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Deoria News: बारिश से राहत... वज्रपात से महिला की मौत, भाई-बहन झुलसे
Mon, 16 Jun 2025 11:40 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 16 Jun 2025 11:40 PM IST
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शहर के न्यू कालोनी स्थित छोटा पार्क के दक्षिणी मार्ग पर लगा बारिश का पानी।
संवाद न्यूज एजेंसी देवरिया/देसही देवरिया। मौसम में अचानक बदलाव के बाद सोमवार को हुई बारिश से राहत और आफत साथ लेकर आई। लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली, वहीं जलभराव ने दुश्वारियां खड़ी कर दी। अलबत्ता किसानों के चेहरे खिल गए। वहीं बारिश के दौरान वज्रपात से एक महिला की मौत हो गई, जबकि भाई-बहन झुलस गए। बारशि से धान की रोपाई के कार्यों को गति मिलेगी। साथ ही, फसलों को लाभ पहुंचा है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल बारिश समय से शुरू हुई है, उपज अच्छी होने की उम्मीद है।कई दिनों से लगातार भीषण गर्मी और धूप से बेहाल लोगों को सोमवार को काफी राहत मिली। शनिवार को धूप और बादलों की लुकाछिपी के बीच कई जगह बूंदाबांदी हुई थी। सोमवार की सुबह तड़के पांच बजे के करीब चमक और गरज के साथ अधिकतर इलाकों में झमाझम बारिश हुई। देसही देवरिया, महुआडीह, तरकुलवा, बैतालपुर, हेतिमपुर आदि क्षेत्रों में तो जोरदार बारिश हुई। खेतों में पानी लग गया। इससे किसानों के चेहरे खिल गए। तेज धूप से हर तीसरे या चौथे दिन पंपिंगसेट से पानी चलाकर किसान धान की बेहन को बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए थे।
तमाम रोग भी लग गए थे। किसान अब थोड़ा बहुतखेतों की रोपाई भी शुरू कर चुके हैं। ऐसे में यह बारिश किसी संजीवनी से कम नहीं है। इस बारिश से अब खेतीबाड़ी के कार्यों में तेजी आएगी।
खेतों में लगे सब्जी, मूंग, उड़द, बाजरा, मक्का, गन्ना आदि फसलों को भी इस बारिश से काफी लाभ पहुंचा है। अब 10 दिनों तक सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। पैदावार पर भी अच्छा असर पड़ेगा। सोनबरसा गांव के लालमन यादव, बेलवा बाजार के रामदरश चौरसिया, पिपरा मदन गोपाल के रामानंद सिंह, हरैया के अनिल, बरवा मीरछापर के राम आशीष कुशवाहा आदि किसानों का कहना है इस बारिश से चौतरफा लाभ हुआ है।
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पूर्व कृषि वैज्ञानिक व विषय वस्तु सलाहकार ओंकारनाथ दुबे ने बताया कि इस साल मानसून का आगमन समय से हुआ है। पिछले कुछ सालों में मानसून करीब 10 दिन विलंब से आता था। धान की बेहन डालने का सही समय 20 मई से माना जाता है। मौसम की बेरुखी से किसान मई के आखिर में बेहन डाल देते हैं।
जो बाकी रह गए हैं, उनके लिए बेहन डालने के लिए अच्छा समय है। ऐसी बारिश में बेहन 20-22 दिनों में रोपाई योग्य हो जाती है। रोगग्रस्त भी नहीं होगी। इस बारिश से किसानों को चौतरफा लाभ पहुंचा है। कहीं से कोई क्षति नहीं है। बेहन में यूरिया का प्रयोग न करें।
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तमाम रोग भी लग गए थे। किसान अब थोड़ा बहुतखेतों की रोपाई भी शुरू कर चुके हैं। ऐसे में यह बारिश किसी संजीवनी से कम नहीं है। इस बारिश से अब खेतीबाड़ी के कार्यों में तेजी आएगी।
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खेतों में लगे सब्जी, मूंग, उड़द, बाजरा, मक्का, गन्ना आदि फसलों को भी इस बारिश से काफी लाभ पहुंचा है। अब 10 दिनों तक सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। पैदावार पर भी अच्छा असर पड़ेगा। सोनबरसा गांव के लालमन यादव, बेलवा बाजार के रामदरश चौरसिया, पिपरा मदन गोपाल के रामानंद सिंह, हरैया के अनिल, बरवा मीरछापर के राम आशीष कुशवाहा आदि किसानों का कहना है इस बारिश से चौतरफा लाभ हुआ है।
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पूर्व कृषि वैज्ञानिक व विषय वस्तु सलाहकार ओंकारनाथ दुबे ने बताया कि इस साल मानसून का आगमन समय से हुआ है। पिछले कुछ सालों में मानसून करीब 10 दिन विलंब से आता था। धान की बेहन डालने का सही समय 20 मई से माना जाता है। मौसम की बेरुखी से किसान मई के आखिर में बेहन डाल देते हैं।
जो बाकी रह गए हैं, उनके लिए बेहन डालने के लिए अच्छा समय है। ऐसी बारिश में बेहन 20-22 दिनों में रोपाई योग्य हो जाती है। रोगग्रस्त भी नहीं होगी। इस बारिश से किसानों को चौतरफा लाभ पहुंचा है। कहीं से कोई क्षति नहीं है। बेहन में यूरिया का प्रयोग न करें।