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Deoria News: एसएनसीयू में इमरजेंसी रास्ता नहीं, उपकरणों में भी मिलीं खामियां
Sun, 17 Nov 2024 02:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 17 Nov 2024 02:09 AM IST
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देवरिया। झांसी मेडिकल कॉलेज में हुई आग की घटना के बाद प्रशासन सख्त हो गया है। यहां मेडिकल कालेज के एसएनसीयू में इमरजेंसी रास्ता नहीं है और आग से बचाव के लिए लगाए उपकरणों के क्रियाशीलता में कमियां हैं।
समय-समय पर माॅकड्रिल न होने से उपकरण शो-पीस बने हैं और उन्हें इस्तेमाल करने की जानकारी भी कर्मियों को नहीं है। समय रहते ठीक नहीं कर लिया गया तो घटना होने पर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुए तीन साल से अधिक समय हो गया है। यहां भवन में आग से बचाव के लिए इंतजाम किए हैं। अस्पताल में पानी की पाइप के अलावा जगह-जगह प्वाइंट बने हैं। करीब हर दस मीटर पर स्प्रिंगर लाक लगे हैं, लेकिन कुछ को अभी खोला तक नहीं गया है। पानी के लिए लगे मोटर में बिजली का कनेक्शन नहीं हुआ है। आग की सूचना देने के लिए लगे एलार्म भी कुछ जगह काम नहीं कर रहे हैं।
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चिकित्सा शिक्षक आवास में लगे फायर सिस्टम को मॉक ड्रिल के जरिए परखा गया, लेकिन इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। उधर एसएनसीयू में तीसरी मंजिल पर स्थित है। आकस्मिक परिस्थिति में निकलने के लिए कोई इमरजेंसी रास्ता नहीं है।
आग जैसी घटना होने पर बच्चों को निकालने में दिक्कत हो सकती है। पीआईसीयू के बाहर लगा आग बुझाने का संयंत्र पुराना है। उस पर लिखी तिथि मिट गई है, जिससे उसके एक्सपायरी होने का पता नहीं चल पा रहा है।
पंप में बिजली आपूर्ति नहीं, टेस्टिंग भी नहीं हुई।
मेडिकल कॉलेज के एमसीएच विंग स्थित महिला अस्पताल के बगल में आग बुझाने के लिए पंप का निर्माण कराया गया है, लेकिन अब तक बिजली की आपूर्ति नहीं हो सकी है।
वहीं अंडर ग्राउंड वाटर टैंक बनाया गया है। कुछ हिस्सा खुला है, जो गंदगी से भर गया है। अगर सफाई नहीं हुई तो पाइप जाम होने की संभावना है।
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समय-समय पर माॅकड्रिल न होने से उपकरण शो-पीस बने हैं और उन्हें इस्तेमाल करने की जानकारी भी कर्मियों को नहीं है। समय रहते ठीक नहीं कर लिया गया तो घटना होने पर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
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महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुए तीन साल से अधिक समय हो गया है। यहां भवन में आग से बचाव के लिए इंतजाम किए हैं। अस्पताल में पानी की पाइप के अलावा जगह-जगह प्वाइंट बने हैं। करीब हर दस मीटर पर स्प्रिंगर लाक लगे हैं, लेकिन कुछ को अभी खोला तक नहीं गया है। पानी के लिए लगे मोटर में बिजली का कनेक्शन नहीं हुआ है। आग की सूचना देने के लिए लगे एलार्म भी कुछ जगह काम नहीं कर रहे हैं।
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चिकित्सा शिक्षक आवास में लगे फायर सिस्टम को मॉक ड्रिल के जरिए परखा गया, लेकिन इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। उधर एसएनसीयू में तीसरी मंजिल पर स्थित है। आकस्मिक परिस्थिति में निकलने के लिए कोई इमरजेंसी रास्ता नहीं है।
आग जैसी घटना होने पर बच्चों को निकालने में दिक्कत हो सकती है। पीआईसीयू के बाहर लगा आग बुझाने का संयंत्र पुराना है। उस पर लिखी तिथि मिट गई है, जिससे उसके एक्सपायरी होने का पता नहीं चल पा रहा है।
पंप में बिजली आपूर्ति नहीं, टेस्टिंग भी नहीं हुई।
मेडिकल कॉलेज के एमसीएच विंग स्थित महिला अस्पताल के बगल में आग बुझाने के लिए पंप का निर्माण कराया गया है, लेकिन अब तक बिजली की आपूर्ति नहीं हो सकी है।
वहीं अंडर ग्राउंड वाटर टैंक बनाया गया है। कुछ हिस्सा खुला है, जो गंदगी से भर गया है। अगर सफाई नहीं हुई तो पाइप जाम होने की संभावना है।