर भी दिखा। बाजार और दफ्तरों में भी असर दिखा।
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कृषि विशेषज्ञों की मानें तो फसलों में अच्छे उत्पादन के लिए मौसम का उनके लिए अनकूल बना रहना जरूरी है। रबी की फसलें इन दिनों अधिक तापमान से बर्बाद होने की कगार पर थी, लेकिन मौसम के करवट लेते ही बीते दिनों से लगातार तापमान गिर रहा है। इसकी वजह से रबी की फसलों में जान पड़ गई है। किसानों की मानें तो गेहूं, मटर, मसूड़ की खेती इस मौसम से सुधार होगा। मंगलवार की बूंदाबांदी ने इन फसलों के लिए संजीवनी का काम किया है। रबी की फसलों में अभी हल्की सिंचाई की जरूरत थी जो बूंदाबांदी ने पूरी कर दी है।
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