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गोपालनगर और रामेश्वरपुरम विकास के कोसों दूर
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गोपालनगर की कच्ची सड़क। संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। जीटी रोड और डिग्री कॉलेज के पास बसीं कॉलोनियाें में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। जबकि यहां कई महत्वपूर्ण स्थल भी हैं। वहीं यहां बनीं रामेश्वरपुरम और गोपालनगर कॉलोनी विकास से कोसों दूर हैं। इतना ही नहीं कॉलोनी पालिका क्षेत्र में शामिल हुईं नहीं और ग्राम पंचायत ने पहले ही इनसे किनारा कर लिया।
गोशाला के सामने गोपालनगर बसा हुआ है। जहां करीब 80 घर बने हुए हैं। आबादी का तो पूरी तरह शहरीकरण हो चुका है, लेकिन इलाके की हालत गांव से भी बदतर है। यह शीतलपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। रास्ता कच्चा है, जिस पर रास्ता चलना मुश्किल होता है। बरसात के दिनों में परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है। नालियां लोगों ने अपने खर्च पर बना ली हैं, जिससे जल निकासी किसी हद तक हो जाती है।
इसी के कुछ आगे सरस्वती विद्या मंदिर के पास रामेश्वरपुरम कॉलोनी बसे हुए करीब 20 साल का समय हो गया है। करीब 100 घर बने हुए हैं। यह इलाका भी शीतलपुर ग्राम पंचायत में ही आता है। रास्ता कच्चा होने के साथ ही नालियां भी नहीं है। गंदा पानी घरों के बाहर और गलियों में भरा रहता है। गंदगी के साथ ही बीमारियों का खतरा भी लोगों को रहता है। लोगों में यह भी रोष है कि हालात गांव से बदतर हैं और बिजली का बिल शहर की तरह लिया जा रहा है।
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गोशाला के सामने गोपालनगर बसा हुआ है। जहां करीब 80 घर बने हुए हैं। आबादी का तो पूरी तरह शहरीकरण हो चुका है, लेकिन इलाके की हालत गांव से भी बदतर है। यह शीतलपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। रास्ता कच्चा है, जिस पर रास्ता चलना मुश्किल होता है। बरसात के दिनों में परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है। नालियां लोगों ने अपने खर्च पर बना ली हैं, जिससे जल निकासी किसी हद तक हो जाती है।
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इसी के कुछ आगे सरस्वती विद्या मंदिर के पास रामेश्वरपुरम कॉलोनी बसे हुए करीब 20 साल का समय हो गया है। करीब 100 घर बने हुए हैं। यह इलाका भी शीतलपुर ग्राम पंचायत में ही आता है। रास्ता कच्चा होने के साथ ही नालियां भी नहीं है। गंदा पानी घरों के बाहर और गलियों में भरा रहता है। गंदगी के साथ ही बीमारियों का खतरा भी लोगों को रहता है। लोगों में यह भी रोष है कि हालात गांव से बदतर हैं और बिजली का बिल शहर की तरह लिया जा रहा है।
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