एटा। सर्दी बढ़ने के साथ ही दमा रोगियों में पांच गुना बढ़ोतरी हुई है। मेडिकल कॉलेज में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासतौर से बुजुर्गों को काफी परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है। सर्दी बढ़ने के साथ ही सांस के रोगियों की परेशानियां बढ़ने लगती हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में दस दिन पहले तक रोजाना औसतन 20 मरीज पहुंच रहे थे। अब यह संख्या बढ़कर 100 तक हो गई है। खांसी, छींकें, सांस लेने में परेशानी और सीने में जकड़न, सांस लेते समय घरघराहट, तेज सांस लेने पर पसीने के साथ बेचैनी, सिर भारी रहना, जल्दी-जल्दी सांस लेने पर थकावट महसूस होने आदि समस्याएं लेकर मरीज चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के डॉ. चेतन चौहान का कहना है कि सर्दियों में सांस नली में सूजन आ जाती है। दमा (अस्थमा) मरीज को कई तरह से प्रभावित करता है। सांस नली में सूजन आने से फेफड़े तक उचित मात्रा में हवा नहीं पहुंच पाती। जिससे मरीज की सांस फूलने लगती है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। मरीजों को इन्हेलर साथ लेकर चलना चाहिए। अधिक सांस फूलने पर इसका इस्तेमाल करते रहें। समय पर इलाज न होने से मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। इनका कहना है कि ओपीडी में उनके पास पिछले दिनों करीब 10 मरीज आते थे, अब 50 आ रहे हैं।