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कब शुरू होंगे प्रशिक्षण कैंप, किसी को पता नहीं
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कब शुरू होंगे प्रशिक्षण कैंप, किसी को पता नहीं
- छात्रावास खुलने और प्रशिक्षण कैंप शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं खिलाड़ी
- खेल निदेशालय की ओर से कोई निर्देश नहीं मिलने पर प्रशिक्षकों में बढ़ती जा रही है नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। खेल निदेशालय अभी भी तक यह तय नहीं कर पाया है कि इस सत्र में स्टेडियम में छात्रावास एवं खेल प्रशिक्षण कैंप चलेंगे या नहीं। इसे लेकर यहां आने वाले खिलाड़ियों व बेरोजगार हो चुके प्रशिक्षकों में गुस्सा बढ़ रहा है। यह स्थिति तब है जब 19 अक्तूबर से 9वीं से 12वीं तक के विद्यालयों को कोविड-19 प्रोटोकाल के तहत खोल दिए गए हैं। छात्रावास में प्रदेश भर से चुने गए खिलाड़ी 9वीं से लेकर 12वीं तक के ही विद्यार्थी भी होते हैं। स्टेडियम प्रशासन इनका दाखिला नजदीक के विद्यालयों में ही कराता है। ऐसे में इन विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान होना तय है।
जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में अभ्यास को आने वाला हर खिलाड़ी और इन्हें प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षक अपने खेल कैंपों के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। पिछले सत्र में रविंद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, हैंडबॉल, कुश्ती, ताइक्वांडो, वालीबॉल, एथलेटिक्स, खो-खो का प्रशिक्षण शिविर संचालित हुआ था। नए सत्र के लिए इन्हीं खेलों के प्रशिक्षकों का नवीनीकरण होना था, लेकिन 25 मार्च से लॉकडाउन के बाद से अप्रैल से शुरू होने वाला कोचिंग कैंप ही बंद कर दिया गया। नवीनीकरण नहीं होने से पिछले छह माह से सारे कोच बेरोजगार हो गए हैं और खिलाड़ी भी प्रशिक्षण नहीं ले पा रहे हैं। उधर, स्टेडियम में चलने वाला वालीबॉल एवं क्रिकेट का छात्रावास भी तभी से बंद चल रहा है। मार्च में ही यहां से गए 40 खिलाड़ियों को अब तक वापस नहीं बुलाया गया है।
जिले के रहने वाले हैं खेल निदेशक
प्रदेश में वर्तमान खेल निदेशक एवं अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी डॉ.आरपी सिंह देवरिया जिले के ही मूल निवासी हैं। इनके खेल निदेशक बनने पर खिलाड़ियों में उम्मीद जगी थी कि प्रदेश व जिले में खेल का विकास होगा और यहां के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब होंगे। हालांकि हकीकत में ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा है। इनके कार्यकाल में खेल प्रशिक्षकों व खिलाड़ियों को अपना भविष्य ही अंधकारमय दिखाई दे रहा है। स्टेडियम में विभिन्न सत्रों में काम कर चुके प्रशिक्षक अब पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि इससे बेहतर कार्यकाल पुराने अधिकारियों का था।
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खेल छात्रावास एवं प्रशिक्षण कैंप शुरू करने के संबंध में अभी तक निदेशालय की ओर से कोई निर्देश नहीं आया है। प्रतिदिन प्रवेश के लिए खिलाड़ी इस बारे में पूछते हैं, उन्हें स्थिति की जानकारी देकर लौटाया जाता है। जैसे ही प्रशिक्षण कैंप शुरू किए जाने का आदेश आएगा, इसे प्रारंभ कर दिया जाएगा।
केके पांडेय, जिला क्रीड़ाधिकारी
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- छात्रावास खुलने और प्रशिक्षण कैंप शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं खिलाड़ी
- खेल निदेशालय की ओर से कोई निर्देश नहीं मिलने पर प्रशिक्षकों में बढ़ती जा रही है नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। खेल निदेशालय अभी भी तक यह तय नहीं कर पाया है कि इस सत्र में स्टेडियम में छात्रावास एवं खेल प्रशिक्षण कैंप चलेंगे या नहीं। इसे लेकर यहां आने वाले खिलाड़ियों व बेरोजगार हो चुके प्रशिक्षकों में गुस्सा बढ़ रहा है। यह स्थिति तब है जब 19 अक्तूबर से 9वीं से 12वीं तक के विद्यालयों को कोविड-19 प्रोटोकाल के तहत खोल दिए गए हैं। छात्रावास में प्रदेश भर से चुने गए खिलाड़ी 9वीं से लेकर 12वीं तक के ही विद्यार्थी भी होते हैं। स्टेडियम प्रशासन इनका दाखिला नजदीक के विद्यालयों में ही कराता है। ऐसे में इन विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान होना तय है।
जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में अभ्यास को आने वाला हर खिलाड़ी और इन्हें प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षक अपने खेल कैंपों के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। पिछले सत्र में रविंद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, हैंडबॉल, कुश्ती, ताइक्वांडो, वालीबॉल, एथलेटिक्स, खो-खो का प्रशिक्षण शिविर संचालित हुआ था। नए सत्र के लिए इन्हीं खेलों के प्रशिक्षकों का नवीनीकरण होना था, लेकिन 25 मार्च से लॉकडाउन के बाद से अप्रैल से शुरू होने वाला कोचिंग कैंप ही बंद कर दिया गया। नवीनीकरण नहीं होने से पिछले छह माह से सारे कोच बेरोजगार हो गए हैं और खिलाड़ी भी प्रशिक्षण नहीं ले पा रहे हैं। उधर, स्टेडियम में चलने वाला वालीबॉल एवं क्रिकेट का छात्रावास भी तभी से बंद चल रहा है। मार्च में ही यहां से गए 40 खिलाड़ियों को अब तक वापस नहीं बुलाया गया है।
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जिले के रहने वाले हैं खेल निदेशक
प्रदेश में वर्तमान खेल निदेशक एवं अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी डॉ.आरपी सिंह देवरिया जिले के ही मूल निवासी हैं। इनके खेल निदेशक बनने पर खिलाड़ियों में उम्मीद जगी थी कि प्रदेश व जिले में खेल का विकास होगा और यहां के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब होंगे। हालांकि हकीकत में ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा है। इनके कार्यकाल में खेल प्रशिक्षकों व खिलाड़ियों को अपना भविष्य ही अंधकारमय दिखाई दे रहा है। स्टेडियम में विभिन्न सत्रों में काम कर चुके प्रशिक्षक अब पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि इससे बेहतर कार्यकाल पुराने अधिकारियों का था।
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खेल छात्रावास एवं प्रशिक्षण कैंप शुरू करने के संबंध में अभी तक निदेशालय की ओर से कोई निर्देश नहीं आया है। प्रतिदिन प्रवेश के लिए खिलाड़ी इस बारे में पूछते हैं, उन्हें स्थिति की जानकारी देकर लौटाया जाता है। जैसे ही प्रशिक्षण कैंप शुरू किए जाने का आदेश आएगा, इसे प्रारंभ कर दिया जाएगा।
केके पांडेय, जिला क्रीड़ाधिकारी