{"_id":"6495e3732e7b8645940b2a7e","slug":"the-coin-did-not-work-in-leadership-so-now-the-hospital-is-running-deoria-news-c-7-1-216945-2023-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: नेतागिरी में नहीं चला सिक्का, तो अब चला रहे अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: नेतागिरी में नहीं चला सिक्का, तो अब चला रहे अस्पताल
विज्ञापन
कई बार विवाद के बाद भी धड़ल्ले से चल रहे अवैध अस्पताल
सील होने के बाद एक माह में खुल जाता है अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। नेतागिरी में सिक्का नहीं चला, तो अब अवैध अस्पताल धड़ल्ले से चला रहे हैं। नगर सहित क्षेत्र में कई अस्पतालों के संचालक नेतागिरी और प्रापर्टी के धंधे में हाथ आजमाने के बाद अब अस्पताल चलाकर कमाई कर रहे हैं। जिम्मेदारों के रहमो करम पर कई बार अस्पताल में विवाद होने के बाद भी इनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा और अस्पताल चलता रहा। जांच में प्रशासन के सील करने के एक सप्ताह बाद ही अस्पताल खोल दिया।
नगर के सेमरौना चौराहे पर एक अस्पताल का संचालक मदनपुर नगर पंचायत के सभासद पर चुनाव लड़ा चुका है, यहां उसका अस्पताल बेखौफ चल रहा है। दो साल पहले एसीएमओ की कार्रवाई के दौरान पांच प्रसूताओं का ऑपरेशन हुआ था, जिसे एक आशा लेकर आई थी। अब अस्पताल फिर से चल रहा है। नगर के पश्चिमी बाईपास स्थित एक चर्चित अस्पताल को तीन माह पहले तहसील प्रशासन की मौजूदगी में सील किया गया, लेकिन एक सप्ताह में ही अस्पताल फिर से संचालित होने लगा। मरकड़ी ढाले के निकट संचालित एक अस्पताल का मालिक गोरखपुर जिले में पंचायत का जनप्रतिनिधि रहा है, अब वह बेखौफ अस्पताल चला रहा है। यहां बकाएदे ऑपरेशन से लेकर ओपीडी की सुविधा है। तहसील स्थित टैक्सी स्टैंड पर अस्पताल बिना बोर्ड के चलता है। दो साल पहले प्रसूता की मौत पर सील किया गया था, मामला शांत होने के बाद अवैध अस्पताल का धंधा चलने लगा। पिछले साल मदनपुर में चर्चित बंगाली झोलाछाप के अस्पताल पर भीड़ लगने लगी है। यहां झोलाछाप का बीते साल नाबालिग से अस्पताल में छेड़छाड़ का वीडियो वायरल होने पर केस दर्ज हुआ था। अवैध अस्पतालों पर कागजों में कार्रवाई होने के बाद फिर से संचालित होने पर लोग जिम्मेदारों पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
-- -- -
मदनपुर में तैनात स्वीपर करता है दलाली
मदनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात एक स्वीपर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही एक जिम्मेदार अधिकारी के साथ भ्रमण करता है। अवैध अस्पताल के संचालकों से उसकी जमकर वसूली होती है। सूत्रों की माने तो अवैध अस्पतालों की जांच के दौरान वह साथ जाता है और फिर उनसे वसूली करता है। मदनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का स्वीपर सीएचसी के कर्मचारियों पर धौंस जमाता है। जिसे लेकर कई बार अस्पताल कर्मियों में विवाद भी हो चुका है।
विज्ञापन
-- -- -- --
दिल्ली, लखनऊ में चिकित्सक, रजिस्ट्रेशन रुद्रपुर में
नगर के कई अस्पतालों पर दिल्ली, लखनऊ के चिकित्सकों का नाम दर्ज है, बकाएदे उनके नाम पर कुछ अस्पताल संचालकों ने पंजीकरण कराया है। चिकित्सकों के नाम पर झोलाछाप मरीजों का दवा और उपचार करते हैं। ऐसा ही हाल अल्ट्रासाउंड सेंटर और खून जांच करने वालों का है।
