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Deoria News: मेडिकल कॉलेज में बर्न वार्ड नहीं, मरीजों को संक्रमण का खतरा

Thu, 16 Jan 2025 01:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Thu, 16 Jan 2025 01:19 AM IST
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There is no burn ward in the medical college, patients are at risk of infection
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में आग से झुलसे मरीजों के इलाज की सुविधा नहीं है। इसकी वजह से उनका इलाज नहीं हो पाता है, जिससे परेशानी का सामना करना पड़ता है, उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है, जिससे मरीजों को गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी व निजी अस्पताल की ओर रूख करना पड़ता है। इससे दिक्क्त के साथ उन पर आर्थिक बोझ पड़ता है। अस्पताल में मामूली रूप से झुलसे मरीजों का अन्य मरीजों के साथ वार्ड में रखा जाता है, जिससे उन्हें इंफेक्शन का खतरा बना रहता है। बर्न वार्ड बन जाने से मरीजों को काफी सहूलियत होगी।
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ठंड का प्रकोप बढ़ा है। इन दिनों के अलावा सहित अन्य वजह से लोग झुलसे लोगों को लेकर परिजन महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में आते हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज के शुरू होने के साढ़े तीन साल बाद भी बर्न वार्ड नहीं बना है और संसाधनों की कमी भी है। इससे बर्न के मरीजों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। करीब बीस से पचीस प्रतिशत झुलसे मरीजों का ही किसी तरह इलाज होता है, जबकि गंभीर रूप से झुलसे मरीज को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर भेज दिया जाता है।
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अस्पताल में चाय, गर्म पानी, दूध व अन्य तरह से मामूली रूप से झुलसे लोगों का ही उपचार हो पाता है। इन मरीजों के लिए मेल व फीमेल सर्जिकल वार्ड में पांच-पांच है, जहां भर्ती कर इलाज किया जाता है। और महिला को फीमेल सर्जिकल वार्ड के गलियारे में स्थित बेड पर भर्ती कर किसी तरह इलाज किया जाता है। यहां किसी को मच्छरदानी भी नहीं दी गई है। महुआडीह क्षेत्र के सुरचक के मुकेश सिंह की 11 वर्षीया पुत्री सुनैना अलाव सेंकते समय पैर जल गया।
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परिजनों ने बताया कि उसका 18 दिन से इलाज चल रहा है। उसमें सुधार होने पर बुधवार को इंफेक्शन से बचाव के लिए घर जाने को कहा गया, जबकि बगल के बेड पर अलाव से झुलसी एक महिला भर्ती थी। उसका पंद्रह दिन इलाज चला। इंफेक्शन का खतरा देख परिजन लेकर दूसरे अस्पताल में चले गए। सुरौली थाना क्षेत्र के मझगावा की रानी 24 चाय गिरने से झुलस गई।

परिजनों ने सोमवार को भर्ती कराया। यहां भर्ती मरीजों को न मच्छरदानी में रखा गया है और न ही संक्रमण से बचाव के इंतजाम किए गए हैं। किसी तरह उनका उपचार किया जा रहा है। इन मरीजों में संक्रमण फैलने की संभावना रहती है।
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