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डीबीटी से यूनिफॉर्म खरीद की निगरानी करेंगे लेखपाल व सचिव
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एटा। परिषदीय विद्यालयों में डीबीटी के माध्यम से मिलने वाली रकम से बच्चों के लिए यूनिफॉर्म खरीदने में अभिभावक लापरवाही बरतते हैं। वहीं शिक्षक अपनी नौकरी बचाने के लिए माफिक रिपोर्ट लगाकर भेज देते हैं। अब राजस्व, विकास, स्वास्थ्य से इसकी क्रॉस चेकिंग कराई जाएगी। लेखपाल, ग्राम पंचायत सचिवों, एएनएम आदि की ड्यूटी स्कूल वार लगेगी जो निगरानी करेंगे कि बच्चों के जूते-मौजे, स्वेटर आदि खरीदे गए अथवा नहीं।
जिले के 1691 परिषदीय विद्यालयों में एक लाख 68 हजार के करीब बच्चे पढ़ रहे हैं। डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांजेक्शन (डीबीटी) के माध्यम से सरकार अभिभावकों के सीधे खाते में रकम भेज रही है। अब तक करीब एक लाख 44 हजार बच्चों के लिए जूता-मौजे, स्वेटर, ड्रेस आदि खरीदने के लिए रकम भेजी जा चुकी है। सर्दियां शुरू होने जा रहीं हैं और अभी भी कई अभिभावकों द्वारा बच्चों के लिए जूता-मौजे व अन्य सामान नहीं खरीदे गए हैं।
शासन की ओर से डीबीटी की रकम से बच्चों के लिए खरीदे गए सामान की पुष्टि के लिए शिक्षकों को लगाया था लेकिन इसकी रिपोर्ट ज्यादा भरोसेमंद नहीं रही। कोई झोल न हो सके, इसके लिए क्रॉस चेकिंग की जिम्मेदारी लेखपाल, पंचायत सचिव, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम प्रधानों को दी गई है। यह सभी अभिभावकों को जूता-मौजे, स्वेटर, ड्रेस आदि खरीदवाने के लिए प्रेरित भी करेंगे।
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महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से निर्देश मिले हैं कि सर्दियों में कोई भी बच्चा बिना स्वेटर के विद्यालय में न पहुंचे। इसके लिए लेखपाल, पंचायत सचिव सहित अन्य का सहयोग लेकर निगरानी कराई जाएगी। अभिभावकों को भी प्रेरित किया जाएगा ताकि कोई भी बच्चा ठंड से परेशान न हो। - संजय सिंह, बीएसए
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जिले के 1691 परिषदीय विद्यालयों में एक लाख 68 हजार के करीब बच्चे पढ़ रहे हैं। डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांजेक्शन (डीबीटी) के माध्यम से सरकार अभिभावकों के सीधे खाते में रकम भेज रही है। अब तक करीब एक लाख 44 हजार बच्चों के लिए जूता-मौजे, स्वेटर, ड्रेस आदि खरीदने के लिए रकम भेजी जा चुकी है। सर्दियां शुरू होने जा रहीं हैं और अभी भी कई अभिभावकों द्वारा बच्चों के लिए जूता-मौजे व अन्य सामान नहीं खरीदे गए हैं।
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शासन की ओर से डीबीटी की रकम से बच्चों के लिए खरीदे गए सामान की पुष्टि के लिए शिक्षकों को लगाया था लेकिन इसकी रिपोर्ट ज्यादा भरोसेमंद नहीं रही। कोई झोल न हो सके, इसके लिए क्रॉस चेकिंग की जिम्मेदारी लेखपाल, पंचायत सचिव, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम प्रधानों को दी गई है। यह सभी अभिभावकों को जूता-मौजे, स्वेटर, ड्रेस आदि खरीदवाने के लिए प्रेरित भी करेंगे।
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महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से निर्देश मिले हैं कि सर्दियों में कोई भी बच्चा बिना स्वेटर के विद्यालय में न पहुंचे। इसके लिए लेखपाल, पंचायत सचिव सहित अन्य का सहयोग लेकर निगरानी कराई जाएगी। अभिभावकों को भी प्रेरित किया जाएगा ताकि कोई भी बच्चा ठंड से परेशान न हो। - संजय सिंह, बीएसए