-- -- -- --
अवैध अस्पतालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। बिना पंजीकृत अस्पतालों को सील कर संचालकों पर केस दर्ज कराया जाएगा।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, एसीएमओ
विज्ञापन
सील होने के बाद एक माह में खुल जाता है अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। नेतागिरी में सिक्का नहीं चला, तो अब अवैध अस्पताल धड़ल्ले से चला रहे हैं। नगर सहित क्षेत्र में कई अस्पतालों के संचालक नेतागिरी और प्रापर्टी के धंधे में हाथ आजमाने के बाद अब अस्पताल चलाकर कमाई कर रहे हैं। जिम्मेदारों के रहमो करम पर कई बार अस्पताल में विवाद होने के बाद भी इनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा और अस्पताल चलता रहा। जांच में प्रशासन के सील करने के एक सप्ताह बाद ही अस्पताल खोल दिया।
नगर के सेमरौना चौराहे पर एक अस्पताल का संचालक मदनपुर नगर पंचायत के सभासद पर चुनाव लड़ा चुका है, यहां उसका अस्पताल बेखौफ चल रहा है। दो साल पहले एसीएमओ की कार्रवाई के दौरान पांच प्रसूताओं का ऑपरेशन हुआ था, जिसे एक आशा लेकर आई थी। अब अस्पताल फिर से चल रहा है। नगर के पश्चिमी बाईपास स्थित एक चर्चित अस्पताल को तीन माह पहले तहसील प्रशासन की मौजूदगी में सील किया गया, लेकिन एक सप्ताह में ही अस्पताल फिर से संचालित होने लगा। मरकड़ी ढाले के निकट संचालित एक अस्पताल का मालिक गोरखपुर जिले में पंचायत का जनप्रतिनिधि रहा है, अब वह बेखौफ अस्पताल चला रहा है। यहां बकाएदे ऑपरेशन से लेकर ओपीडी की सुविधा है। तहसील स्थित टैक्सी स्टैंड पर अस्पताल बिना बोर्ड के चलता है। दो साल पहले प्रसूता की मौत पर सील किया गया था, मामला शांत होने के बाद अवैध अस्पताल का धंधा चलने लगा। पिछले साल मदनपुर में चर्चित बंगाली झोलाछाप के अस्पताल पर भीड़ लगने लगी है। यहां झोलाछाप का बीते साल नाबालिग से अस्पताल में छेड़छाड़ का वीडियो वायरल होने पर केस दर्ज हुआ था। अवैध अस्पतालों पर कागजों में कार्रवाई होने के बाद फिर से संचालित होने पर लोग जिम्मेदारों पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
विज्ञापन
मदनपुर में तैनात स्वीपर करता है दलाली
मदनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात एक स्वीपर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही एक जिम्मेदार अधिकारी के साथ भ्रमण करता है। अवैध अस्पताल के संचालकों से उसकी जमकर वसूली होती है। सूत्रों की माने तो अवैध अस्पतालों की जांच के दौरान वह साथ जाता है और फिर उनसे वसूली करता है। मदनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का स्वीपर सीएचसी के कर्मचारियों पर धौंस जमाता है। जिसे लेकर कई बार अस्पताल कर्मियों में विवाद भी हो चुका है।
विज्ञापन
दिल्ली, लखनऊ में चिकित्सक, रजिस्ट्रेशन रुद्रपुर में
नगर के कई अस्पतालों पर दिल्ली, लखनऊ के चिकित्सकों का नाम दर्ज है, बकाएदे उनके नाम पर कुछ अस्पताल संचालकों ने पंजीकरण कराया है। चिकित्सकों के नाम पर झोलाछाप मरीजों का दवा और उपचार करते हैं। ऐसा ही हाल अल्ट्रासाउंड सेंटर और खून जांच करने वालों का है।
अवैध अस्पतालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। बिना पंजीकृत अस्पतालों को सील कर संचालकों पर केस दर्ज कराया जाएगा।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, एसीएमओ